Adityapur (Sanjeev Mehta) : बालू उठाव बंद होने से व्यवसायी और मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई
है. ट्रैक्टर, ट्रेलर वाहन चालकों ने सरकार की उदासीनता पर रोष जताया
है. बता दें कि झारखंड में बालू की समस्या लंबे समय से बनी हुई
है. राज्य में बालू की सुगमता पूर्वक उपलब्धता के मुद्दे पर मुख्यमंत्री, सत्ताधारी दल के नेता एवं अधिकारी उदासीन दिख रहे
हैं. जिससे बालू खनन व उठाव में लगे हजारों ट्रैक्टर व ट्रेलर वाहन मालिकों और भवन निर्माण क्षेत्र में लगे हजारों व्यवसायी एवं लाखों
दिहाड़ी मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी की संकट उत्पन्न हो गयी है .
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: बाबा मंदिर में लगी दुर्लभ बेलपत्र की प्रदर्शनी 2019 के बाद से बालू घाटों की नहीं हुई है बंदोबस्ती
बालू की कमी के कारण निर्माण कार्य बंद हैं जिससे विभिन्न निर्माण क्षेत्र से
जुड़े मजदूरों के समक्ष आजीविका का संकट उत्पन्न हो गयी
है. बता दें कि
एनजीटी के गाइडलाइन के तहत 10 जून से ही झारखंड में बालू के उत्खनन पर रोक लगा दी गई है जो 15 अक्टूबर तक लागू
रहेगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार झारखंड सरकार ने 2019 के बाद से बालू घाटों की बंदोबस्ती ही नहीं की
थी. जिसके कारण सभी बालू स्टॉकिस्ट के लाइसेंस जनवरी में ही
सीज कर दिए गए
हैं. दिहाृड़ी मजदूरों ने राज्य सरकार के प्रति जताई नाराजगी
झारखंड के
दिहाड़ी मजदूरों ने राज्य सरकार के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि पूरे झारखंड में बालू उठाव पर रोक लगाए जाने के कारण उन लोगों को मजदूरी नहीं मिल रही
है. ऐसे में रोजी-रोजगार नहीं मिलने के कारण झारखंड के लाखों
दिहाड़ी मजदूर भुखमरी के कगार आ गए
हैं. दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि वे 30-40 रुपये
भाड़ा खर्च कर शहरी क्षेत्रों में रोजी-रोजगार की तलाश में जाते हैं पर उन्हें बैरंग लौटना
पड़ता है. [wpse_comments_template]
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