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आदित्यपुर : ईएसआईसी में बीमितों की संख्या हुई दोगुनी तो फंड घटकर हुआ आधे से भी कम

Adityapur (Sanjeev Mehta) : कोल्हान के एकमात्र कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा निगम के आदित्यपुर स्थित ईएसआईसी अस्पताल में बीमितों की संख्या दिन प्रति बढ़ती जा रही है. पिछले 5 वर्ष में बीमितों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो गई है. लेकिन केंद्र सरकार से मिलने वाला फंड घटता जा रहा है. 5 साल पूर्व इस अस्पताल में जब बीमितों की संख्या करीब 6 हजार थी, तब 12 करोड़ सालाना फंड मिलता था. वहीं, जब बीमितों की संख्या 12 हजार के करीब हो गई है तो फंड घटकर 5 करोड़ हो गया है. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-only-a-few-workers-will-get-benefit-from-the-current-notification-the-government-should-reconsider-shashank-ganguly/">आदित्यपुर

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बीमितों को खुले बाजार से खरीदना पड़ेगा दवा 

ईएसआईसी अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि अप्रैल से अगस्त तक 4.61 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि अभी नए फंड मिलने में 7 माह बाकी है, ऐसे में कैसे चलेगा काम. फंड की कमी की वजह से बीमितों को दवाइयों के लाले पड़ेंगे. उन्हें दवाई तो लिखी जाएगी लेकिन उन्हें यह दवा राजकीय औषधालय से लेने पड़ेंगे. अगर वहां भी दवा उपलब्ध नहीं हुआ तो बीमितों को खुले बाजार से दवा खरीदना पड़ेगा और उसके पैसे के लिए राजकीय औषधालय में रिकयुजिशन डालना पड़ेगा. साथ ही बीमितों को 3 से 6 महीने तक अपने पैसे वापस लेने के लिए इंतजार करना होगा. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-increase-in-salary-of-rkfl-employees-agreed-on-grade-revision-for-five-years/">आदित्यपुर

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राज्य प्रबंधन ने बीमितों को मिलने वाली सेकेंडरी स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी लगाई रोक

विदित हो कि ईएसआईसी में बीमित कर्मचारियों को अपने वेतन से हर महीने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अंशदान देने पड़ते हैं. लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के फंड में कटौती कहां तक जायज है. इतना ही नहीं ईएसआईसी राज्य प्रबंधन ने वर्ष 2020 से बीमितों को मिलने वाली सेकेंडरी स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी रोक लगा दी है. सेकेंडरी स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत ईएसआईसी से टाइअप शहर के विभिन्न अस्पतालों में बीमित खुद और अपने आश्रितों का इलाज करवाते थे. वर्तमान में मात्र सुपर हॉस्पिटेलिटी की ही सुविधा बाहर के अस्पतालों में दी जा रही है. इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन के अधीक्षक डॉ. मिंज से पूछे जाने पर वो कहते हैं कि फंड की कमी या वृद्धि में वे कुछ नहीं कर सकते हैं. उनके द्वारा हर वर्ष फंड के लिए लिखा जाता है लेकिन उनके फंड में कटौती हो रही है, इसमें वे कुछ नहीं कर सकते. इसे भी पढ़ें : नोवामुंडी">https://lagatar.in/noamundi-women-take-out-awareness-rally-regarding-ghar-ghar-tiranga-abhiyan/">नोवामुंडी

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