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बिहार में शराबबंदी के बाद धनबाद से वाहनों और ट्रेनों से हो रही करोड़ों की शराब तस्करी

  • 5 अप्रैल 2016 को हुई थी शराबबंदी, आठ साल में ट्रेनों से तस्करी करते पकड़ाये सैकड़ों तस्कर
  • धनबाद स्टेशन पर 126 मामले, जीटी रोड पर भी वाहनों से तस्करी करते पकड़े गए दर्जनों तस्कर
  • दूसरे जिलों के स्टेशनों व शहरों से भी बिहार ले जाते पकड़े जा चुके हैं सैकड़ों मामले
Raja Gupta Dhanbad : बिहार में शराबबंदी के बाद भले ही वहां की दुकानों, बार व क्लबों में सरकार के निर्देश पर शराब की बिक्री व पीने-पिलाने का सिलसिला रूक गया है, लेकिन धनबाद से सड़क मार्ग से निजी व किराये के वाहनों और ट्रेनों से करोड़ों की शराब की तस्करी हो रही है. आठ वर्ष के दौरान जीटी रोड पर तोपचांची-मैथन के बीच सैकड़ों गाड़ियां पकड़ी गई है, जिससे शराब की तस्करी की जा रही थी. इन गाड़ियों में बस, कार, स्कॉर्पियो, मालवाहक के साथ-साथ एंबुलेंस भी शामिल है. सूत्रों के अनुसार 5 अप्रैल 2016 को बिहार में शराबबंदी हुई थी. आठ साल में ट्रेनों से तस्करी करते धनबाद स्टेशन पर आरपीएफ-जीआरपी के हाथों 126 मामले पकड़े जा चुके हैं. ऐसा नहीं है कि ट्रेनों से तस्करी बंद हो गई है. धनबाद- गोमो होकर दर्जनों ट्रेनों चलती है, जो बिहार के कई स्टेशनों से गुजरती है. पूर्व में गोमो, कोडरमा, गया, रफीगंज, डेहरी ऑन सोन, सासाराम, बरकाकाना, डालटनगंज, रांची, बोकारो स्टील सिटी, जहानाबाद, पटना, झाझा. दरभंगा, जयनगर, किउल, जसीडीह, मधुपुर, आसनसोल समेत कई स्टेशनों पर ट्रेन से शराब की तस्करी का भंडाफोड़ हो चुका है. आरपीएफ के अनुसार स्टेशनों व ट्रेनों से पकड़े गए शराब की खेप को बिहार भेजा जा रहा था. सैकड़ों-हजारों मामले झारखंड-बिहार-बंगाल में पकड़े जाने के बावजूद शराब की तस्करी हो रही है. धंधेबाज सड़क मार्ग और ट्रेनों से भारी मात्रा में शराब की खेप बिहार भेज रहे हैं.

धनबाद के साथ-साथ पड़ोसी जिलों व राज्यों से भी बिहार भेजी जा रही शराब

सूत्रों के अनुसार धनबाद के अलावा पड़ोसी जिलों जैसे गिरिडीह, बोकारो, जसीडीह, दुमका, गोड्डा, हजारीबाग, कोडरमा आदि कई जिलों से सड़क व रेल मार्ग से शराब की खेप बिहार भेजी जा रही है. झारखंड के पड़ोसी राज्यों पश्चिम बंगाल व यूपी आदि से भी शराब की खेप विभिन्न गाड़ियों व ट्रेनों से दिन-रात भेजी जा रही है. झारखंड के अलावा बिहार, बंगाल व यूपी में जिला व रेल पुलिस के साथ-साथ आरपीएफ भी तस्करी करते हजारों मामले पकड़ चुकी है. फिर भी धंधेबाज शराब की तस्करी से बाज नहीं आ रहे हैं.

तस्करी जारी, मगर नहीं पकड़े जा रहे तस्कर

आचार संहिता लागू होने के बाद तस्करी पर सख्ती के साथ रोक लगाने के निर्देश के बावजूद तस्करी जारी है, मगर तस्कर पकड़े नहीं जा रहे हैं. धंधेबाजों ने तस्करी कराने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों को भी लगा दिया है. जिला पुलिस, उत्पाद विभाग के अधिकारी, रेल पुलिस, आरपीएफ के पदाधिकारी व जवान तस्करी पर रोक लगाने में रोजाना कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. वाहनों व ट्रेनों की बारीकी से चेकिंग नहीं होने के कारण तस्कर आराम से शराब की खेप लेकर निकल जा रहे हैं. कभी कभार छापेमारी कर जिला पुलिस व उत्पाद विभाग के पदाधिकारी खानापूर्ति कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें : सरहुल">https://lagatar.in/anger-against-centres-policies-shown-in-sarhul-procession-bjp-should-respond-supriyo/">सरहुल

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