- कहा- जियाडा से क्लियरेंस नहीं मिलने से उद्योगों को नहीं मिल रही वित्तीय मदद
- सड़क, नाली की समस्याओं को दूर करने के लिए सौंपा मांग पत्र
: जन्मदिन मनाकर लौट रही छात्रा सड़क दुर्घटना में घायल उन्होंने मुख्यमंत्री से पहले से रुग्ण हो चुकी वैसी इकाईयां जो किसी कारणवश बंद हो गयी है वैसी इकाइयों को जियाडा द्वारा डीओपी (DOP) डिक्लेरेशन ऑफ प्रोजेक्ट नहीं दिया जा रहा है. यह मुद्दा पिछले छह वर्षों से राज्य सरकार व उद्योग विभाग के पास लंबित है. रुग्ण व बंद इकाइयों को ज़मीन के अभाव में दूसरे लोगों को बेची तो जाती है लेकिन डीओपी नहीं मिलने के कारण जियाडा में उसका नाम ट्रांसफ़र नहीं हो पाता है, जिससे उस उद्योग को किसी भी वित्तीय संस्थान से वित्तीय सहायता नहीं मिल पाती है. जिससे उस उद्योग का विकास रुक जाता है. वहीं क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ रोजगार भी प्रभावित हो रहा है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-now-passengers-of-lauhanchal-will-be-able-to-go-to-delhi-from-dangowaposi-station-for-rs-600/">किरीबुरु
: डांगोवापोसी स्टेशन से अब लौहांचल के यात्री 600 रुपये में जा सकेंगे दिल्ली उन्होंने बताया कि उनके मांग पत्र में औद्योगिक क्षेत्र की जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुकी सड़कों और नालियों का पुनर्निमाण कराने, जुस्को से पर्याप्त मात्रा में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कराने, आदित्यपुर और गम्हरिया के औद्योगिक क्षेत्र में मौजूदा इकाइयों के विस्तार व नई इकाइयों की स्थापना की भारी मांग को देखते हुए जमीन उपलब्ध कराने की मांगें शामिल है. जमीन उपलब्ध होने से औद्योगीकरण का मार्ग प्रशस्त होगा तथा रोज़गार सृजन करके हम अपने राज्य का विकास कर सकेंगे. उनके साथ प्रवीण गुटगुटिया, राजीव रंजन मुन्ना, चतुर्भुज केडिया, पिंकेश महेश्वरी, संतोख सिंह सहित अन्य उद्यमी मौजूद थे. [wpse_comments_template]
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