- आदित्यपुर के लोगों में अब योजना के प्रति उठने लगे शंका के भाव
- सपड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य नहीं हो पाया शुरू
- यहां 11 एकड़ वनभूमि पर बनना है प्लांट
- वन विभाग ने अब तक पेड़ों की नहीं की है कटाई
- 1700 पेड़ काटकर वन विभाग में करना है जमा
- इसके बीद मिलेगा तीसरे स्टेज का अनापत्ति प्रमाण पत्र
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alt="" width="600" height="400" /> यहीं से आदित्यपुर के 55 हजार घरों को 24 घंटे पाइप लाइन जलापूर्ति होना है. योजना को 11 एकड़ वनभूमि हस्तांतरित हो चुकी है लेकिन अब तक उस पर लगी करीब 1700 पेड़ काटा नहीं जा सका है जिसके वजह से भूमि पर चहारदीवारी का काम शुरू नहीं हो सका है. बता दें कि वन विभाग ने अभी दूसरे स्टेज का अनापत्ति प्रमाण पत्र नगर निगम को दिया है, जिसके तहत नगर निगम वहां चहारदीवारी देकर झाड़ी हटाकर कार्य शुरू कर सकता है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-caa-law-will-secure-the-future-of-oppressed-minorities-kali-sharma/">जमशेदपुर
: सीएए कानून उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के भविष्य को सुरक्षित करेगा : काली शर्मा तीसरे स्टेज का अनापत्ति प्रमाण पत्र नगर निगम को तब मिलेगा जब वो वन भूमि में खड़ी 1700 बड़े पेड़ को काटकर वन विभाग में जमा करेंगे. साथ ही छोटे पेड़ को स्थानांतरित करेगा. जिसकी तैयारी नगर निगम ने कर रखी है लेकिन वह विभाग इस जारी में उदासीन है लिहाजा योजना में देर हो रही है. जानकारी देते हुए जलापूर्ति योजना के नोडल ऑफिसर सिटी मैनेजर अजय कुमार न बताया कि 15 अगस्त 2023 के बाद से ही चहारदीवारी देने और पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित था जो किसी कारणवश शुरू नहीं हो सका है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-every-house-water-tap-scheme-became-a-victim-of-corruption-sushil-barla/">किरीबुरु
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