Adityapur (Sanjeev Mehta) : आर्का जैन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के उपरांत पत्रकारों द्वारा राज्यपाल रमेश बैस से निर्वाचन आयोग द्वारा सरकार के विरुद्ध भेजे गए लिफाफे को नहीं खोले जाने के मुद्दे पर सवाल पूछा गया. इस पर राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार से कोई तकरार नहीं है और वे एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं. ईसी का लिफाफा खोलना केवल मुझ पर ही निर्भर करता है. इससे पहले राज्यपाल रमेश बैस गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत मोहनपुर स्थित आर्का जैन विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को उपाधि समेत गोल्ड मेडल से सम्मानित किया. आर्का जैन विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत में शामिल होने पहुंचे राज्यपाल रमेश बैस को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया. इसके बाद पारंपरिक नृत्य संगीत से राज्यपाल का अभिनंदन करते हुए उन्हें मंच पर आसीन कराया गया.

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: टाटा स्टील फाउंडेशन ने तीन करोड़ के चिकित्सा उपकरण जिला प्रशासन को कराया उपलब्ध राज्यपाल ने 31 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान किया. चार पीएचडी स्कॉलर विद्यार्थियों को डॉक्टरेट की उपाधि दी. इसके अलावा कुल 1800 छात्र-छात्राओं के बीच डिग्री सर्टिफिकेट बांटे गए. दीक्षांत समारोह में सम्मानित अतिथियों में जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो, पश्चिम सिंहभूम सांसद गीता कोड़ा, आर्का जैन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएस रजी शामिल थे.
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: गुदड़ी बाजार में लगा कचरे का अंबार, कचरों के बीच दुकान लगाने को मजबूर हैं दुकानदार क्वालिटी एजुकेशन पर हो फोकस ताकि छात्रों को राज्य ना छोड़ना पड़े
दीक्षांत समारोह में शामिल होते हुए राज्यपाल रमेश बैस ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, राज्य में क्वांटिटी नहीं बल्कि क्वालिटी एजुकेशन स्थापित हो, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं. राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालय के शिक्षा प्रणाली के संबंध में कहा कि अक्सर सुनने को मिलता है कि निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई नहीं होती और छात्रों को सर्टिफिकेट बांट दिए जाते हैं. लेकिन ऐसा प्रयास होगा कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा राज्य में ही मिले ताकि राज्य के छात्रों को शिक्षा के लिए पलायन ना करना पड़े. राज्यपाल ने कहा कि जब तक ये झारखंड में रहेंगे तब तक राज्य के शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और बेहतर करने का काम करते रहेंगे. शिक्षकों की कमी की समस्या पर राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि, विगत 6 महीने के अंतराल में इन्होंने 400 से भी अधिक शिक्षकों की नियुक्तियां विश्वविद्यालय स्तर पर की है. उन्होंने कहा कि जब पदभार संभाला तब 42 विश्वविद्यालयों में प्रिंसिपल नहीं थे ,कई विश्वविद्यालयों में एग्जाम कंट्रोलर की कमी थी ,एक्टिंग कुलपति कार्यरत थे, इन सभी कमी को देखते हुए पदों पर पूर्णकालिक नियुक्तियां भी की गई है ,और आगे भी विश्वविद्यालय समेत महाविद्यालय की कमियों को दूर किया जाएगा. [wpse_comments_template]
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