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आदित्यपुर : रोहिणी नक्षत्र में किसानों ने खेत में पूजा कर हल जोता

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Adityapur : रोहिणी नक्षत्र का आगमन हो चुका है. खेती- गृहस्थी करनेवाले किसान कृषि कार्य में जुट गए हैं. सरायकेला जिले के किसान भी मौसम में हुए बदलाव और बारिश से गदगद हैं. खास कर आदिवासी-मूलवासी समाज के लिए रोहिणी नक्षत्र उत्सव से कम नहीं होता है. 13 दिन के इस पक्ष में किसान खेतों की पूजा अर्चना कर खेती के कार्य का शुभारंभ करने में जुट जाते हैं. [caption id="attachment_319825" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/05/krishi3.jpg"

alt="" width="600" height="271" /> किसान खेतों की पूजा अर्चना कर खेती के कार्य का शुभारंभ करते.[/caption] इसे भी पढ़ें :चांडिल">https://lagatar.in/chandil-a-wild-elephant-wrapped-in-a-trunk-in-chirugoda-slammed-an-old-woman-died/">चांडिल

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अपने घर के प्रवेश द्वार की गोबर से पुताई करती हैं महिलाएं

कोल्हान में विशेषकर आदिवासी-मूलवासी समुदाय की महिलाएं रोहिणी नक्षत्र के प्रवेश होने के मुहूर्त पर तड़के सुबह तीन से पांच बजे अपने घर के प्रवेश द्वार की गोबर से पुताई के बाद गोबर का चिन्ह हाथ से अपने घर के बाहरी दीवारों के चारों ओर लगातीं हैं. यह कार्य एक विशेष योग के माध्यम से किया जाता है. इसमें किसी का टोकना या बातचीत करना मना रहता है. मान्यता है कि यदि यह कार्य पूर्ण योग से करती है, तो उस घर में साल भर किसी प्रकार की कोई रोग व्याधि, अथवा अनाज की कमी नहीं होती है. उसके बाद घर-आंगन की लीपाई- पुताई कर घर के बुजुर्ग, जो कृषि कार्य में संलग्न रहते है, वे एक डुभा या लोटा में बीज लेते है और उस बीज को भूतपीड़ा और ग्राम स्थान में देने के पश्चात उसे गमछा या धोती में ढंक कर अपने खेत में लेकर जाते है और खेत के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) कोना में विधिवत बीज की बुआई करते है. इस क्रम में वह किसी से कोई बातचीत नहीं करता है. इसे “बीज पुन्यहा” कहते हैं. रास्ते में भी किसी से कोई बातचीत नहीं करते हैं. तत्पश्चात महिलाएं अपने मापक की वस्तुएं जैसे पेइला, पुवा, टोकी, डुभा आदि को धोकर गुड़ी देकर सिंदूर का टीका लगाती है और भूतपीड़ा के सामने रखती है. इसके बाद अच्छी फसल की कामना कर भूतपीड़ा में पूजा अर्चना की जाती है. शाम को घर की कुंवारी लड़की अपने खेत को छोड़कर दूसरे के खेत से रोहिन मिट्टी लाती है. इसे लाने के क्रम में वह किसी से बातचीत नहीं करती है. [caption id="attachment_319826" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/05/krishi1.jpg"

alt="" width="600" height="246" /> पूजा के लिए दूसरे के खेत से रोहिन मिट्टी लाती हुई.[/caption] इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-seminar-on-direct-and-indirect-taxes-of-aiftp-and-commercial-tax-advocates-association/">जमशेदपुर

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मिट्टी से तिलक लगाया जाता है

मिट्टी लाने के क्रम में यदि कोई टोकता है तो उस मिट्टी को उसी जगह फेंक देती है, और फिर से दूसरी मिट्टी लेकर आती है. इस के बाद मिट्टी को भूतपीड़ा में रखा जाता है, और फिर इसे प्रत्येक घर के तीन कोने में रखा जाता है. शेष बचे मिट्टी को संभाल कर रखते हैं और जब बीज खेत में डाला जाता है उस समय बीज में यह मिट्टी मिलाई जाती है. पूजा- अर्चना में भी इस मिट्टी का तिलक किया जाता है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-after-death-in-the-company-of-dubai-the-body-of-the-youth-of-azad-nagar-reached-the-city/">जमशेदपुर

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रोहिणी के दिन आषाढ़ी फल खाने की है परंपरा

मान्यता है कि रोहिणी के दिन कई प्रकार के विषाक्त जीव पृथ्वी के गर्भ से बाहर निकलते हैं. अतः इस दिन आषाढ़ी फल खाने से इन सब जीवों के काटने से विष का प्रभाव कम होता है. परंपरा के अनुसार इस दिन से कटहल का सब्जी खाना प्रारंभ होता है तथा इस दिन से नीम की सब्जी खाना बंद हो जाता है. [wpse_comments_template]

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