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नए डीपीआर का कार्य पूर्ण नहीं होता है तब-तक बनी रहेगी समस्या
उन्होंने बताया कि पीएचईडी के पदाधिकारियों के द्वारा बताया गया है कि लगभग 15 सालों से जलापूर्ति एक ही समय में दी जा रही है. प्लांट की क्षमता 21 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) का है. जबकि पानी का डिमांड वर्तमान में कई गुना बढ़ गया है. चूंकि होल्डिंग धारकों की संख्या लगभग 45000 हो गया है. पानी का सप्लाई तब तक नहीं बढ़ाया जा सकता जबतक प्लांट में पानी का फिल्टरेशन करने का क्षमता ना बढ़ाया जाए. ऐसे में वर्तमान की 21 एमएलडी क्षमता नाकाफी है. नये प्रोजेक्ट में 90 एमएलडी हो जाने के बाद स्वतः 24 गुना 7 जलापूर्ति सभी घरों के लिए सुनिश्चित हो सकेगी. अभी जो पुरानी डब्ल्यूटीपी है वो 50 वर्ष पुराना है. प्लांट का डिजाइन 30 वर्षों के लिए होता है. जब तक नए डीपीआर के अनुसार कार्य पूर्ण नहीं होता है तब तक समस्या बनी रहेगी. विभाग के द्वारा लोगों को समपिट बनाने को कहा गया है ताकि पानी स्टोरेज कर रात में समपिट से पानी ऊपर के टंकी में भरे जाय और अधिक जलापूर्ति हो सके. इसे भी पढ़ें :चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-rail-wheel-in-khemashuli-on-the-fifth-day-and-highway-jam-on-the-sixth-day/">चाकुलिया: खेमाशुली में पांचवे दिन रेल चक्का और छठे दिन हाईवे जाम [wpse_comments_template]

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