रांची में 2022 का अंतिम सूर्यास्त
[caption id="attachment_514690" align="aligncenter" width="1200"]alt="" width="1200" height="1600" /> फोटो/कैप्शन : स्वेता[/caption]
रांची :
62 साल में रिम्स ने देश को दिए नामचीन डॉक्टर
alt="" width="1600" height="900" /> Saurabh Shukla 1960 में राजेंद्र मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (आरएमसीएच) की स्थापना तत्कालीन बिहार के साथ पड़ोसी राज्यों के लोगों के स्वास्थ का ख्याल रखने के उद्देश्य से किया गया था. 2002 में इसका नाम बदल कर राजेंद्र इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (रिम्स) कर दिया गया. अस्पताल को उन्नत बनाया गया, ताकि झारखंड के लोगों को न्यूनतम कीमत पर बेहतर इलाज मिले और राज्य के लोगों की जान बचाई जा सके. 2022 में रिम्स ने कई उपलब्धियों को हासिल किया है, तो वहीं 2023 प्रबंधन के लिए चुनौतियों से भरा हुआ है, 15 नवंबर 2020 को रिम्स के निदेशक के रूप में डॉ कामेश्वर प्रसाद ने पदभार संभाला. एम्स का अनुभव लेकर झारखंड के रहने वाले डॉ कामेश्वर प्रसाद ने अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बनाने का हर संभव प्रयास भी किया है. इसी कड़ी में मरीज हित में कई महत्वपूर्ण काम भी किए गए हैं.
- 2002 में राजेंद्र मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (आरएमसीएच) का नाम बदला गया और इसका नाम राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) पड़ा.
- 2020 के 15 नवंबर को रिम्स के निदेशक के तौर पर डॉ कामेश्वर प्रसाद ने पदभार संभाला. एम्स में काम करने का उनका अनुभव से रिम्स की व्यवस्था में सुधार की आशा है.
कई चुनौतियां भी हैं
हालांकि की इन सबके बीच रिम्स प्रबंधन के समक्ष कई चुनौतियां भी हैं. रिम्स में काम करने वाले डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाना सबसे बड़ी चुनौती होगी. इस वजह से मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है, क्योंकि प्राइवेट प्रैक्टिस के कारण रिम्स में इलाज कराने वाले मरीजों को डॉक्टर ज्यादा समय नहीं दे पाते हैं. कई बार निरीक्षण के दौरान कुछ विभागों में यह देखा गया है कि ड्यूटी के समय डॉक्टर गायब रहते हैं.पिछले एक साल में रिम्स की उपलब्धि
- कोरोना के संक्रमित मरीजों की जांच के लिए बीएसएल (बायोसेफ्टी लेवल) 2 लैब का अधिष्ठापन किया गया है
- कोबास-6800 मशीन लगाई गई
- मरीजों के लिए पांच वक्त गुणवत्ता युक्त भोजन की व्यवस्था की गई है. इसके लिए 3 वर्षों के बाद टेंडर के माध्यम से नई एजेंसी का चयन किया गया है. कोलकाता की कंपनी जाना इंटरप्राइजेज मरीजों को भोजन उपलब्ध करा रही है.
- कोविड समेत अन्य किसी भी तरह के संक्रमण समेत उसके जिन की जांच के लिए जेनेटिक एंड जिनोम्स विभाग की शुरुआत हुई, जहां जिनोम सीक्वेंसिंग मशीन भी लगाई गई है
- कार्डियोलॉजी विभाग में सिंगल प्लेन, बाई प्लेन, कैथ लैब, 23 पेसमेकर और दो इको मशीन का अधिष्ठापन किया गया है.
- ट्रॉमा सेंटर में 256 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन, रेडियोलॉजी विभाग में 128 स्लाइस सीटी स्कैन मशीन और हाई एंड अल्ट्रासाउंड मशीन का अधिष्ठापन किया गया है.
- जनवरी माह में अमृत फार्मेसी द्वारा सस्ती और शीघ्र दवा उपलब्ध कराई जाएगी. इसके अलावा जन औषधि केंद्र की स्थापना भी की गई है.
- किडनी मरीजों के लिए जल्द ही डायलिसिस यूनिट की स्थापना होगी
छात्रों से जुड़े कार्य
- नेशनल मेडिकल काउंसिल की डीएम क्रिटिकल केयर के लिए 2 सीटों पर नामांकन की स्वीकृति
- रिम्स में एमबीबीएस की 250 सीटों पर नामांकन के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को अनुरोध किया गया डीएम न्यूरोलॉजी कोर्स प्रारंभ करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को अनुरोध किया गया है.
