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रिम्स की उपलब्धि: सीने में घुसे खंजर की सफल सर्जरी कर बचायी मरीज की जान

Ranchi: डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है. उन्हें ये तमगा इसलिए दिया गया है क्योंकि अगर डॉक्टर चाह ले तो मरीज की जान बचाई जा सकती है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है रिम्स के चिकित्सकों ने. जहां 25 वर्षीय श्याम नाम के युवक के सीने में खंजर घुस गया था. मरीज रांची का रहने वाला है. आनन-फानन में उसके परिजन उसे लेकर रिम्स पहुंचे. जहां इमरजेंसी में तैनात जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने मरीज को देखा. मरीज की स्थिति गंभीर थी. उसे तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया. साथ ही रिम्स के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों को भी सूचना दी गई.

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मरीज के सीने से निकाला गया खंजर

सीने में फंसा हुआ था खंजर का हिस्सा

घायल मरीज का तुरंत एक्स-रे और सीटी स्कैन कराया गया. जिससे पता चला कि खंजर का लोहे वाला हिस्सा हृदय के पास है. दाएं फेफड़े में घुसा हुआ है. मरीज की स्थिति को नियंत्रण कर ऑपरेशन करने की तैयारी शुरू कर दी गई.

एनेस्थिसिया टीम, सीटीवीएस और सर्जरी के डॉक्टरों ने किया सफल ऑपरेशन

सीने की हड्डी को काटकर खंजर को बाहर निकाला गया. ऑपरेशन के दौरान खून का बहाव कम हो इसके लिए भी चिकित्सकों ने विशेष ध्यान रखा. ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि खंजर हृदय को छूते हुए दाएं फेफड़े के बीच में घुसा हुआ है. छाती की हड्डी को भी फ्रैक्चर कर चुका था. रिम्स के चिकित्सकों ने आपसी समन्वय बनाकर ऑपरेशन कर मरीज की जान बचाई है.

कोरोना काल में ऐसा ऑपेरशन चुनौतीपूर्ण लेकिन सफल हुआ ऑपरेशन

सीटीवीएस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अंशुल कुमार ने कहा कि एक ओर जहां कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है. वहीं ऐसी परिस्थिति में मरीज का सफल ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण जरूर था. लेकिन खुशी इस बात की है कि करीब 2 घंटे से अधिक समय तक चली इस सर्जरी के बाद हम मरीज की जान बचाने में सफल हुए.

ऑपरेशन में इनका रहा योगदान

सर्जरी विभाग के डॉ निरंजन, डॉ सुशील, डॉ अंकित, डॉ नयन, डॉ आसरा. सिटीवीएस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अंशुल और शमीम. वहीं एनेस्थिसिया विभाग के डॉ अंशु का योगदान रहा.

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