Lagatar Desk : मोरहाबादी मैदान में आज 30 अगस्त को प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान रैली को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गयी है..रैली के पोस्टरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और झामुमो अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीरें लगाए जाने के बाद इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या आदिवासी एकता के नाम पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम अब राजनीतिक रंग ले चुका है.
बताया जा रहा है कि रैली का आह्वान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बंधु तिर्की की ओर से किया गया है.ऐसे में कांग्रेस से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी की चर्चा है.रैली में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना भी जताई जा रही है.
पोस्टरों को लेकर उठे सवाल
रैली को लेकर जारी किए गए पोस्टरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और झामुमो अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीरें प्रमुखता से दिखाई दे रही हैं. इसके बाद विपक्षी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि रैली का स्वरूप सामाजिक और आदिवासी मुद्दों तक सीमित रहेगा या इसे राजनीतिक मंच के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा.
गठबंधन सरकार से जोड़कर देखा जा रहा आयोजन
रैली में सत्ता गठबंधन से जुड़े प्रमुख नेताओं की तस्वीरों और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की ओर से किए गए आह्वान को देखते हुए इसे गठबंधन की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है.हालांकि, रैली के आयोजकों की ओर से इसे आदिवासी एकता और समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित कार्यक्रम बताया जा रहा है.
आज मोरहाबादी मैदान में जुटेंगे लोग
मोरहाबादी मैदान में होने वाली इस रैली को लेकर तैयारियां पूरी हो गई है.अब नजर इस बात पर है कि 30 अगस्त को रैली का मंच किस रूप में सामने आता है और क्या इसमें आदिवासी मुद्दे प्रमुख रहेंगे या राजनीतिक संदेश ज्यादा प्रभावी रहेगा.
रैली से पहले पोस्टरों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या आदिवासी एकता महाजुटान अब सामाजिक मंच से आगे बढ़कर राजनीतिक मंच बन गया है?
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