- हॉस्पिटल मैनेजमेंट कोर्स शुरू होना है.
- एकेडमिक भवन और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के द्वारा सीएसआर फंड से नवनिर्मित विश्राम सदन का भी काम पूरा हो गया है.
- सुपर स्पेशियलिटी भवन का विस्तार एवं मातृ शिशु रोग अस्पताल का निर्माण किया जाएगा. पुराने अस्पताल के भवन का जीर्णोद्धार होगा.
- रिम्स को ई-हॉस्पिटल सेवा से जोड़ने के लिए मॉडल-1 के तहत पूरे परिसर में नेटवर्क की वायरिंग की गई है. 150 कंप्यूटर की खरीदारी की गई है. जल्द ई-हॉस्पिटल मैनेजमेंट यूनिट शुरू होगा व चिकित्सकों-कर्मियों प्रशिक्षित किया जाएगा.
- केंद्रीय पुस्तकालय को डिजिटल बनाने के लिए केंद्रीय पुस्तकालय भारत सरकार से ई-रिसोर्स उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है
- एनएमसी की गाइडलाइन के अनुरूप संस्थान के विभिन्न जगहों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई है.
- जेएसएससी के माध्यम से विज्ञापन प्रकाशित कर परिचारिका (नर्स) श्रेणी-ए 370 पदों पर नियुक्ति हुई है. अब तक 300 नर्सों ने अपना योगदान भी दे दिया है.
- सफाई व मैन पावर की व्यवस्था के लिए टेंडर के माध्यम से नई एजेंसी का चयन, होमगार्ड रखने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है.
पूरे झारखंड में रंगमंच के लिए अच्छा रहा 2022
alt="" width="1500" height="1000" /> Nilay Singh लगभग दो साल कोरोना का दंश झेलने के बाद राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में एक बार फिर रंगमंच में सक्रियता देखने को मिली. रंगमंच के लिहाज से 2022 अच्छा रहा और रांची समेत पलामू और जमशेदपुर में कई नाटकों के मंचन हुए. कई नाट्य महोत्सवों का भी आयोजन हुआ जिसमें प्रमुख रूप से युवा नाट्य संगीत अकादमी की ओर से छोटानागपुर नाट्य महोत्सव का आयोजन आड्रे हाउस में हुआ. प्रेस क्लब और कला संस्कृति विभाग की ओर से तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव का आयोजन किया गया. इसमें आरयू के परफॉर्मिंग आर्ट डिपार्टमेंट की ओर से नागमंडल, पलामू के मासूम ग्रुप की ओर से आजादी के असली नायक कौन, जेएफटीए की ओर से राम रहीम जमशेदपुर के पथ की ओर से खामोश अदालत जारी है और पत्रकार कला मंच की ओर से अंधेर नगरी चौपट राजा का मंचन किया गया. इस साल वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक पागल का निधन हुआ और उनकी स्मृति में वसुंधरा आर्ट द्वारा उनके नाटकों का महोत्सव किया गया, जिसमें अशोक पागल द्वारा लिखित जिंदा भूत, बहाने और फसाद की जड़ जैसे नाटकों का मंचन हुआ. खास बात ये रही कि जो भी नाट्य संस्थाएं रहीं. उन्होंने अपने बल पर नाटकों का मंचन किया, जिसमें जेएफटीए ने दर्जनों नाटक किए, जिसमें प्रमुख रूप से राम रहीम, जिसका पूरे झारखंड में 9 मंचन किया गया. किस्सा कुर्सी का, हमला, शून्यकाल, अन्नदाता और पंच परमेश्वर जैसे नाटकों का सफल मंचन हुआ. जेएफटीए के निदेशक राजीव सिन्हा बताते हैं कि ये साल रंगमंच के दृष्टिकोण से काफी अच्छा रहा और कई नाटकों का मंचन हुआ, जिसमें युवाओं की भागीदारी रही. एक्सपोजर के संजय लाल का कहना है कि कोरोना काल मे रंगमंच में शून्यता आयी थी, वो टूटी है और राजधानी में कई अच्छे नाटकों का भी मंचन हुआ. एक्सपोजर की ओर से आजादी के दीवाने और कोर्ट मार्शल का मंचन किया गया. पलामू में मासूम ग्रुप के सैकत चटोपाध्याय ने भी 2022 को रंगमंच के लिए अच्छा माना और कहा कि युवाओं का रुझान रंगमंच के प्रति हो रहा है, जो अच्छी बात है. भले ही इनका अंतिम