ईडी ने जांच में पाया कि CTS इंडस्ट्रीज को साहिबगंज जिले के मंदरो प्रखंड के मौजा जोकुमारी और महादेवगंज में माइनिंग लीज मिला था. चमन तुलसियान इस कंपनी के निदेशक हैं. कंपनी का वैध लीज क्षेत्र प्लॉट नंबर 85, 86, 88 P, 70, 56 और 58 P तक सीमित था. लेकिन कंपनी ने इससे बाहर जाकर माइनिंग किया.
कंपनी द्वारा रेल से भेजे गये स्टोन चिप्स,बोल्ड से जुड़े दस्तावेज और कंपनी द्वारा JIMMS पोर्टल पर अपलोड किये ब्योरे के साथ मिलान करने पर यह पाया गया कि इस कंपनी ने 66.81 लाख क्यूबिक फुट पत्थर का अवैध खनन किया है.
वर्ष 2017-18 से 2024-25 तक की अवधि में अवैध खनन के सहारे इतनी बड़ी मात्रा में पत्थर निकाला गया. ईडी ने जिला खनन पदाधिकारियों व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लीज क्षेत्र का सर्वेक्षण किया.
सर्वेक्षण के दौरान इस कंपनी ने लीज क्षेत्र से बाहर 4.18 एकड़ में अवैध खनन की पुष्टि हुई. अवैध खनन का यह क्षेत्र कंपनी के वैध लीज क्षेत्र से सटा हुआ है. जांच के दौरान ईडी ने साहिबगंज के जिला खनन पदाधिकारी कृष्ण कुमार किस्कू से पूछताछ की. किस्कू ने पूछताछ के दौरान इस कंपनी द्वारा लीज क्षेत्र से बाहर जाकर अवैध खनन की बात स्वीकार की.
उन्होंने माइनिंग से संबंधित कानून से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए यह स्वीकार किया कि खनिजों की ढुलाई के लिए ऑनलाइन पोर्टल से ट्रांसपोर्ट चालान जेनरेट करना आवश्यक है. बिना ट्रांसपोर्ट चालान के खनिजों की ढुलाई नहीं की जा सकती है.
ईडी ने जिला खनन पदाधिकारी से उनकी ड्यूटी और कर्तव्यों से जुड़े सवाल भी पूछे. इस दौरान जिला खनन पदाधिकारी ने यह स्वीकार किया कि माइंनिंग की गतिविधियों पर नजर रखना और जांच करने उनकी कानूनी जिम्मेवारी है. ईडी ने जिला खनन पदाधिकारी से यह जानना चाहा कि इतने लंबे समय से कंपनी द्वारा अवैध खनन किया जा रहा था, तो जिला खनन कार्यालय द्वारा की गयी जांच में पकड़ा क्यों नहीं गया. जवाब में जिला खनन पदाधिकारी ने नियमित जांच करने की बात कही. लेकिन अवैध खनन पर लंबे समय तक पर्दा पड़े रहने के कारणों पर चुप्पी साध ली.
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