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सावधानी बरतने की है आवश्यकता : वैज्ञानिक डॉ सुशील प्रसाद
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय स्थित वेटनरी कॉलेज के डीन वैज्ञानिक डॉ सुशील प्रसाद का कहना है कि हाल के दिनों में शूकरों की मौत के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं. ये अफ्रीकन स्वाइन फीवर के कारण हो रहा है. इस वक्त सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि अफ्रीकन स्वाइन फीवर की वैक्सीन नहीं बनी है. ऐसे में सावधानी ही बचाव है. जानवरों की खरीद- बिक्री नहीं करनी है. इसके साथ शूकर के मांस खाने से परहेज करना है. खासकर खुले में शूकर मांस की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए.शूकर प्रजनन प्रक्षेत्र में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक
झारखंड शूकर विकास पदाधिकारी डॉ.अजय कुमार यादव का कहना है कि काफी संख्या में शूकरों की मौत हो रही है. कांके शूकर प्रजनन प्रक्षेत्र में करीब 1450 शूकर हैं, जिसमें से लगभग 550 से अधिक शूकर की मौत हो चुकी है. पूरे प्रक्षेत्र में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. वहीं बीमारी अन्य जगह न फैले, इसकी व्यवस्था की जा रही है. सभी मृत शूकरों को प्रोटोकॉल के अनुसार पोस्टमॉर्टम के बाद मिट्टी में नामक डालकर गाड़ा जा रहा है. इसके साथ ही शूकर प्रक्षेत्र में सोडियम हाइपोक्लोराइट, फिनाइल और चूने का छिड़काव कराया जा रहा है, ताकि अन्य शूकरों को संक्रमण से बचाया जा सके. इसे भी पढ़ें - राष्ट्रीय">https://lagatar.in/national-human-rights-commission-team-did-surprise-inspection-of-hazaribagh-jail/">राष्ट्रीयमानवाधिकार आयोग की टीम ने हजारीबाग जेल का किया औचक निरीक्षण [wpse_comments_template]

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