: जंगली भालू से दहशत में लोग, अभी तक नहीं पकड़ पाया वन विभाग
दो अस्पतालों का चक्कर काट एमजीएम पहुंचने तक हो गई मौत
बड़े भाई उमेश ने बताया कि उस वक्त तक भाई जिंदा था. उसे तत्काल गम्हरिया स्थित टीचर ट्रेनिंग स्कूल के पास सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे एमजीएम अस्पताल जाने को कहा. फिर आनन-फानन में उसे आदित्यपुर स्थित गंगोत्री नर्सिंग होम ले गए, वहां भी डॉक्टरों ने देखा और बिना इलाज किए जल्दी एमजीएम अस्पताल लेकर जाने को कहा. जब तक परिजन सुमित को लेकर एमजीएम आए तब तक उसकी जान निकल चुकी थी.टेंट हाउस में साउंड सिस्टम फिटिंग का काम करता था
अस्पताल में परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था. उनका आरोप था कि सही समय बेटे को लेकर वे अस्पताल आए थे. पहले दो अस्पतालों में डॉक्टरों ने यदि उसका इलाज कर लिया होता तो सुमित को बचाया जा सकता था. सुमित पेशे से टेंट हाउस में साउंड सिस्टम फिटिंग का काम करता था. सुमित का बड़ा भाई फोटोग्राफर है, जबकि पिता निताई पलम्बर का काम करते हैं. उमेश ने बताया कि सुमित सूखा नशा करने का आदी था. इसके लिये उसे हमेशा रोका जाता था, शायद यही बात उसे बुरी लग गई हो, जिस कारण उसने फांसी लगा ली. बहरहाल, पुलिस ने शव का पंचनामा करने के बाद पोस्टमार्टम के लिये भिजवा दिया है.
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