Adityapur (Sanjeev Mehta) : अब तक हम महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर भारत के सपनों को पूरा नहीं कर पाएं हैं. उसे पूरा करने के लिए हमें निस्वार्थ भाव से काम करना होगा. उक्त बातें एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने कही. वे एनआइटी जमशेदपुर द्वारा उन्नत भारत अभियान के तहत एकेडमिक सोशल रिस्पोंशबिलिटी विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बोल रहे थे. इस दौरान राज्यपाल ने उद्यमियों से अपील किया की वे सभी झारखंड के नवनिर्माण में आगे आए.
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: प्रेमी ने दोस्तों संग मिल किया यौन शोषण, अब मैं आत्महत्या करने जा रही हूं [caption id="attachment_353136" align="aligncenter" width="575"]
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alt="" width="575" height="383" /> कार्यक्रम में मौजूद राज्यपाल रमेश बैस व अन्य[/caption] उद्योगपति अपनी जिम्मेदारी को समझें. उन्होंने कहा कि आज गांव उजड़ रहे हैं ओर शहर आबाद हो रहे हैं. गांव को उजाड़कर ही औद्योगिक कारखाने लग रहे हैं. उद्योग लगने के कारण कृषि योग्य भूमि समाप्त हो रही है. पर्यावरण को नुकसान हो रहा है. इसके बावजूद उद्यमी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन नहीं कर रहे हैं. इस बारे में हमें और उद्यमियों का सोचना होगा. जहां उद्योग धंधे बसे है वहां के आस-पास गांवों का तो कायाकल्प होना ही चाहिए. हमें निस्वार्थ भाव से काम करना होगा. जब तक गांव का विकास नहीं होगा तब तक देश का विकास संभव नहीं है.
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alt="" width="575" height="383" /> कार्यक्रम में मौजूद राज्यपाल रमेश बैस व अन्य[/caption] उद्योगपति अपनी जिम्मेदारी को समझें. उन्होंने कहा कि आज गांव उजड़ रहे हैं ओर शहर आबाद हो रहे हैं. गांव को उजाड़कर ही औद्योगिक कारखाने लग रहे हैं. उद्योग लगने के कारण कृषि योग्य भूमि समाप्त हो रही है. पर्यावरण को नुकसान हो रहा है. इसके बावजूद उद्यमी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन नहीं कर रहे हैं. इस बारे में हमें और उद्यमियों का सोचना होगा. जहां उद्योग धंधे बसे है वहां के आस-पास गांवों का तो कायाकल्प होना ही चाहिए. हमें निस्वार्थ भाव से काम करना होगा. जब तक गांव का विकास नहीं होगा तब तक देश का विकास संभव नहीं है.
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पृथ्वी का सबसे पहला टुकड़ा है झारखंड
राज्यपाल रमेश बैस ने एनआइटी में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड का इतिहास सदियों पुराना है. अगर पृथ्वी का सबसे पहले टुकड़े की बात करें तो वह झारखंड की धरती है. यह शास्त्रों व रिसर्च से बात सामने आई है. आजादी का पहला बिगुल भी झारखंड की धरती से फुंका गया था. झारखंड खनिज संपदाओं से भरा पड़ा है. ऐसे झारखंड पर हमें गर्व होना चाहिए. गर्व होना चाहिए की हम झारखंड के रहने वाले हैं. आपको-हमें और हम सबको मिलकर इस झारखंड को विकास की पटरी पर सबसे अंतिम पायदान से टाप राज्यों में सुमार करना है. यह सिर्फ सरकार के अकेले के बस की बात नहीं है. इसके लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा.

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