Adityapur (Sanjeev Mehta) : चांडिल डैम के विस्थापित गोविंदपुर निवासी करीब 70 वर्षीय मनोहर महतो डैम के वजह से डूबे घर बार, खेत खलिहान के मुआवजे की अपनी मांग को लेकर बुधवार शाम से सुवर्णरेखा प्रशासक कार्यालय आदित्यपुर पर अनिश्चित कालीन आमरण अनशन पर बैठे
हैं. जिसका आज तीसरा दिन
है. आज तीसरे दिन मनोहर महतो को अपर निदेशक कार्यालय से भेजी गई चिट्ठी मिली है, जिसमें उन्हें बताया गया है कि आपकी मांगों के लिए जल संसाधन विभाग के सचिव को लिखित रूप से पत्र भेजकर अवगत कराया गया
है. जैसे ही वहां से कोई निर्देश मिलता है आपकी मांगों पर अपर निदेशक कार्यालय उचित कदम उठाएगी.
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आमरण अनशन पर बैठे मनोहर महतो ने कहा कि जब तक कोई ठोस निर्णय और उनके मांगों को पूरा करने की कार्रवाई नहीं होती है वो अपना अनशन जारी
रखेंगे. बता दें कि उनके समर्थन में बुधवार को दो दर्जन से ज्यादा विस्थापित भी आंशिक व पूर्ण विस्थापन की वजह से मुआवजे की मांग को लेकर
क्रमिक अनशन पर आए
थे. इन धरनार्थियों का नैतिक समर्थन करने आजसू नेता
खगेन महतो भी धरना स्थल पर आए
थे. विस्थापितों ने अपनी समस्याओं की जानकारी देते हुए कहा कि सभी विस्थापित डैम निर्माण की वजह से वर्षों से विस्थापन का दर्द सह रहे
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विभाग के अपर निदेशक से लेकर प्रशासन तक से गुहार लगाकर थक चुके हैं लेकिन उनकी समस्याओं पर विचार नहीं हुआ
है. जबकि अपर निदेशक कार्यालय के प्रधान लिपिक ने बताया कि विस्थापितों की मांगें जायज है, ये लोग 116 गांव के विस्थापितों को पूर्ण मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं जबकि विभाग अभी मात्र 43 गांव के ही विस्थापितों को मुआवजा देने का निर्णय लिया
है. जहां तक विस्थापित को नौकरी देने की बात है तो सरकार ने नीतिगत फैसला लेते हुए अब नौकरी देना बंद कर दिया है अब केवल उन्हें स्वरोजगार हेतु पैकेज ही दिए जा रहे
हैं. ऐसे में मनोहर महतो जिस भी मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं उस पर विचार स्थानीय स्तर पर सम्भव नहीं है, इसमें कोई भी निर्णय जल संसाधन सचिव स्तर पर ही संभव
है. [wpse_comments_template]
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