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आदित्यपुर : सरायकेला जिले में अवैध ओवरलोडिंग से सड़कों को हो रहा नुकसान

Adityapur (Sanjeev Mehta) : सरायकेला-खरसावां जिले में एक ओर अवैध गिट्टी, बालू, परिवहन एवं खनन पर जिला प्रशासन का रवैया काफी सख्त है. दूसरी ओर, जगह-जगह बैरिकेडिंग कर अवैध परिवहन पर शत-प्रतिशत अंकुश लगा रखा है, वहीं टाटा-कांड्रा, सरायकेला-कांड्रा सड़क पर कोयला, फ्लाई एश लदे ओवरलोड वाहनों को चलते हुए आसानी से देखा जा सकता है. ओवरलोड गाड़ियों के कारण सड़क पर कोयला और फ्लाई एश गिरने से सड़क पर चलने वाले वाहन और राहगीरों को काफी परेशानी होती है. ओवरलोड वाहनों के चलने से सड़कों को भी नुकसान हो रहा है. सड़कें जल्दी टूट जाती हैं. कांड्रा-टाटा मार्ग पर सड़क पर गिरे कोयला चुनते आसानी से लोगों को देखा जा सकता है. कई बार तो लोग कोयला चुनने के चक्कर में दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-preparations-for-bahuda-rath-yatra-complete-naga-monks-take-out-rath-yatra/">चांडिल

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कई कंपनियों की रेलवे साइडिंग है जिले में

औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण कई कंपनियों की रेलवे साइडिंग जिले में है, जहां प्रतिदिन परिवहन के लिए सैकड़ों हाइवा, ट्रकों का इस्तेमाल होता है. लगभग सभी हाइवा और ट्रक ओवरलोड रहते हैं. ओवरलोड परिवहन कार्य में लगे हाइवा मालिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चांडिल साइडिंग से कांड्रा क्षेत्र के स्थानीय कंपनियों के लिए प्रति टन 183 रुपए मिलता है. लगभग 25 लीटर डीजल की खपत होती है. दो टोल होने के कारण 520 रुपए टोल चार्ज लगता है. अगर इन सभी चीज को जोड़ा जाए तो परिवहन में लगे गाड़ी का भाड़ा से गाड़ी का ईएमआई, रोड टैक्स, रोड परमिट, डाईवर भाड़ा निकालना भी मुश्किल है. प्रतिमाह गाड़ी का स्टॉलमेंट, रोड टैक्स, रोड परमिट निकालने के लिए गाड़ी मालिक ओवरलोड गाड़ी चलाने के लिए मजबूर हैं. इसे भी पढ़ें : दैनिक">https://lagatar.in/in-the-seminar-of-dainik-shubham-sandesh-the-doctors-said-why-the-number-of-medical-colleges-in-jharkhand-is-less/">दैनिक

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कंपनी प्रबंधन पर हिटलरशाही का आरोप

वहीं गाड़ी मालिक ने बताया कि कंपनी प्रबंधन की हिटलरशाही के कारण हम लोग ओवरलोड गाड़ी चलाने के लिए मजबूर हैं. एक अन्य गाड़ी मालिक ने बताया कि सरकारी नियम के अनुसार ओवरलोड गाड़ी से परिवहन विभाग चालान काटता है, परंतु जहां माल पहुंचता है, जिसका चालान रहता है, उस कंपनी पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. जबकि नियम है परिवहन करने वाले एवं करवाने वाले दोनों के ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन इस जिला में ऐसा कोई कानून नहीं है. अगर ओवरलोड गाड़ी नहीं चलाएं तो वाहन मालिकों को भूखे मरने की नौबत आ जाएगी. गाड़ी मालिक ने सड़क पर चलने वाले ओवरलोड वाहनों का मुख्य कारण सही भाड़ा नहीं मिलना बताया और इसके लिए कंपनी प्रबंधक और ट्रांसपोर्टर को जिम्मेवार बताया. इसे भी पढ़ें : रिम्स">https://lagatar.in/explanation-sought-from-three-doctors-found-missing-from-duty-in-rims-will-have-to-answer-in-48-hours/">रिम्स

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प्रशासन कंपनी व ट्रांसपोर्टर पर करे कार्रवाई तो नहीं चलेगी ओवरलोड गाड़ी

अगर प्रशासन परिवहन विभाग कंपनी प्रबंधक और ट्रांसपोर्टर के ऊपर कार्रवाई करे तो सड़क पर ओवरलोड गाड़ी चलना बंद हो जाएगा, क्योंकि कंपनी प्रबंधक और ट्रांसपोर्टरों की सेटिंग परिवहन विभाग के आला अधिकारियों के साथ होती है. इस कारण उन लोगों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती है और छोटे वाहन मालिक उनका शिकार होते हैं. वही कंपनी प्रबंधक के प्रतिनिधि से कंपनी में हो रहे ओवरलोड के विषय में बात करने पर उन्होंने इसका ठीकरा ट्रांसपोर्टर के माथे फोड़ दिया. प्रबंधन के अनुसार कंपनी ट्रांसपोर्टिंग का टेंडर निकालती है जिस ट्रांसपोर्टर को टेंडर मिलता है उसी के द्वारा ओवरलोड किया जा रहा है. इससे कंपनी का किसी तरह का कोई लेना देना नहीं है. जिला परिवहन विभाग ओवरलोड गाड़ियों पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. इसे भी पढ़ें : मझगांव">https://lagatar.in/mazgaon-saddam-hussein-became-the-block-president-of-janata-dal-united/">मझगांव

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बड़े ट्रांसपोर्टर की परिवहन विभाग में सेटिंग

वहीं जानकार लोगों का कहना है कि चांडिल क्षेत्र के एक बड़े ट्रांसपोर्टर द्वारा ओवरलोड का सारा खेल खेला जा रहा है. बताया जाता है कि उनकी जिले के परिवहन विभाग में अच्छी खासी सेटिंग है. चांडिल रेलवे साइडिंग से चलने वाली ओवरलोड गाड़ियों का नंबर परिवहन विभाग के पास दिया जाता है. अगर परिवहन विभाग सड़क पर वाहनों की चेकिंग करती है तो नंबर देखकर उन वाहनों को रोका तक नहीं जाता है. ऐसे में जिला प्रशासन के इस दोहरे रवैया की सर्वत्र चर्चा हो रही है. [wpse_comments_template]

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