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आदित्यपुर : जियाडा ने फोरम इंडिया को दी गई 22 एकड़ जमीन का आवंटन किया रद्द

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Adityapur : वर्ष 2008 में फोरम इंडिया को तत्कालीन आयडा (वर्तमान में जियाडा) प्रबंधन  ने 16 मंजिला मल्टीप्लेक्स निर्माण के लिए औद्योगिक क्षेत्र के मुख्य मार्ग के किनारे 22 एकड़ जमीन आवंटित किया था. इसे जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन ने रद्द कर दिया है. इसका कारण है सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक भी सही समय पर फोरम इंडिया ने कार्य शुरू नहीं किया. क्षेत्रीय निदेशक ने बताया कि यह कार्रवाई नियमानुसार की गई है. उन्होंने बताया कि फोरम इंडिया का आवंटन 10 अन्य उद्योगों के कैंसलेशन के साथ ही लिया गया है. बता दें कि जमीन लेने के बाद से अब तक फोरम इंडिया ने चहारदीवारी निर्माण के सिवाय कोई कार्य नहीं किया है. जबकि 3 वर्ष (36 माह) में प्रोजेक्ट को पूरा करने का एग्रीमेंट हुआ था. इसे भी पढ़ें : तेजी">https://lagatar.in/the-stock-market-opened-with-a-boom-sensex-strengthened-by-315-points-buying-in-all-sectors/">तेजी

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इस बीच कभी नक्शा एप्रूवल नहीं होने, तो कभी पर्यावरणीय क्लियरेंस का बहाना बनाकर फोरम इंडिया एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन लेती रही. तत्कालीन एमडी डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने जब फोरम इंडिया के विरुद्ध एक्शन लिया तो वो हाईकोर्ट की शरण में चला गया. हाईकोर्ट में फोरम इंडिया केस हार गई तो फोरम इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली.

फोरम इंडिया को 25% लगाया जुर्माना

फोरम इंडिया को कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का 25 फीसदी जुर्माना लगाते हुए तीन साल में प्रोजेक्ट को पूरा करने का फैसला सुनाया था. इसके बावजूद फोरम इंडिया तीन साल में तीन ईंट तक नहीं जोड़ पाई और पर्यावरणीय क्लीयरेंस का बहाना करती रही. इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए जियाडा क्षेत्रीय निदेशक प्रेमरंजन ने अब आवंटन रद्द कर दिया है और आवंटित 22 एकड़ जमीन पर कोई अन्य प्रोजेक्ट स्थापित करने का प्लान तैयार कर रही है. वहीं आवंटन रद्द करने के जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक के फैसले के विरुद्ध फोरम इंडिया दोबारा हाईकोर्ट की शरण में गया है. इस पर जियाडा क्षेत्रीय निदेशक ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने नियम संगत फैसला लिया है और सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले के आलोक में निर्णय लिया है. अब माननीय हाईकोर्ट का जो फैसला होगा वो उन्हें मंजूर होगा. [wpse_comments_template]

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