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अधिवक्ता परिषद झारखंड हाइकोर्ट इकाई ने मनाया स्थापना दिवस, वक्‍ताओं ने रखे विचार

Ranchi : अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के 30वें स्थापना दिवस को अधिवक्ता परिषद झारखंड की विभिन्न इकाईयां ‘स्थापना-दिवस पखवारा’ के तौर पर मना रही है. इसके तहत झारखंड हाई कोर्ट इकाई द्वारा एक समारोह का आयोजन उच्च न्यायालय के मुख्य सभागार में किया गया. झारखण्ड हाई कोर्ट के वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार कश्यप ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए स्वागत भाषण में कहा कि अधिवक्ता परिषद अधिवक्ताओं का एक संगठित परिवार है, जो कि "संघे शक्ति कलियुगे" के सिद्धांत पर चलता है तथा यह राष्ट्रहित और न्याय मम् धर्म: के बोध वाक्य को प्रतिपादित व क्रियान्वित कर उसको समाज में अधिवक्ताओं के द्वारा वास्तविक रूप से चरितार्थ करवाता है, जोकि इस कलियुग के लिए बहुत बड़ा और नेक काम है. परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार मिश्र, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. [caption id="attachment_424140" align="alignnone" width="960"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-20-at-10.08.23-AM.jpeg"

alt="" width="960" height="1280" /> अधिवक्ता परिषद झारखंड[/caption] उन्होंने परिषद के स्थापना की पृष्ठभूमि का विस्तार से वर्णन करते हुए परिषद से जुड़े कई सदस्यों का स्मरण भी दिलाया. साथ ही विभिन्न आयामों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत चर्चा भी की. अधिविद्य परिषद, झारखंड के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण ने परिषद के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए समाज के अंतिम व्‍यक्ति तक सुलभ, नि:शुल्क व त्वरित न्याय दिलाने में परिषद के प्रयासों का वर्णन करते हुए विभिन्न कानूनों में होने वाले जरूरी बदलाव के ऊपर भी प्रकाश डाला. वहीं दूसरी ओर झारखंड हाई कोर्ट के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कुमार ने वैसे बहुत सारे कानूनों की चर्चा की, जिसके तहत महिलाओं एवं बच्चों को प्रताड़ित किया जाता था. उन्‍होंने बताया कि अखिल भारतीय स्तर पर अधिवक्ता परिषद के द्वारा इन कानूनों का विश्लेषण किया गया एवं वैसे सभी कानूनों को समाप्त करने का प्रस्ताव सरकार को दिया गया, जिसके परिणाम स्वरुप आज के दिन वे काले कानून समाप्त कर दिए गए. अधिवक्ताओँ को सप्ताह में कम से कम एक घंटा निकालकर इन विषयों पर परिषद में चर्चा करनी चाहिए. समारोह में अपने विचार व्‍यक्त करते हुए राष्ट्रीय परिषद्  सदस्य प्रशान्त विद्यार्थी ने न्याय प्रवाह की अधिक से अधिक सदस्यता ग्रहण करने का आह्वान किया तथा यह बतलाया कि अधिवक्ता परिषद् के संस्थापक दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का 1992 में पढ़ा गया पहला भाषण हर अधिवक्ता को जरूर पढ़ना चाहिए, जिसमें उन्होंने सामाजिक असमानता पर विशेष चर्चा की थी एवं अधिवक्ता परिषद के स्थापना के उद्देश्य को उल्लेखित किया था. समारोह को झारखंड उच्च न्यायालय के जाने माने अधिवक्ता मनोज टंडन ने भी संबोधित किया है. उन्‍होंने कहा कि जूनियर अधिवक्ता, सीनियर अधिवक्ताओँ से बहुत कुछ सीखते हैं तथा सीनियर अधिवक्ताओँ को भी चर्चा से पुनः अध्ययन हो जाता है, इसलिए स्टडी सर्किल हर महीने होना चाहिए. समारोह में विषय प्रवेश सुनील कुमार ने करवाया, वहीं अधिवक्ता परिषद झारखंड हाई कोर्ट ईकाई के सचिव प्रभात कुमार सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.  समारोह का संचालन झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता प्रवीण कुमार पाण्डेय के द्वारा किया गया. [caption id="attachment_424141" align="alignnone" width="1280"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/WhatsApp-Image-2022-09-20-at-10.08.23-AM-1.jpeg"

alt="" width="1280" height="960" /> अधिवक्ता परिषद झारखंड[/caption] इस अवसर पर मुख्य रूप से झारखंड उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता आरएन सहाय, वरीय अधिवक्ता राजीव शर्मा, पूर्व असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल राजीव सिन्हा, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव, हाई कोर्ट अधिवक्ता एसोसिएशन के महासचिव नवीन कुमार, धनंजय पाठक, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी रीतेश कुमार बॉबी, कृष्ण गोपाल निताई, प्रमोद कुमार गुप्ता, अखौरी अंजनी कुमार, भीम महतो, टैक्सेशन ईकाई के अध्यक्ष मनोज कुमार व महामंत्री सत्येन्द्र नाथ गोंझू, लीना मुख़र्जी, नीतू सिन्हा, जितेन्द्र त्रिपाठी, संजीव ठाकुर, शिव कुमार शर्मा, रवि प्रकाश के अलावा उच्च न्यायालय के कई गणमान्य आधिवक्ताओं सहित पुरुष एवं महिला अधिवक्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे. इसके पूर्व समारोह में आये सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ देकर, उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं के द्वारा किया गया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ किया गया.

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