लक्ष्य फिल्मों में काम करना हो, लेकिन फिर भी रंगमंच को ये कुछ साल तो दे ही रहे हैं. मासूम आर्ट ग्रुप ने इस बार अपने नाटक आजादी के असली नायक कौन के कई मंचन किए और हरिमोहन का सपना का मंचन चंडीगड़ में किया. पत्रकार कला मंच के अध्यक्ष अमित दास ने बताया कि इस साल पत्रकारों ने मिलकर पत्रकार कला मंच का गठन किया. मंच की पहली प्रस्तुति अंधेर नगरी चौपट राजा के रूप में एक मई को हुई थी और दिसंबर तक इसके चार मंचन हुए. मंच की खासियत है कि इसके सभी सदस्य पत्रकार हैं और शौकिया तौर पर थिएटर करते हैं. संस्कार भारती की शशिकला पौराणिक बताती हैं कि ये साल रंगकर्मियों के लिए काफी सुकून देने वाला रहा. नाट्य संस्थाओं को अपने स्तर से नाटकों का मंचन करना एक सार्थक प्रयास रहा. संस्कार भारती ने अरे शरीफ लोग का मंचन किया गया. रंगकर्मी ऋषिकेश लाल ने इस साल को रंगमंच के लिए काफी सार्थक माना. ऋषिकेश ने मां शारदे मंच द्वारा अटल कला रत्न अवॉर्ड और पद्मश्री रामदयाल मुंडा स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया. इराष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, गंगटोक की ओर से उरूभंगम की प्रस्तुति रांची में हुई, जिसे छउ नृत्य की शैली में मंचित किया गया दर्शकों ने काफी सराहा. मैट्रिक्स की ओर से ययाति का सफल मंचन हुआ.
रांची रेल मंडल : 2023 में नई सौगात की आस
Vijay Kumar Gope रांची रेल मंडल के लिए कुछ मीठी व कुछ खट्टी यादों के साथ वर्ष 2022 का समापन हो गया. उसके द्वारा की गयी सराहनीय पहल को भी याद किया जा रहा है. रांची रेल डिवीजन ने वर्ष 2022 में कई ऐसे नए कार्य किए, जिससे उसे सराहना मिली है. इसके साथ ही नए वर्ष का आगाज नयी सौगात की आस से होने जा रहा है. नए साल में रांची से वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू होने की उम्मीद है. वंदे भारत एक्सप्रेस हटिया से हावड़ा तक चल सकती है. 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली इस ट्रेन के चलने से रांची और हावड़ा के बीच की दूरी तय करने में यात्रियों का समय बचेगा. रांची से हावड़ा तक की 419 किलोमीटर की दूरी महज 4 घंटा 55 मिनट में तय किया जा सकेगा.यात्रियों को मिलेगी हर सुविधा
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रियों को अन्य ट्रेनों के मुकाबले अतिरिक्त सुविधा मिलेगी. हर सीट के नीचे चार्जिंग प्वाइंट रहेगा. वाईफाई सिस्टम, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली, वैक्यूम शौचालय, सीट के नीचे रेड लाइट, दिव्यांग यात्रियों के लिए व्हीलचेयर के अलावा खूबसूरत सजावट देखने को मिलेगी.वर्ष 2022 में रांची रेल मंडल ने किये ये कार्य
- जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रांची रेलवे स्टेशन के री-डेवलपमेंट कार्य के लिए 4 47 करोड़ की सौगात दी थी, जिससे रांची रेलवे स्टेशन का री-डेवलपमेंट कार्य शुरू किया गया है.
- रांची रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का एक्सटेंशन पार्किंग तक किया गया, जिसमें दो नए एक्सीलेटर लगाए गए हैं.
- रांची और हटिया स्टेशन पर आधार सेवा केंद्र का शुभारंभ किया गया.
- पिस्का स्टेशन री-डिवेलपमेंट का फेज वन और आरओबी का शुभारंभ किया गया.
- लोहरदगा स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज और नए प्लेटफार्म बनाए गए
- हटिया-बडामुंडा दोहरीकरण (डबल लाइन) के अंतर्गत हटिया गोविंदपुर 41 किलोमीटर दोहरीकरण किया गया है.
- बालसीरिंग, लोधमा, कर्रा, गोविंदपुर में नया स्टेशन बनाया गया.
