Ranchi : झारखंड में नीट के जरिए मेडिकल, डेंटल और आयुष कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्रों के प्रमाण-पत्रों की अब कड़ी जांच होगी. फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर एडमिशन लेने की कोशिश करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने ऐसे मामलों में एडमिशन रद्द करने के साथ FIR दर्ज कराने का भी फैसला लिया है.
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स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने नीट-यूजी और पीजी एडमिशन के लिए नई SOP लागू की है. इसके तहत छात्रों के स्थानीय निवास, जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों की ऑनलाइन जांच के साथ जरूरत पड़ने पर भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा.
राज्य स्तर पर जांच के लिए अलग-अलग उच्चस्तरीय समितियां बनाई गई हैं. ये समितियां मेडिकल, डेंटल और आयुष कॉलेजों में होने वाले एडमिशन से जुड़े प्रमाण-पत्रों की जांच करेंगी.
कॉलेज स्तर पर भी प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच होगी. इसके लिए निदेशक, प्राचार्य या डीन की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी. कॉलेज के अधीक्षक और नामांकन प्रभारी भी इसमें शामिल होंगे.
संदिग्ध प्रमाण-पत्र मिलने पर मामला संबंधित जिले के उपायुक्त को भेजा जाएगा. जिला प्रशासन को प्रमाण-पत्र का भौतिक सत्यापन कर 10 कार्य दिवसों के अंदर जांच रिपोर्ट देनी होगी. जांच पूरी होने तक छात्र का एडमिशन केवल औपबंधिक रहेगा. प्रमाण-पत्र सही पाए जाने के बाद ही एडमिशन को अंतिम रूप दिया जाएगा.
अगर जांच में किसी छात्र का प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है, तो संबंधित कॉलेज उसका एडमिशन तुरंत रद्द करेगा. इसके साथ ही छात्र के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
सरकार ने एडमिशन के दौरान जमा किए गए सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है. इनमें डिजिटल और कागजी दोनों रिकॉर्ड शामिल होंगे. जरूरत पड़ने पर बाद में भी इन दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा सकेगी. यह व्यवस्था रिम्स रांची के साथ राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल, डेंटल, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी कॉलेजों पर लागू होगी.
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से नीट एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और फर्जी प्रमाण-पत्र के जरिए सीट हासिल करने की कोशिशों पर रोक लगेगी.
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