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आदित्यपुर : श्रीनाथ विवि व सिटी रेसिडेंसी का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का उल्लंघन

Adityapur (Sanjeev Mehta)2001 के बाद जलस्रोतों मसलन तालाब आदि को भरकर यदि कंस्ट्रक्शन किया गया है तो उनपर गाज गिर सकती है. ऐसा ही दो मामला आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में प्रकाश में आया है. गम्हरिया सीओ मनोज कुमार ने श्रीनाथ कॉलेज प्रबंधन और सिटी रेसिडेंसी प्रबंधन को नोटिस भेजकर उनसे तालाब भरकर किये गए कंस्ट्रक्शन की रिपोर्ट मांगी है. सीओ ने बताया कि उन्होंने उच्च तकनीकी शिक्षा सचिव और राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के उपसचिव से आये पत्र के आलोक में दोनों प्रबंधन को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है. बता दें कि इस मामले को आदित्यपुर के एक वरिष्ठ प्रबुद्ध नागरिक प्रो. एसके महतो ने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखा था. उन्होंने पत्र में 2001 के एक सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट की चर्चा करते हुए कहा है कि आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट जो रिट पिटीशन नंबर 4787/2001 के ऊपर दिया गया था, का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है. इस जजमेंट का उल्लंघन कर यहां जलस्त्रोत (तालाब) को भरकर एक कॉलेज का निर्माण कर दिया गया है. वहीं एक बिल्डिंग कांट्रेक्टर ने तालाब को भरकर एक बड़ा रेसिडेंशियल कॉलोनी बसा दिया है. इसे भी पढ़ें : ममता">https://lagatar.in/mamta-banerjee-wrote-a-letter-to-the-modi-government-permission-to-cultivate-opium-in-west-bengal/">ममता

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एक वरिष्ठ नागरिक ने राष्ट्रपति को लिखा था पत्र

[caption id="attachment_575273" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/ADITYAPUR-CITY-RESIDENCY.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> सिटी रेसिडेंसी.[/caption] एक वरिष्ठ प्रबुद्ध नागरिक द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र के आलोक में राष्ट्रपति कार्यालय से झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया, फिर मुख्य सचिव के यहां से कॉलेज वाले मामले को लेकर उच्च तकनीकी शिक्षा सचिव को पत्र भेजकर इसकी जांच कर रिपोर्ट भेजने का आदेश गम्हरिया सीओ को भेजा गया है. रेसिडेंशियल कॉलोनी के बारे में राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने गम्हरिया सीओ को पत्र लिखकर तालाब में किये गए कंस्ट्रक्शन की जांच रिपोर्ट मांगी है. अब इस नोटिस के बाद आदित्यपुर के श्रीनाथ कॉलेज कैम्पस और सिटी रेसीडेंसी के प्रोपराइटर की नींद उड़ी हुई है. वहीं तालाब को भरकर रेसिडेंशियल कॉलोनी बनाने वाले दूसरे बिल्डरों के भी होश उड़ गए हैं. छह माह पूर्व गम्हरिया सीओ को मिले पत्र के बावजूद मामले को दबा कर रखने के विरुद्ध याचिकाकर्ता ने जब सीओ पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की मांग की तो सीओ को भी राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग का नोटिस मिल गया. अब मजबूरन सीओ गम्हरिया द्वारा श्रीनाथ कॉलेज प्रबंधन और सिटी रेसिडेंशियल प्रबंधन को नोटिस जारी करनी पड़ी है. इसे भी पढ़ें : पटना:">https://lagatar.in/patna-the-miscreants-shot-the-young-man-when-he-was-asked-to-back-the-car/">पटना:

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जलस्रोतों पर बनाए गए कंस्ट्रक्शन अवैध

[caption id="attachment_575274" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/ADITYAPUR-PROFESAR-SK-MAHATO.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> प्रो. एसके महतो.[/caption] इस संबंध में याचिकाकर्ता प्रो. एसके महतो ने बताया कि 2001 में रिट पिटीशन 4787/2001 की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट दिया था कि जलस्रोतों को नष्ट कर बनाये गए किसी भी तरह के कंस्ट्रक्शन अवैध हैं, जिसे डिमोल्यूस किया जाये. यह जजमेंट वर्ष 2001 से प्रभावी है और पूरे देश में लागू है. इसके बावजूद आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में तालाबों को भरकर एक जगह कॉलेज और दूसरी जगह पर आवासीय कॉलोनी बनवाया गया है जो वर्ष 2001 के सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का उल्लंघन है. वैसे अब ऊपर के आदेश पर गम्हरिया सीओ ने नोटिस जारी कर आदित्यपुर के बिल्डरों में हड़कंप मचा दिया है. इसे भी पढ़ें : ममता">https://lagatar.in/mamta-banerjee-wrote-a-letter-to-the-modi-government-permission-to-cultivate-opium-in-west-bengal/">ममता

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क्या कहते हैं याचिककर्ता

वरिष्ठ नागरिक प्रो. एसके महतो ने कहा है कि सिटी रेजीडेंसी के प्रोपराइटर सौरभ अग्रवाल द्वारा आदित्यपुर लोकनाथ कॉम्प्लेक्स से ठीक सटे पश्चिम में G+15 फ्लोर का एक मॉल का निर्माण पुराने तालाबों (100 वर्षों से अधिक) को भरकर बनाया जा रहा है. तत्कालीन अंचलाधिकारी गम्हरिया अमित कुमार ने एक पत्र के माध्यम से इन पुराने तालाब पर निर्माण को बहुत खतरनाक बताया था. वैसे भी माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष वर्ष 2001 में एक निर्णय (सिविल अपील 4787 ऑफ 2001, हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी) दिया था कि तालाब की भूमि पर किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता है. यह मामला उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित है. साथ ही मेसर्स संध्या शंभू एजुकेशनल ट्रस्ट के माध्यम से लगभग 7.5 एकड़ तालाब को भरकर वर्तमान में श्रीनाथ विश्वविद्यालय स्थापित कर लिया गया है. साथ ही इन तालाबों की भूमि सीएनटी 1908 की विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत भी आते हैं. [wpse_comments_template]

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