- हटिया स्टेशन में नया कोच वाशिंग प्लांट लगाया गया, जिसमें पानी की खपत कम और सफाई पहले की तुलना में अच्छी होती है.
- हटिया स्टेशन पर वाटर साइकिल इन प्लांट लगाया गया.
- हटिया स्टेशन पर पार्सल मैनेजमेंट की शुरुआत की गयी.
- रेलवे अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया, जिसके तहत 40 बेड में ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है.
- 75 फीसदी ट्रेनों को एलएचबी कोच में बदला गया.
- रांची रेल मंडल की ओर से स्पेशल ट्रेन, परीक्षाएं स्पेशल ट्रेन, सप्ताहिक ट्रेनों का परिचालन किया गया.
- 43वीं अखिल भारतीय रेलवे महिला हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. वहीं एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम का विस्तारीकरण भी किया गया.
सफल स्टार्टअप से बनाया अलग मुकाम
Dhanbad Reporter एनआईटी दुर्गापुर से एमबीए करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब मिली. परंतु कुछ करने की चाहत ने सोनू पंडित को स्टार्टअप खड़ा करने को प्रेरित किया. उन्होंने आईआईटी-आईएसएम के पीएचडी के छात्र राज्यवर्धन कुमार और बीटेक के छात्र आयुष केजरीवाल के साथ डिस्काउंट बाजार (ट्रैक डील) नाम की एक स्टार्टअप खड़ी की. धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और धनबाद से शुरू इस स्टार्टअप से आज झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के लगभग 10 हजार लोग लाभ उठा रहे हैं. सोनू बताते हैं कि वह अब अपने प्रोजेक्ट को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना बना रहे हैं.alt="" width="150" height="150" />इन्क्यूबेशन सेंटर में मिली जगह सोनू के स्टार्टअप ट्रैक डील की सराहना आईआईटी-आईएसएम ने भी की. आईआईटी ने वर्ष 2018-19 में संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर में उन्हें जगह दी. यहां वह आईआईटी-आइएसएम के कई छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत बने.
मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं सोनू पंडित
सोनू पंडित के सफल स्टार्टअप से कई विद्यार्थी मोटिवेट हुए. कोरोना काल में उन्होंने मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी अपनी पहचान बनाई. उन्होंने एनआईटी दुर्गापुर, आईआईटी-आईएसएम सहित पूर्वोत्तर भारत के कई शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को ऑनलाइन संबोधित किया एवं कोरोना काल से उबरने में मदद की.अब अफीम की कॉन्ट्रेक्ट खेती, टमाटर की जगह उगा रहे नशे की फसल
Bismay Alankar हजारीबाग और चतरा के सीमावर्ती क्षेत्रों में अफीम की खेती जोरों पर है. पहले जहां टमाटर की खेती की जाती थी उन खेतों में अफीम उगाया जा रहा है. पहली बार झारखंड में अफीम की कॉन्ट्रैक्ट खेती भी शुरू हुई है. कॉन्ट्रेक्ट पर अफीम की खेती इस इलाके में पहली दफा किया जा रहा है, जो काफी चौंकाने वाला है. कॉन्ट्रैक्ट खेती के गंभीर परिणाम होंगे, इसकी आशंका भी जताई जा रही है .क्या होती है अफीम की कॉन्ट्रैक्ट खेती ?
alt="" width="720" height="312" /> कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में सामान्यत: बड़ी कंपनियां किसानों से एक कॉन्ट्रैक्ट करती हैं, जिसमें वो किसानों को बीज, खाद और कृषि कार्य में लगने वाले पैसे का भुगतान करती है. इसके एवज में किसानों से उनकी पूरी फसलें खरीद लेती हैं. अब कुछ इसी अंदाज में अफीम के लिए पंजाब और हरियाणा के कारोबारी पैसे लगा रहे हैं. चतरा और हजारीबाग के युवक ज्यादा पैसे कमाने की लालच में इस दलदल में फंस रहे हैं. नशे के कारोबारी, जो मुख्यतः दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र से आते हैं. स्थानीय स्तर पर एक युवक को मैनेजर नियुक्त करते हैं. उसे एक मोटी रकम देते हैं, जिसका काम आसपास के गांव के लोगों से अफीम की खेती करवाते हैं. देखरेख करने की भी जिम्मेदारी होती है. इसके एवज में उन्हें बड़ी रकम दी जाती है.

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