Lagatar desk : एक्टर और तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के अध्यक्ष विजय आज सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के समक्ष पेश होंगे. यह पेशी तमिलनाडु के करूर जिले में पिछले साल सितंबर में एक पार्टी कैंपेन कार्यक्रम के दौरान हुई भगदड़ की चल रही जांच के सिलसिले में होगी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी.
जानकारी के अनुसार, TVK अध्यक्ष विजय चेन्नई एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं और कुछ ही देर में राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे. इसके बाद वह CBI मुख्यालय जाकर जांच में सहयोग करेंगे.
#WATCH | TVK Chief, actor Vijay reaches Delhi as he will appear before the Central Bureau of Investigation (CBI) in Delhi today for a probe into the Karur stampede. pic.twitter.com/eTAOWJk9ro
— ANI (@ANI) January 12, 2026
CBI ने इससे पहले विजय को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 179 के तहत नोटिस जारी किया था. यह नोटिस इस महीने की शुरुआत में भेजा गया था, जिसमें उन्हें 6 जनवरी को जांच एजेंसी के सामने पेश होने के निर्देश दिए गए थे. मामला 27 सितंबर 2025 को करूर में TVK के एक कैंपेन कार्यक्रम के दौरान हुई भगदड़ से जुड़ा है. विजय चार्टर्ड फ्लाइट से चेन्नई से दिल्ली पहुंचे हैं और आज CBI अधिकारियों के सामने अपना बयान दर्ज कराएंगे.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ मामले की जांच CBI को सौंप दी थी. जांच के तहत एजेंसी ने नई दिल्ली में TVK के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों से पूछताछ की है. पार्टी नेताओं ने CBI को घटना से जुड़े वीडियो फुटेज सौंपे हैं और तमिलनाडु सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं.
CBI ने घटना के दौरान विजय द्वारा इस्तेमाल किए गए कैंपेन वाहन की भी जांच की है और वाहन के ड्राइवर से पूछताछ की जा चुकी है. करूर भगदड़ एक बड़ी राजनीतिक सभा के दौरान हुई थी, जिसमें कई लोग घायल भी हुए थे. इस घटना के बाद राज्य में भारी आक्रोश देखने को मिला और न्यायिक व कानूनी जांच की मांग तेज हो गई थी.
इस बीच, दिसंबर की शुरुआत में तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर CBI जांच के आदेश को रद्द करने की मांग की थी. राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि अभिनेता और राजनेता विजय न तो जांच एजेंसी चुन सकते हैं और न ही निगरानी समिति, खासकर तब जब वे और उनकी पार्टी इस मामले में आरोपी हैं.
इसके जवाब में TVK ने कहा कि राज्य सरकार के हलफनामे में कई जरूरी तथ्यों का अभाव है और CBI जांच या सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति के अधिकार क्षेत्र को हटाने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है. पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार के कई दावे झूठे और भ्रामक हैं और ऐसे तर्कों से चल रही जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है.
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