Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

आदित्यपुर : बरगद वृक्ष के नीचे सुहागिन महिलाओं ने की विधि-विधान से वट सावित्री की पूजा

Advertisement
Advertisement
Adityapur :  ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या पर सोमवार को सुहागिनों ने वट सावित्री पूजन कर पति की लंबी उम्र का वरदान मांगा. आदित्यपुर के दिंदली शिव मंदिर और पान दुकान स्थित शिव मंदिर प्रांगण में सुबह से ही विशाल बरगद वृक्ष के नीचे सुहागिन महिलाओं ने पूजन सामग्री लेकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. इस दौरान पुजारी ने महिलाओं को सावित्री-सत्यवान का कथा सुनाया और व्रत का महत्व व पूजन विधि को बताया. पुजारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए वट वृक्ष और यमदेव की पूजा करती हैं. शाम के समय वट की पूजा करने पर ही व्रत को पूरा माना जाता है. इस दिन सावित्री व्रत और सत्यवान की कथा सुनने का विधान है. शास्त्रों के अनुसार इस कथा को सुनने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है. कथा के अनुसार सावित्री यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी. इस व्रत में कुछ महिलाएं फलाहार का सेवन करती हैं तो वहीं कुछ निर्जल उपवास भी रखती हैं. [caption id="attachment_320483" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/05/adityapur-1-1.jpg"

alt="" width="600" height="272" /> वृक्ष के चारों ओर धागा लपेटती महिलाएं.[/caption] इसे भी पढ़े : सरायकेला">https://lagatar.in/seraikela-suhagins-worship-vat-savitri-fast-for-husbands-long-life/">सरायकेला

 : सुहागिनों ने की वट सावित्री की पूजा, पति की लंबी आयु के लिये रखा व्रत

हिंदू धर्म में ‘वट’ और ‘सावित्री’ दोनों का है महत्व 

पुजारी ने कहा कि हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत में ‘वट’ और ‘सावित्री’ दोनों का बहुत ही महत्व माना जाता है. पीपल की तरह वट या बरगद के पेड़ के भी विशेष महत्व होते हैं. शास्त्रों के अनुसार वट में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास होता है. बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा सुनने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. वट वृक्ष अपनी लंबी आयु के लिए भी जाना जाता है, इसलिए यह वृक्ष अक्षयवट के नाम से भी मशहूर है. महिलाएं आज के दिन वट सावित्री पूजन के लिए सत्यवान-सावित्री की मूर्ति, बांस का बना हुआ एक पंखा, लाल धागा, धूप, मिट्टी का दीपक, घी, पांच तरह के फल-फूल, 1.25 मीटर कपड़ा, दो सिंदूर जल से भरा हुआ पात्र और रोली इकट्ठा कर पूजन करती हैं. इसे भी पढ़े : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-suhagins-wish-for-unbroken-good-luck-by-keeping-vat-savitri-fast/">चाईबासा

: सुहागिनों ने वट सावित्री व्रत रखकर की अखंड सौभाग्य की कामना

सुहागिनें वृक्ष के चारों ओर कच्चे मोली को बांध कर पति की लंबी उम्र की करती हैं कामना

विदित हो कि इस दिन सुहागिनें सुबह स्नान कर सोलह श्रृंगार करके बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करती हैं. पूजा की सभी सामग्री के साथ पेड़ की जड़ो में जल चढ़ाती हैं. इसके बाद दीपक जलाकर प्रसाद चढ़ाती हैं. साथ ही पंखे से बरगद के पेड़ को हवा करती हैं और सावित्री मां का आशिर्वाद लेती हैं. वट वृक्ष के चारों ओर कच्चे धागे या मोली को सात बार बांधते हुए पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य की कामना करने के उपरांत सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं. इसके पश्चात घर जाकर उसी पंखें से अपने पति को हवा कर आशिर्वाद लेती हैं. प्रसाद में चढ़े फल आदि ग्रहण करने के बाद शाम में मीठा भोजन कर व्रत को समाप्त करती हैं. इसे भी पढ़े : सुहागिनों">https://lagatar.in/suhagins-worship-vat-savitri-for-the-longevity-of-her-husband/">सुहागिनों

ने पति की दीर्घायु के लिए की वट सावित्री पूजा
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही