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एजेंसी को काम पूरा करने में लगेंगे एक वर्ष
एक्सटेंशन के संबंध में अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर प्रसाद ने बताया कि जलापूर्ति के साथ सीवरेज और गेल इंडिया को भी एक्सटेंशन दिया गया है. उन्होंने कहा कि जब तक एजेंसी को एनओसी नहीं दी जाएगी तब तक एजेंसी को एक्सटेंशन मिलता रहेगा और योजनाएं भी पूरी नहीं होंगी. वर्तमान में जो वर्क हुए हैं, उसके बाद एजेंसी को वर्क पूरा करने में तकरीबन एक वर्ष और लगेंगे. अगर आज एनओसी मिलती है तो अगले वर्ष जून में योजना पूरी हो जाएगी. उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में आधी जलापूर्ति योजना जिंदल के जिम्मे है, जिसे 15 जून को पूरी तरह से संचालित करने के लिए ट्रांसफर कर दिया जाएगा. इसे भी पढ़े : पीएम">https://lagatar.in/geo-tag-verification-of-2591-under-construction-houses-of-pm-awas-yojana-is-not-happening/">पीएमआवास योजना के 2591 निर्माणाधीन आवासों का नहीं हो रहा जियो टैग सत्यापन
अब तक की गई जलापूर्ति योजना की कार्य रिपोर्ट
- कुल 490 किलोमीटर पाइप लाइन बिछानी है, अब तक 380 किलोमीटर बिछी है. 60 किलोमीटर वन भूमि के एनओसी के वजह से पाइपलाइन बिछाने का कार्य अधूरा है.
- सीतारामपुर में 30 और सपड़ा में 60 मिलियन लीटर गैलन प्रतिदिन जलापूर्ति के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कुल 10 एकड़ वन भूमि पर होनी है, जिसका कार्य वन विभाग से एनओसी की वजह से लंबित है. हालांकि, विभाग को इसके एवज में 30 एकड़ की सरकारी जमीन हस्तांतरित की जा चुकी है.
- जलापूर्ति योजना के लिए 11 पानी टंकी का निर्माण होना है. इसमें दो का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है बाकी नौ पानी टंकी का कार्य 50 फीसदी पूरा हो चुका है.
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महज साढ़े आठ हजार घरों को ही मिल रहा पाइपलाइन जलापूर्ति का लाभ
विदित हो कि आदित्यपुर में 400 करोड़ रुपये की वृहद जलापूर्ति योजना तैयार हो रही है. इसी के तहत सीतारामपुर में 30 एमजीडी और दोमुहानी में 60 एमजीडी के नए फिल्टर प्लांट की स्थापना होनी है. दोनों फिल्टर प्लांट के बन जाने के बाद नगर निगम क्षेत्र के शत-प्रतिशत घरों में 24 घंटे वाली पाइपलाइन जलापूर्ति होने लगेगी. अभी महज साढ़े आठ हजार घरों को ही पाइपलाइन जलापूर्ति का लाभ मिल रहा है जबकि नगर निगम क्षेत्र में 60 हजार परिवार रहते हैं. पिछले 10 वर्षों में आदित्यपुर की आबादी भी दो गुनी बढ़ी है. इसमें केवल 200 से ज्यादा अपार्टमेंट बने हैं, जिसमें 20 हजार परिवार रहते हैं. इन परिवारों को बिल्डर द्वारा बोरिंग के माध्यम से भू-जल का लाभ देकर बसाया गया था, जिन्हें अब भू-जल स्तर गिरने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसे भी पढ़े : जानिये">https://lagatar.in/know-the-three-indian-cricketers-who-have-their-own-private-jets/">जानियेजिन तीन भारतीय क्रिकेटरों के पास हैं खुद के प्राइवेट जेट्स [wpse_comments_template]

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