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गौशाला न्यास समिति के कारनामे : ट्रस्टी चेयरमैन ने कहा- चलेगी मेरी मर्जी, नहीं बनाएंगे सदस्य

सदस्यता शुल्क लौटाया, डोनेशन का पैसा वापस चाहिए तो प्रूफ दे, लौटा देंगे

Ranchi: गौशाला न्यास समिति के नये फरमान से 110 सदस्य आहत हैं. ट्रस्टी चेयरमैन रतन जालान ने सदस्यों को पत्र और 11 सौ रुपया का चेक भेज कर कहा है कि नये सदस्य नहीं बनाये जायेंगे. आपका सदस्यता शुल्क लौटाया जा रहा है. डोनेशन का पैसा गो सेवा में खर्च हो गया है. फिर भी वापस चाहते हैं तो प्रूफ दे, वह भी लौटा देंगे. ट्रस्टी चेयरमैन रतन जालान के तुगलकी फरमान पर सभी सदस्य सवाल खड़ा कर रहे हैं. पीड़ित सदस्यों का कहना है कि नये सदस्य बनाने की बात तो है ही नहीं. मामला तो सदस्य बना कर भी मान्यता नहीं देने का है. हमे तो वर्ष 2019 में ही पूर्व ट्रस्टी चेयरमैन स्व: ज्ञानप्रकाश बुधिया के हस्ताक्षर से जारी सदस्यता प्रमाण पत्र दे दिया गया था, फिर नये सदस्य बनाने की बात तो सारासर बेमानी है. पत्र और चेक भेजना एकदम मूर्खतापूर्ण हरकत है. अब तो प्रूफ भी देने की जरुरत नहीं है. गौशाला के लेटर पैड पर चेयरमैन के हस्ताक्षर से जारी पत्र से यह साफ हो गया है कि 135 लोगों ने गौशाला का आजीवन सदस्य बनने के लिए सारी प्रक्रिया पूरी की थी. इससे पहले विरोध शुरू हुआ तो गुपचुप ढंग से 135 में से 25 को छोट कर सदस्य बना लिया. 110 को बहलाते रहे. मान्या पैलेस, मोरहाबादी में 28 फरवरी को हुए आम सभा में भी एक माह का समय मांग कर सब का समय खराब कर दिया. अब मार्च 2024 में यह कह कर चेक लौटा रहे कि नया सदस्य नहीं बनाना है. इतने वर्षों तक यूं ही क्यों लटकाये रखा. तत्काल जवाब देना था. उसी वक्त चेक लौटा देते, सदस्यता शुल्क और डोनेशन के लाखो रुपये चार साल तक दबाये रखा. कोट का नोटीस मिला तो कुंभकर्णी निद्रा से जागे हैं. ट्रस्टी चेयरमैन डाक से पत्र और चेक भेज कर पता नहीं क्या जताना चाह रहे हैं.

दो दागी, तीसरा है चापलूस

पीडि़त सदस्य बताते हैं कि वर्ष 2019 में सदस्यों को आजीवन सदस्य बनाये जाने को लेकर ट्रटियों की बैठक हुई थी, जिसमें चार लोग विपक्ष में मत दिए थे, जिनमे से एक का स्वर्गवास हो गया है. तीन लोगों में एक तो वर्तमान चेयरमैन रतन जालान हैं, दूसरे शत्रुधन लाल गुप्ता और तीसरे ओम प्रकाश छापडि़या हैं. सदस्यों ने तीनो पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनकी कारगुजारी जगजाहिर है. शत्रुधन ने तो लगभग सात एकड़ गौशाला की जमीन कम किराये पर डीएवी स्कूल को सौ साल के लीज पर दिलवा दी और रतन तो इनसे भी कई कदम आगे हैं, इन्होंने 15.95 एकड़ जमीन मात्र सात हजार रुपये डिसमिल के भाव में राजकुमार केडिया को बेच दी. इतना ही नहीं राजकुमार को उपकृत करने के लिए उन्हें ट्रस्टी भी बना लिया. पर्दे के पीछे का खेल सब को पता है. तीसरे ओमप्रकाश छापडि़या पता नहीं किस लोभ-लालच में चेयरमैन की हां में हां मिलाते हैं. चापलूसी करते हैं. उम्र के अंतिम पढ़ाव में सच्चाई से मुंह नहीं फेरना चाहिए. सदस्यों का कहना है कि रतन किसी भी कीमत पर नहीं चाहते कि उनकी बादशाहत पर कोई खतरा आये. इसी कारण वे अपने पक्षधर के अलावे किसी को भी सदस्य नहीं बनने देना चाहते. कोर्ट का नोटीस मिलने के बाद से ही रतन जालान हताशा में ऊल-जलूल हरकत कर रहे हैं.

मैं और हम की भावना से ग्रस्त हैं ट्रस्टी: अनिल अग्रवाल

अनिल अग्रवाल बताते हैं कि उन्हें भी चेक और पत्र भेजा गया है, लेकिन वे इसको लेकर गंभीर नहीं हैं. अनिल का कहना है कि मैं और हम की भावना से ग्रस्त हो ऐसा किया जा रहा है. कलयुगी प्रभाव के कारण गो सेवा के स्थान पर वर्चस्व बनाये रखने का कुचक्र रचा गया है. गौशाला में कोई भी सेवा भावना से ही जुड़ता है, ऐसे में सदस्यों की संख्या न बढ़ा कर कुछ लोग बादशाहत कायम रखने का असफल प्रयत्न कर रहे हैं. वह दिन दूर नहीं जब, इसके खिलाफ जल्द ही लोग एकजुट हो आंदोलन करेंगे. अनिल बताते हैं कि वे मारवाड़ी सम्मेलन, अग्रसेन भवन और मारवाड़ी भवन सहित कई सामाजिक संगठनों से जुड़े हैं. सभी जगह नये सदस्यों के लिए हमेशा द्वार खुला रहता है. जिससे संगठनों के मान-सम्मान में चार-चांद लग जाता है.

ईगो में ले रखा है : पवन पोद्दार

पवन पोद्दार बताते हैं कि मामला उतना बड़ा नहीं है, जितना ये लोग बना रहे हैं. ईगो के कारण सब कुछ जानते और समझते हुए भी गलत कर रहे है. हमे भी चेक भेजा गया था, लेकिन हमने लिया नहीं. डाक के माध्यम से चेक आया था, पर किस बाबत भेजा गया है, यह उल्लेख नहीं होने के कारण चेक लौटा दिया. उन्होंने बताया कि कई और ने भी चेक लौटा दिया है. [wpse_comments_template]

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