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महिला संगठनों को सशक्त बनाने के लिए अभियान चलाएगा आदिवासी जन परिषद महिला मोर्चा

Ranchi : अंतरराष्ट्रीय महिला">https://lagatar.in/palamu-police-caught-a-large-consignment-of-illegal-liquor-during-vehicle-checking-two-smugglers-arrested/35262/">महिला

दिवस के अवसर पर आदिवासी जन परिषद महिला मोर्चा ने कुसई बड़ा घाघरा में लेबर कार्ड वितरण और सम्मान समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता सेलिना लकड़ा ने की. इस समारोह">https://lagatar.in/deputy-commissioner-meeting-to-prepare-for-matriculation-and-inter-examination/35247/">समारोह

में मुख्य अतिथि के रूप में आदिवासी जन परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा और अतिथि के रूप में अनूप बढ़ाईक मौजूद रहे. कार्यक्रम में आदिवासी जन परिषद (महिला मोर्चा) की ओर से उभरते हुए महिला पत्रकार खुशी मुंडा को बिरसा मुंडा का प्रतिमा और गमछी से सम्मानित किया गया. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के विशेष रूप से चर्चा की गई और संघर्ष व संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया. समारोह में केक भी काटा गया. साथ ही गरीब महिलाओं को लेबर कार्ड उषा कक्षा, जूनी बिग्गा, मंजू कच्छाप,  प्रतिमा लकड़ा, सुधा मिंज नागी तिर्की, मनोज उरांव को कार्ड वितरण किया गया. इसे भी पढ़ें : रांचीः">https://lagatar.in/government-lifted-ban-on-evacuation-due-to-corona-infection/35230/">रांचीः

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महिला दिवस एक मजदूर आंदोलन की उपज

प्रेम शाही मुंडा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक मजदूर आंदोलन की उपज है, जिससे बाद में संयुक्त राष्ट्र संघ ने सालाना आयोजन की मान्यता दी, पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 1911 में ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, जर्मनी आदि देशों में मनाया गया. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को पहली बार तो 1996 में एक थीम के साथ मनाया गया था, उसमें संयुक्त राष्ट्र संघ उसकी थीम तय की गई थी. एक सशक्त विश्व की समानता पर आधारित दुनिया हो. इसके तहत लोगों से अपील की जा रही है दुनिया में सभी देशों, सभी नागरिक मिलकर ऐसी दुनिया बनाए,  जहां महिलाओं और पुरुषों को बराबरी का अधिकार मिले.  महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का विचार एक महिला कलरा जेट किन का था. साथ ही कहा कि यह दिवस पुरुष और महिला का समानता की है, फिर भी 21वीं शताब्दी में भी महिलाओं को समानता का अधिकार अभी तक नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है, ज्यादातर पढ़े-लिखे लोग ही महिलाओं के नीचा दिखाने का काम करते हैं,  अभी भी पूर्ण रूप से भारत देश में राजनीतिक अधिकार महिलाओं को नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण है.  इसलिए आदिवासियों का अधिकार के लिए आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने की जरूरत हैं.

संघर्ष कर अपने अधिकार प्राप्त करेंगे

बैठक को संबोधित करते हुए सेलिना लकड़ा ने कहा, हम महिला संघर्ष कर अपने अधिकार प्राप्त करेंगे. महिला दिवस के अवसर पर हमेशा संघर्ष करने की जरूरत है और महिलाओं को राजनीतिक जागरूकता करने की आवश्यकता है. आदिवासी जन परिषद महिला मोर्चा द्वारा प्रदेशों में महिला संगठन को सशक्त बनाया जाएगा और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. इस समारोह में सिन्नी होनाहागा, प्रिया एकता टोप्पो, सुप्रिया कश्यप, बानी टोपनो, आभा एक्का, संतु लकड़ा, विमला तिर्की समेत अन्य लोग शामिल हुए. इसे भी पढ़ें : फेसबुकिया">https://lagatar.in/facebookia-love-girl-reaches-dumka-from-ranchi-to-marry-lover-boy-turns-out-to-be-a-minor/35266/">फेसबुकिया

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