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आदित्यपुर : आदिवासी समुदाय ने धूमधाम से मनाया ‘बाहा बोंगा’ पर्व, निकाली विशाल रैली

Adityapur (Sanjeev Mehta) : सरना महासभा आदित्यपुर के द्वारा रविवार की शाम बाहा बोंगा पर्व के मौके पर विशाल नृत्य रैली निकाली गई. जिसमें सैंकड़ों की संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष मांदर की थाप पर नृत्य करते दिखाई दिए. इस दौरान मुख्य मार्ग पर काफी देर के लिए आवागमन थम गया. सरना महासभा के नायके दीकू राम मांझी और मांझी बाबा कुंजू सोरेन ने बताया कि आदिवासी लोगों की जीवनयात्रा के साथ प्रकृति से गहरा रिश्ता है. वे प्रकृति के साथ हंसते, बोलते, रोते व गाते हैं. संतालों के लिए नदी-नाला, पहाड़-पर्वत एक पूरी जीवन शैली है. नए वर्ष का आगमन भी प्रकृति वंदना के साथ होता है. जब पेड़ों से पुराने पत्ते गिरकर उसमें नए पत्ते आते हैं. जब धरती पर हरियाली छाती है, तब नया साल मनाया जाता है. लताओं और पत्तियों के बीच रंगों और सुगंध से समृद्ध पुष्प का आवरण होता, मानव ह्रदय में नई आशा व ऊर्जा का सृजन करता है तब ही संताल परंपरा के अनुसार नए साल का शुभागमन होता है. इसे भी पढ़ें : डुमरिया">https://lagatar.in/dumariya-mla-sanjeev-sardar-spoke-to-the-trapped-laborers-in-tamil-nadu/">डुमरिया

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विभिन्न क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया जा रहा पर्व

सोहराय महापर्व के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पर्व बाहा बोंगा पर्व ही है. बाहा का शाब्दिक अर्थ पुष्प है. इस हिसाब से बाहा पोरोब या बोंगा पुष्प का उत्सव ही है. बारिश टुडू के अनुसार यह पर्व फाल्गुन महीने में जब चंद्रमा अपने चतुर्थांश में होता है तब मनाया जाता है. जब सखुआ पेड़ में फूल खिलने लगता है और महुआ का फूल भी सुगंध बिखेरता है तब बाहा बोंगा पर्व मनाया जाता है. सखुआ और महुआ के फूलों का बाहा बोंगा में विशेष पूजा सामग्री के रूप में उपयोग होता है. इन दिनों में आदित्यपुर क्षेत्र में बाहा बोंगा पर्व विभिन्न आदिवासी गांव में मनाया जा रहा है. वहीं कई जगहों पर मनाने की तैयारियां चल रही है. [wpse_comments_template]

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