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आदित्यपुर : टाटा स्टील से मांगा जा रहा 10 वर्षों के सीएसआर एक्टिविटी का ब्योरा

  • बाह्य एनजीओ और स्वयं द्वारा निबंधित एनजीओ के माध्यम से कराए गए करोड़ों रुपए के खर्च की मुख्यमंत्री से की जांच की मांग
  • कंपनी पर वित्तीय वर्ष 2014-17 के बीच सीएसआर एक्टिविटी में किए गए खर्च में गड़बड़ी की आशंका
Adityapur (Sanjeev Mehta)आदित्यपुर के प्रबुद्ध नागरिक और आरटीआई कार्यकर्ता प्रो. एसके महतो ने अब टाटा स्टील लिमिटेड कंपनी से 10 वर्षों में सीएसआर एक्टिविटी पर बाह्य एनजीओ और स्वयं द्वारा निबंधित एनजीओ के माध्यम से कराए गए करोड़ों रुपए खर्च का ब्योरा मांगा है. प्रो. महतो ने कुछ आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए कहा है कि टाटा स्टील कंपनी के वित्तीय वर्ष 2014-17 के बीच सीएसआर एक्टिविटी में किए गए खर्च में गड़बड़ी की आशंका है. उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री सह अध्यक्ष राज्य कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी झारखंड के साथ मंत्री कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय, भारत सरकार और सचिव, कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय, भारत सरकार को इस संबंध में पत्र भेजा है. इसे भी पढ़ें : पंजाब">https://lagatar.in/punjab-dsp-shot-dead-in-jalandhar-body-recovered-from-roadside/">पंजाब

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पत्र में इन सारी बातों की जानकारी मांगी गई है. पत्र में उन्होंने कहा है कि टाटा स्टील लिमिटेड कंपनी की स्थापना 25 अगस्त 1907 को हुई है. केंद्र सरकार ने विचारोपरांत भारत में प्रथम बार कम्पनी एक्ट 2013 के सेक्शन 135 को 1.4.2014 को वैधानिक रूप स्वरूप देते हुए लागू किया है. यह एक्ट टाटा स्टील कम्पनी पर भी उसी वर्ष उसी तिथि से लागू है. लेकिन टाटा स्टील लिमिटेड कंपनी ने इस अधिनियम को कब से लागू किया और इसपर विगत 10 वर्षों में कंपनी ने कम्पनी एक्ट 2013 के सेक्शन 135 के शिड्यूल (vii) के प्रोविजन के अन्तर्गत कितने खर्च किस-किस एक्टिविटी पर किए हैं. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-crpf-provided-food-to-400-villagers-and-students-on-new-year/">किरीबुरु

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ऐसी संभावना है कि इसकी जानकारी और रख-रखाव का रिकॉर्ड सरकार के पास भी नहीं हो सकता है. अलबत्ता टाटा स्टील लिमिटेड ने पिछले 3 वित्तीय वर्षों (वर्ष 2014-2017) के अपने कुल लाभांश 5789.77 करोड़ रुपए का 2% राशि का सीएसआर मद में जो खर्च का ब्योरा दर्शाया है, वह 115.80 करोड़ रुपए है. इसपर टाटा स्टील लिमिटेड के प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन एवं चेयरमैन सीएसआर एंड सस्टेनेबिलिटी कमेटी इशरत हुसैन के 17 मई 2017 के हस्ताक्षर हैं. इसे भी पढ़ें : सीआरपीएफ">https://lagatar.in/adityapur-now-get-free-ration-by-getting-treatment-at-veda-health-care-center/">सीआरपीएफ

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लेकिन उसके बाद के अर्थात 6 वर्षों (वर्ष 2017- 2023 तक) का सीएसआर एक्टिविटी पर इस कम्पनी के अपने लाभांश पर 2% राशि खर्च का ब्योरा प्राप्त नहीं हो सका है. लेकिन विडंबना यह है कि इस कंपनी ने अपनी ही कम्पनी द्वारा अपनी ही कम्पनी के नाम पर एवं माध्यम से निबंधित एनजीओ जो शायद सोसाईटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 और इंडियन ट्रस्ट एक्ट 1882 के अन्तर्गत निबंधित दर्शाया गया है, के माध्यम से सीएसआर कार्य को करवाया है. पूरे लाभांश की 2% राशि 115.80 करोड़ रुपये से बहुत ज्यादा राशि 193.61 करोड़ खर्च दर्शाया गया है. जो सही प्रतीत नहीं होता है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-cell-management-is-giving-computer-training-to-the-youth/">किरीबुरु

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मालूम होता है कि इसने जानबूझकर खर्च के मद में ओवरड्राफ्ट दर्शाया है, ताकि अगर कंपनी द्वारा कोई अन्सपेन्ट अमाउंट बच जाता है और उसे दर्शाया जाता है तो उसे किसी शिड्यूल बैंक के अन्सपेन्ट कारपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी एकाउंट में जमा करना अनिवार्य हो जाता अथवा प्रधानमंत्री रिलीफ फंड क्लीन गंगा फंड में जमा करना अनिवार्य हो जाता. इस कम्पनी ने अपने स्वयं द्वारा अथवा एनजीओ के द्वारा समग्र रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, नई दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में हेल्थ केयर, सेफ ड्रिंकिंग वाटर, लबलीहुड इनवायरमेंट, इलेक्ट्रिसिटी, स्पोर्ट्स, रूरल एंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के ऊपर 193.61 करोड़ रुपए खर्च दर्शाया है, जो वर्ष 2014-17 में कुल आय से सीएसआर मद में प्राप्त 2% राशि 115.80 करोड़ रुपए से बहुत अधिक है और ऐसा कम्पनी के द्वारा जानबूझकर किया गया है, जबकि धरातल पर सीएसआर का कार्य झारखंड में कहीं दिख नहीं रहा है. इसे भी पढ़ें : ट्रक">https://lagatar.in/truck-and-bus-drivers-strike-across-the-country-for-the-second-day/">ट्रक

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अगर इस कंपनी ने कम्पनी के अंदर अथवा अपने कर्मियों के बीच सीएसआर एक्टिविटी पर कार्य दर्शाकर खर्च किया है तो वह सीएसआर के अन्तर्गत नहीं आता है, क्योंकि इन कार्यों एवम एक्टिविटी की मॉनिटरिंग किस एजेंसी ने की है ? कृपया उक्त एजेंसी का नाम पता भी कृपया सार्वजानिक किया जाये. प्रो. महतो ने सरकार से सादर अनुरोध किया है कि कृपया टाटा स्टील लिमिटेड कंपनी द्वारा विगत 10 वर्षों में सीएसआर एक्टिविटी पर बाह्य एनजीओ एवम स्वयं के द्वारा निबंधित एनजीओ के माध्यम से कराए गए करोड़ो रुपये व्यय का ब्योरा एवम कार्य यथाशीघ्र उपलब्ध कराने की कृपा करेगें. साथ ही वित्तीय वर्ष 2014- 17 के बीच सीएसआर एक्टिविटी पर प्राप्त 2% राशि 115.81 करोड़ रुपए के बदले 196.61 करोड़ रुपए व्यय दर्शाने की जांच कराने की कृपा की जाये. [wpse_comments_template]

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