- पैसे के अभाव में टीएमएच ने कर दिया था इलाज से इंकार
Adityapur (Sanjeev Mehta) : अजीब विडंबना है कि राज्य के पुलिसकर्मियों को दुर्घटना के बाद इलाज के पैसे के लाले पड़ रहे हैं. बात 21 अगस्त 2024 को हुई दुर्घटना में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के एस्कॉर्ट में शामिल घायल पुलिसकर्मियों की हो रही है. इस दुर्घटना में घायल सरायकेला खरसावां के पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए पैसे के लाले पड़ रहे हैं. अपने साथी जवान के लिए जिले के पुलिसकर्मी चंदा कर इलाज करवा रहे हैं. पैसे के अभाव में टीएमएच अस्पताल प्रबंधन ने इलाज करने से मना कर दिया था. इसे भी पढ़ें : Kiriburu">https://lagatar.in/kiriburu-labor-leader-rama-handed-over-a-15-point-demand-letter-to-the-cgm-of-guava/">Kiriburu
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बता दें कि 21 अगस्त 2024 को आधी रात पूर्व मुख्यमंत्री को उनके आवास छोड़कर पुलिसकर्मी पुलिस लाइन दुगनी लौट रहे थे इसी दौरान मुख्य मार्ग पर मुडिया के पास एस्कॉर्ट गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त हो गई. दुर्घटना में एक पुलिसकर्मी चालक विनय कुमार सिंह की मौत हो गई थी जबकि तीन पुलिसकर्मियों को गहरी चोट लगी है. घायलों में सिलास विल्सन लकड़ा, दयाल महतो और हवलदार हरीश लागुरी शामिल हैं. इन घायल पुलिसकर्मियों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे खुद का इलाज कर सकें. ऐसे में जिले के पुलिसकर्मियों ने अपने साथी पुलिसकर्मियों के इलाज के लिए 500 से 1000 रुपये चंदा जमा करना शुरू कर दिया है.
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पुलिस सूत्रों की माने तो झारखंड के पुलिसकर्मियों को मेडिकल एलाउंस के नाम पर महज 1000 रुपये की राशि दी जाती है जो ऊंट के मुंह के जीरा है. झारखंड सरकार द्वारा एक पहल की गई थी कि सारे पुलिसकर्मियों का हेल्थ इंश्योरेंस कराया जाय लेकिन राशि की वजह से कोई भी इंश्योरेंस कंपनी बीमा करने को तैयार नहीं हुई, जिसकी वजह से यह प्रस्ताव फिलहाल टल गया है. कुछ पुलिसकर्मियों से बात की गई तो उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मेडिकल के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है. जबकि हमलोग जान जोखिम में डालकर 24 घंटे ड्यूटी में तैनात रहते हैं. अगर झारखंड सरकार तत्काल हमें एक हजार के बजाय 3000 प्रति माह मेडिकल एलाउंस दे तो हम खुद ही अपना हेल्थ इंश्योरेंस करवा लेंगे. यह सारी बातें हमारे मेंस यूनियन के द्वारा भी कई बार सरकार तक पहुंचाई जा चुकी है लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुआ है. लिहाजा आज पुलिसकर्मियों को अपना खुद का इलाज कराने को भी सोचना पड़ रहा है. [wpse_comments_template]
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