Search

होलिका दहन के बाद भारत में चंद्रग्रहण का साया, जानें कब जलेगा अग्जा...

Uploaded Image

पंडित मणिभूषण पाठक

 

Ranchi :   फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर हर साल होलिका दहन मनाया जाता है. वाराणसी पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5 बजकर 56 मिनट से प्रारंभ होगी और 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी.

 


हालांकि इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा. भद्रा दो मार्च की शाम 5:18 बजे से लगेगा, जो 2/3 मार्च की रात्रि 4:56 बजे तक रहेगा. ऐसे में होलिका दहन तीन मार्च अहले सुबह 4.57 बजे से सूर्योदय से पहले तक किया जाएगा.

 


तीन मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण

फाल्गुन पूर्णिमा के दिन यानी 3 मार्च को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में चंद्रग्रहण लगेगा. इस ग्रहण का नाम 'ग्रस्तोदित चंद्र गहण' है. यह नाम इसलिए पड़ा, क्योंकि चंद्रमा उदय से पहले से ही ग्रहण की स्थिति में होगा.

 


भारतीय समय के अनुसार, चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. लेकिन भारत में यह तब दिखाई देगा, जब यह मोक्ष काल यानी समाप्ति की ओर होगा. इसलिए भारत में चंद्र ग्रहण 6 बजे से 6.50 मिनट तक तक मान्य होगा. ग्रहण की कुल अवधि डेढ़ घंटे की होगी.

 


भारत में सूतक काल मान्य, चार को होगी होली 

भारत में चंद्र ग्रहण दिखने के कारण यहां सूतक भी मान्य होगा. सूतक काल 9 घंटा पहले लग जाएगा, जिसके कारण सुबह 9 बजे के बाद सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे और शाम 6:50 बजे के बाद पुनः खोले जाएंगे.

 


चंद्र ग्रहण लगने के कारण सूतक नौ घंटा पहले लग जाएगा. ऐसे में इस दिन पूजा-पाठ और रंग खेलना वर्जित रहेगा, इसलिए होली तीन मार्च की जगह चार मार्च को मनाया जाएगा.

 


 वर्ष 2026-27 में तीन ग्रहण

आगामी वर्ष 2026-27 में दो सूर्यग्रहण और एक चंद्रग्रहण लगेंगे, हालांकि ये भारत में दृश्य नहीं होंगे. इससे पहले 17 फरवरी को साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगा था. हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं दिया था.

 


 ग्रहण में ये काम करना वर्जित

हिंदू मान्यता के अनुसार, ग्रहण की अवधि में पूजा, भोजन, खाने-पीने, धार्नीय उपकरण (जैसे चाकू, कैंची), मूर्तियों का स्पर्श आदि वर्जित होते हैं. ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने और धारदार औजारों का प्रयोग करने से बचना चाहिए.

 


 गर्भवती महिलाओं को रखना चाहिए खास ख्याल

हिंदू मान्यता के अनुसार, ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिये. उन्हें नुकीले उपकरण, खाना पकाने जैसे कार्य करने से बचना चाहिए. साथ ही ग्रहण के दौरान भूलकर भी तुलसी का स्पर्श ना करें.

 


 ग्रहण के दौरान मंत्र जाप का विशेष महत्व

इस दौरान ध्यान, मंत्र और जाप का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस समय किए गए जप-तप का फल कई गुना अधिक मिलता है. ग्रहण के बाद स्नान कर घर की सफाई करनी चाहिए, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है. ग्रहण के बाद दान का भी विशेष महत्व है.

 

 

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp