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10 वर्ष बाद मोदी को NDA व इनके दिवंगत नेताओं की याद आयी : सुप्रियो

Ranchi : झामुमो ने देश के कार्यकारी और भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया. कहा कि 18 वीं लोकसभा गठन के पूर्व शुक्रवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक में मोदी जी को नेता चुना गया. आज मोदी जी ने अपना भाषण दिया. जो अपने आप में यह बताता है कि मोदी जी नैतिक तौर पर प्रधानमंत्री के दावेदार नहीं रहे. उन्हें जबरन तीसरी बार कुर्सी पर बैठाया जा रहा है. अमित शाह जी के शब्दों में 60 वर्षों के बाद कोई सरकार तीसरी बार आ रही है. ये तुलनात्मक अध्ययन करते हैं कि नेहरू जी के बाद मोदी जी आ रहे हैं. थोड़ा पीछे भी जाना चाहिए कि तीसरी बार जब सन 62 में जवाहर लाल नेहरू जी आ रहे थे, तो इस तरह का फैरक्चर मेंडेड नहीं था. देश को तत्कालीन प्रधानमंत्री पर विश्वास था. आज के लोग प्रधानमंत्री पर विश्वास नहीं कर रहे हैं. ये वास्तविक डाटा को भाजपा के लोगों ने छिपाने का काम किया. आज पहली बार 10 वर्षों के बाद मोदी जी मजबूर हुए एनडीए का नाम लेने के लिए. अपने पूरे भाषण में एक भी बार भाजपा का नाम नहीं लिया. जो दर्शाता है कि भाजपा के नेता के तौर पर उनकी हार, उनके लिए शर्म का विषय है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जो भी आदरणीय वाजपेया जी, बाला साहेब ठाकरे जी, प्रकाश बादल जी, जॉर्ज फर्नाडिंस जी, शरद यादव जी ने जो बीज लगाया था, आज यह उसका वृक्ष है. दस साल में पहली बार मजबूर हुए उन नेताओं को याद करने के लिए. एक बार ही नहीं कहा गया कि मोदी की गारंटी. उन्होंने पूरे चुनाव में जो न्यूनतम 45 मिनट और अधिकतम डेढ़ घंटे का भाषण होता था. उसमें कम से 50 बार से लेकर 125 बार तक अपने नाम का उल्लेख किया गया. मोदी ऐसा है, मोदी वैसा है, मोदी ऐसा करता है, आज कहां गया वह सूर. उक्त बातें झामुमो के महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कही. इसे भी पढ़ें - हजारीबाग:">https://lagatar.in/girl-empowerment-campaign-started-in-keredari/">हजारीबाग:

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सुदेश नहीं झारखंड का क्या किया गया अपमान

सुप्रियो ने कहा कि मोदी जी कह रहे हैं ,अब शासन सर्वमत से चलेगा. क्योंकि उन्होंने पता है कि यह जीत नैतिक जीत नहीं है. यह जनादेश उनके नेतृत्व को खारिज करता है. आज उन्हें एनडीए याद आया. चाहे वह जीतन राम मांझी हो या अनुप्रिया पटेल हों, उन्हें मंच पर बैठाया गया. लेकिन झारखंड के उनके एक पार्टनर सुदेश महतो को अपमानित करने का काम किया गया. मंच पर नहीं बुलाया गया. यह दर्शाता है कि झारखंड के प्रति उनके मन में क्या गुस्सा है. ये लोग मोदी की पहली कैबिनेट की बैठक और संसद में सरना धर्म कोड और ओबीसी का 27 प्रतिशत आरक्षण लाने का काम करें.

नीतीश, नायडू और सुदेश अहम सवालों से भाग नहीं सकते हैं

सुप्रियो ने कहा कि नीतीश जी को यह बताना होगा कि जातिगत जनगणना होगा या नहीं. उस जातिगत जनगणना के अलावे झारखंड से सर्वमत से पारित सरना धर्म कोड को पारित किया गया. नौ सांसद यहां से चुने गए, इसमें आजसू के भी हैं, उनको बताना पड़ेगा कि यह जातीय जनगणना का हिस्सा होगा या नहीं. उनके साथ खड़े नीतीश जी को यह बताना पड़ेगा कि झारखंड से पारित 27 प्रतिशत को ओबीसी आरक्षण वह मिलेगा या नहीं. वहां पर शामिल नायडू जी को बोलना पड़ेगा या सीएए और एनआरसी लागू होगा या नहीं. क्योंकि अपने घोषणा पत्र में उन्होंने इसे खारिज किया है. इन सवालों से आप भटक नहीं सकते हैं. अग्निवीर योजना को समाप्त करवाएं. 50 लाख रेलवे, बैंक और सरकारी दफ्तरों में रिक्तियां हैं, बिना देर किए, उसे भरने का काम शुरू कराएं. क्योंकि आपने कहा था कि रोड मैप तैयार है. महंगाई को कम कीजिए. जीएसटी का पैसा राज्यों को दीजिए. गैर भाजपा सरकार को समान स्तर मिलना चाहिए. उनकी भी बातें सुननी चाहिए. अधिकारों की रक्षा होना चाहिए. क्योंकि बहुत जल्द एनडीए का अतंर कलह सामने आएगा.

ईडी, आईटी और सीबीआई की गाड़ी अब कहां-कहां जाएगी यह बताना चाहिए

सुप्रियो ने कहा कि प्रधानमंत्री प्रतिस्पर्धी संघीय ढांचे की बात कर रहे हैं. तो इसमें यह तय होगा कि अब ईडी, आईटी, सीबीआई की गाड़ी यूपी, एमपी, ओडिशा जाएंगी क्या. क्या मोदी जी के नए संघीय ढांचे में सभी राज्यों को समान अधिकार मिलेगा. आज आगामी पांच साल का संकेत मिल गया. यह सरकार आपसी अंतरद्वंद में ज्यादा दिन नहीं चलेगी, इस सरकार का पतन बहुत जल्द होगा.

आज के मोदी जी के भाषण में हार और कमजोर होने का स्पष्ट संकते दे रहा था

मोदी जी इतना घबराए हुए थे कि यह उनको यहां तक कहना पड़ा कि हमारी पार्टी में ही कुछ फ्रॉड लोग हैं, जिन्हें बताना पड़ेगा कि कौन मंत्री होंगे और कौन सा विभाग होगा. यह बात उन्होंने अपने मुंह से कही. मोदी जी का भाषण आज अजीब रहा, कभी अपने पुराने तेवर में दिखें, फिर अचानक संभलते नजर आए कि अब मैं उस स्थिति में नहीं रहा. आज मोदी जी ने एक बड़ी अजीब बात कही. उन्होंने कहा कि मैंने किसी से पूछा कल तक किसकी सरकार थी, तो एनडीए की, कल किसकी सरकार बनेगी तो एनडीए की बनेगी. जबकि 4 जून तक हमलोग यही सुनते आए मोदी सरकार, मोदी सरकार. यह मोदी की सरकार है. यह मोदी की गारंटी है. कहां गया वह अहंकार. अब मोदी जी की सरकार नहीं रहेगी, मोदी आज बार-बार एनडीए की सरकार, एनडीए की सरकार कहते रहे. क्या यह मोदी की पराजय नहीं है. इसे भी पढ़ें -एनडीए">https://lagatar.in/narendra-modi-elected-leader-of-nda-parliamentary-party-met-the-president-received-invitation-to-form-government-oath-taking-ceremony-on-june-9/">एनडीए

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