alt="" width="600" height="400" /> इसे भी पढ़ें : राखी">https://lagatar.in/rakhi-sawants-mother-jaya-bheda-passed-away-was-hospitalized-for-several-days/">राखी
सावंत की मां जया भेदा का निधन, कई दिनों से अस्पताल में थीं भर्ती उन्होंने कुंभकार समिति के साथ मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए रणनीति भी बनाई है. बता दें कि इस मंदिर का इतिहास करीब 300 साल पुराना है. करीब 300 वर्षों से आस्था का केंद्र बने घोड़ा बाबा मंदिर का नेतृत्व गम्हरिया कुंभकार समिति के लोगों द्वारा किया जाता है. समिति के महासचिव बंकिम चौधरी और सदस्य ओम प्रकाश ने बताया कि समिति के नेतृत्व में करीब 300 वर्षों से यहां पूजा हो रही है. हर वर्ष यहां मकर संक्रांति के दूसरे दिन आखान जात्रा के दिन पूजा के लिए भीड़ जुटती है. मान्यता है कि 300 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में महामारी फैली थी. तब रात में लोगों को घोड़े की टाप सुनाई पड़ती थी, तभी से कुंभकार समिति का गठन कर ग्राम देवता के रूप में घोड़ा बाबा अर्थात् बड़ाम बाबा की पूजा अर्चना शुरू हुई, जो आज तक नियमित रूप से बरकरार है. कुंभकार समिति के अध्यक्ष मनोरंजन बैज, कार्यकारी अध्यक्ष हरिकृष्ण पॉल, अजय दास, भैरब प्रामाणिक, जीतेन दास, सीताराम बैज, आशीष दास आदि मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सक्रिय हैं. [wpse_comments_template]

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