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आदित्यपुर : सिविल सर्जन के लिपिक पर भ्रष्टाचार का आरोप, बावजूद जमे हैं पद पर

  • आरटीआई कार्यकर्ता ने सबूत मिटाने की आशंका जाहिर करते हुए की स्थानांतरण की मांग
Adityapur (Sanjeev Mehta)लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर आरटीआई कार्यकर्ता बबलू कालुंडिया ने सिविल सर्जन कार्यालय सरायकेला खरसावां में पदस्थापित भ्रष्टाचार के आरोपी संगणक (लिपिक) कुलदीप घोषाल को अन्यत्र जिला में स्थानांतरण करने की मांग की है. कालुंडिया ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से सिविल सर्जन सरायकेला- खरसावां को कुल चार बिंदुओं पर अपना सवाल पूछा है. जिसमें कुलदीप घोषाल पर भ्रष्टाचार का मुकदमा सत्र न्यायालय सरायकेला में विचाराधीन होने का मामला प्रकाश में आया है. इसे भी पढ़ें : गढ़वा">https://lagatar.in/garhwa-allegation-of-irregularities-in-abua-housing-women-pushed-with-housing-coordinator/">गढ़वा

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बात तब खास बन जाती है जब आरोपी पर मुकदमा दर्ज होने एवं दर्ज आरोप के कारण कारावास जाने के बाद भी उनका स्थानांतरण किसी दूसरे कार्यालय में नहीं किया जाता है. ताकि भ्रष्टाचारी जेल से वापस लौट कर अपने ऊपर लगे सारे आरोपों के सबूतों को आसानी से मिटा सके. मामला सिविल सर्जन ऑफिस सरायकेला-खरसावां का है. विदित हो कि वर्ष 2018 में सत्र न्यायालय सरायकेला के समक्ष केस संख्या-000147/2018 के द्वारा कुलदीप घोषाल , संगणक, सिविल सर्जन ऑफिस सरायकेला पर संगीन अपराधिक मामलों पर मुकदमा दर्ज हुआ. इसके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा था. घोषाल वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं. जिनपर मुकदमा सत्र न्यायालय के समक्ष न्यायिक प्रक्रिया के अन्तर्गत विचाराधीन है. इसे भी पढ़ें : अमित">https://lagatar.in/amit-shah-said-what-problem-does-rahul-gandhi-have-with-caa-tell-the-public-openly-the-opposition-is-doing-politics-of-lies/">अमित

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छह वर्ष बीत जाने के बाद भी घोषाल का स्थानान्तरण अबतक नहीं हुआ है. बल्कि इसके उलट उन्हें जिला स्तरीय टेंडर एवं कर्मचारियों की नियुक्ति तथा ट्रांसफर पोस्टिंग जैसी मालदार फाइलें डील करने के लिए उन्हें संचिकाएं सोंपा गया है. जबकि किसी भी मामले में सरकारी कर्मियों पर किसी भी न्यायालय में मुकदमा दर्ज होने के उपरांत सर्वप्रथम विभागीय अधिकारियों का कर्तव्य होता है कि विभागीय कार्रवाई के तहत उनका स्थानांतरण अन्यत्र कार्यालय में किया जाय ताकि सबुतों से छेड़छाड़ न हो और सरकारी पद का दुरुपयोग आरोपी द्वारा नहीं किया जा सके. आरटीआई कार्यकर्ता बबलू कालुंडिया ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सत्र न्यायालय सरायकेला में चल रहे मुकदमा का पर्दाफाश करते हुए घोषाल का स्थानांतरण किसी दूसरे जिले में तुरंत करने की मांग मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी- सह- सचिव, झारखंड से किया था. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-the-122nd-birth-anniversary-of-late-mukund-ram-tanti-was-observed/">आदित्यपुर

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बबलू कालुंडिया के आवेदन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने घोषाल का स्थानान्तरण करने की स्वीकृति दी है एवं उपायुक्त सरायकेला- खरसावां को आगामी चुनावों के मद्देनजर घोषाल का स्थानान्तरण करने सम्बन्धी आदेश दिया गया है. उपायुक्त सरायकेला खरसावां ने अपने पाले से गेंद सिविल सर्जन सरायकेला खरसावां को बढ़ा दिए हैं, देखना दिलचस्प होगा कि सिविल सर्जन के संरक्षण में पल- बढ़ रहे कुलदीप घोषाल का स्थानांतरण अपने ही कलम से सिविल सर्जन साहब करते हैं या चुनावी आचार संहिता का इंतजार करेंगे, ताकि चुनावी आचार संहिता लागू हो जाने पर आचार संहिता के नियमों का धौंस दिखाकर सिविल सर्जन साहब पूर्व की भांति कुलदीप घोषाल के स्थानांतरण पर पूर्ण विराम लगा कर और आरोपी को दूसरी पारी खेलने का मौका देते हैं. [wpse_comments_template]

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