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नई नीति उद्यमियों के लिए परेशानी का सबब - समीर
समीर सिंह ने कहा कि आज पेवर्स ब्लॉक, ह्यूम पाइप, कंक्रीट बाउंडरीवाल, ड्रेन कवर आदि बनाने वाले उद्योग बंदी के कगार पर हैं. सरकार और नगर निगम की लगभग योजनाएं इन्हीं उद्योगों के प्रोडक्शन पर निर्भर हैं जो आज प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा बालू और गिट्टी के अनुपलब्धता से रियल स्टेट, सरकार के पुल पुलियों, कंक्रीट सड़कें, केनाल निर्माण आदि के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं. सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए जो एप्प बनाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने और रजिस्ट्रेशन के तहत बालू उपलब्ध कराने की नीति बनाई है वो सारे उद्यमियों के बस की बात नहीं है. इसके तहत रांची जाकर रजिस्ट्रेशन कराना और फिर ऑनलाइन डिमांड करना उद्यमियों के लिए परेशानी का सबब है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-woman-dies-after-being-hit-by-a-train/">जमशेदपुर: ट्रेन की चपेट में आने से एक महिला की मौत
दो बालू घाटों की ही बंदोबस्ती सरकार ने की है - समीर
इसके अलावा पश्चिम बंगाल या ओडिसा से बालू मंगवाने पर उसका जो दर पड़ता है वो काफी महंगी होती है जिसके सहारे उद्योग चलाना नामुमकिन है. लघु उद्योग भारती के महामंत्री और कोषाध्यक्ष ने इस विकट समस्या से जूझ रहे लघु व मंझोले उद्योगों को बचाने के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री को त्राहिमाम पत्र भी भेजा है साथ ही एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में उनसे मिलकर उद्यमियों की समस्याओं से अवगत कराने का निर्णय भी लिया है. बता दें कि सरायकेला जिले में मात्र 2 बालू घाटों की बंदोबस्ती सरकार ने की है जबकि अन्य बालू घाटों से रात के अंधेरे में बालू माफिया बालू का खनन अवैध तरीके से कर मालामाल हो रहे हैं, वहीं इन पर आश्रित उद्योग धंधों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-haris-name-is-bigger-than-haris-sadhvi-priya/">आदित्यपुर: हरि से बड़ा है हरि का नाम – साध्वी प्रिया [wpse_comments_template]

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