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आदित्यपुर : आजादी के 75 साल बाद भी 10 फीसदी किसान ही आत्मनिर्भर - डॉ. अरविंद मिश्रा

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Adityapur (Sanjeev Mehta) : कृषि विज्ञान केंद्र सरायकेला-खरसावां की 11वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की सालाना बैठक सोमवार को केंद्र के सभागार में हुई. बैठक की मॉनिटरिंग ऑनलाइन वर्चुअल माध्यम से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा जे उरांव ने किया. 27 सदस्यीय कमेटी ने जहां 10वीं बैठक की समीक्षा और उसपर हुए कार्य की समीक्षा की वहीं अगले एक वर्ष 2022-23 के प्लान को स्वीकृति भी दिया, जिसे बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से भारतीय अनुसंधान परिषद दिल्ली को भेजा जाएगा. इसे भी पढ़े : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-srijan-ranjan-of-chinmaya-vidyalaya-became-kolhan-topper-in-jee-main-got-99-95-percentile/">जमशेदपुर

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बता दें कि इस वैज्ञानिक समिति में कृषि वैज्ञानिकों के अलावा क्षेत्र के होनहार किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल हुए जो अपनी सुझाव कमेटी को दिये. आज की बैठक की अध्यक्षता केंद्र के प्रभारी सह वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद मिश्रा ने की. बैठक में राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किसान व बुरुडीह पंचायत के पूर्व मुखिया सोखेन हेम्ब्रम और वर्तमान मुखिया अनिता टुडु ने अपनी सलाह कमेटी को दी. वहीं कमेटी के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र दारीसाई के डायरेक्टर डॉ. प्रदीप प्रसाद ने कई आधुनिक कृषि के आयामों पर चर्चा करते हुए अपने सुझाव दिए. वहीं जिला कृषि पदाधिकारी एवं आत्मा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. विजय कुजूर ने भी कई सुझाव एडवाइजरी कमेटी को दिये, जबकि जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दिलीप रजक ने एडवाइजरी कमेटी को और क्षेत्र के किसानों को पशुपालन से संबंधित आधुनिक शोध पर जानकारियां दी.

आजादी के 75वें वर्ष में भी 90 फीसदी किसान वर्षा पर निर्भर - डॉ. अरविंद

वैज्ञानिक सलाहकार समिति को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. अरविंद मिश्रा ने कहा कि हम आजादी के 75वें वर्ष को अमृत महोत्सव के रूप में मना रहे हैं लेकिन आज भी महज 10 फीसदी किसान हैं जिनके पास सिंचाई की अपनी व्यवस्था है, 90 फीसदी किसान आज भी मॉनसून पर निर्भर हैं. उन्होंने इस वर्ष औसतन 40 फीसदी कम वर्षा होने पर इस क्षेत्र के मुख्य फसल धान की रोपाई प्रभावित होने पर चिंता जताई. उन्होंने बताया कि जिले के राजनगर, खरसावां और सरायकेला प्रखंड में तो धान की सीधी बुआई किसान कर चुके हैं लेकिन कदवा विधि से बुआई करने वाले 90 फीसदी किसान अब तक धान की बुआई नहीं कर पाए हैं, उनके खेतों में बिचड़े तैयार पड़े हैं बारिश नहीं होने से वे रोपनी नहीं कर पाए हैं. [wpse_comments_template]

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