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अडानी-हिंडनबर्ग मामला : SC ने SIT जांच से किया इनकार, SEBI की जांच को सही बताया

LagatarDesk :  अडानी-हिंडनबर्ग (Adani Hindenburg) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की जांच SIT को सौंपने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच सेबी ही करेगी. मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) की जांच को सही बताया. साथ ही अदालत ने मामले की जांच के लिए सेबी को तीन महीने का समय दिया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सेबी को 24 मामलों की जांच करने को कहा गया था. मार्केट रेग्युलेटर ने 24 में से 22 मामलों की जांच पूरी कर ली है. 2 मामलों की जांच अभी बाकी है. कोर्ट ने कहा कि इन मामलों की जांच के लिए सेबी को तीन महीने का समय दिया जाता है. सेबी ने फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) के नियमों को यह कहते हुए रद्द करने से इनकार कर दिया कि अदालतें नियामक शासन के क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती हैं.

24 नवंबर को सुनवाई कर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा लिया था सुरक्षित 

इससे पहले 24 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-हिंडनबर्ग मामले में सुनवाई करते फैसला सुरक्षित रक्षा था. इस दौरान अदालत ने मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) की जांच और एक्सपर्ट कमिटी की निष्पक्षता पर उठाये जा रहे सवालों को दरकिनार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट को आखिरी सत्य नहीं माना जा सकता है. कहा था कि इस रिपोर्ट में ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिससे सेबी पर संदेह किया जाये. हम बिना ठोस आधार के सेबी पर अविश्वास नहीं कर सकते हैं.

हिंडनबर्ग ने 25 जनवरी को जारी की थी रिपोर्ट

बता दें कि अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने 25 जनवरी को 30000 से अधिक शब्दों की एक रिपोर्ट जारी की थी. जिसमें 80 से अधिक सवालों के जवाब अडाणी ग्रुप से मांगे गये थे. रिपोर्ट में अडानी ग्रुप की कंपनियों की शेयर वैल्यू कंपनियों को वास्तविक वैल्यू से 85 प्रतिशत तक अधिक बताया गया है. इसके लिए अलग-अलग तरह के नाजायज तरीकों को अपनाया गया है. इतना ही नहीं ग्रुप की सभी प्रमुख लिस्टेड कंपनियों पर काफी ज्यादा कर्ज भी है.

हिंडनबर्ग ने रिपोर्ट जारी कर अडानी ग्रुप पर लगाया था आरोप

बता दें अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने 25 जनवरी को 30000 से अधिक शब्दों की एक रिपोर्ट जारी की थी. जिसमें 80 से अधिक सवालों के जवाब अडाणी ग्रुप से मांगे गये थे. रिपोर्ट में अडानी ग्रुप की कंपनियों की शेयर वैल्यू कंपनियों को वास्तविक वैल्यू से 85 प्रतिशत तक अधिक बताया गया था. इसके लिए अलग-अलग तरह के नाजायज तरीकों को अपनाने का भी आरोप लगाया गया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि ग्रुप की सभी प्रमुख लिस्टेड कंपनियों पर काफी ज्यादा कर्ज है.

अडानी ने अमेरिकी रिसर्च फर्म को 413 पन्नों का भेजा था जवाब

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट जारी करने के तीन दिन बाद अडानी ग्रुप ने अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग को 413 पन्नों का जवाब भेजा था. अडानी ग्रुप ने कहा था कि वह 24 जनवरी को ‘मैडऑफ्स ऑफ मैनहट्टन’ हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट को पढ़कर हैरान और काफी परेशान है. इस रिपोर्ट झूठ के अलावा और कुछ नहीं है. ग्रुप ने हिंडनबर्ग के सभी आरोपों को निराधार बताया था. अडानी ग्रुप ने कहा था कि यह केवल किसी विशिष्ट कंपनी पर एक अनुचित हमला नहीं है, बल्कि भारत, भारतीय संस्थानों की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता और भारत की विकास की कहानी और महत्वाकांक्षा पर एक सुनियोजित हमला है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट चुनिंदा मिस-इन्फॉर्मेशन का एक दुर्भावनापूर्ण संयोजन है. ग्रुप को बदनाम करने और खुद को लाभ पहुंचाने के लिए यह रिपोर्ट तैयार की गयी है. अडानी ग्रुप ने भले इस रिपेार्ट को झूठ करारा दिया. लेकिन इस रिपोर्ट का अडानी ग्रुप के निवेशकों के सेंटिमेंट पर काफी बुरा असर पड़ा था. उनके शेयरों में भारी गिरावट आयी थी. शेयरों में आयी गिरावट का असर अडानी के नेटवर्थ पर भी पड़ा था. उनकी संपत्ति 60 अरब डॉलर तक घट गयी थी. [wpse_comments_template]

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