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उड़ता पंजाब के बाद उड़ता पलामू, नशे में डूबा युवा वर्ग

 
Palamau : नशे को लेकर बॉलीबुड में एक फिल्म बनी थी उड़ता पंजाब. इस फिल्म में दिखाया गया था कि युवा वर्ग किस तरह नशे की गिरफ्त में चले जा रहे हैं. ठीक उसी फिल्म की तरह आज पलामू की तस्वीर भी देखने को मिल रही है. पलामू में शराब, ड्रग्स, गांजा, चरस, अफीम और कोरेक्स सिरप के बाद सोल्यूशन के नशे में युवा वर्ग डूबे हैं . पलामू में आजकल नशा फैशन बनता जा रहा है. समाज का एक बड़ा तबका नशे का आदी हो रहा है. युवाओं के साथ-साथ अब बच्चे भी नशीले पदार्थों के सेवन का शिकार हो रहे हैं. दरअसल मेदनीनगर रेलवे स्टेशन और कचहरी के समीप कुछ ऐसे बच्चों का गैंग देखा जा रहा, जो घर-परिवार और शिक्षा से दूर होकर नशीले पदार्थों का सेवन धड़ल्ले से कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें–राज्य">https://lagatar.in/target-to-make-five-lakh-new-green-ration-cards-in-the-state/">राज्य

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नशे की गिरफ्त में गरीब परिवार के बच्चे

शराब के बढ़ते दामों के कारण नशा करने वाले युवा और बच्चे कफ़ सिरप, पैन किलर,  इंजेक्शन, स्मैक , चरस,  गांजा और जैसे अन्य कई विकल्पों को अपना रहे है. इसके अलावा सबसे ज्यादा सुलेशन, व्हाइटनर, फेवीबौंड का इस्तेमाल नशे के रूप में कर रहे है. कचहरी एवं रेलवे स्टेशन के आसपास में कचरा बीनने वाले एक बच्चे ने बताया कि वह दिनभर में कचरा चूनकर 80 से 100 रुपए कमा लेता है. इस पैसे से वह शराब या अन्य नशा नहीं कर पाता है. इस कारण वह बाजार से साइकिल और गाड़ी पंक्चर बनाने की ट्यूब के सोल्यूशन या थिनर लेकर नशा करते हैं. इसे खरीदने पर कोई टोकता भी नहीं हैं. वे इस थिनर या सोल्यूशन को कपड़े या प्लास्टिक पर लगाकर नाक से सूंघते हैं. इसके बाद उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता. उसका कहना था अब वह नशे का आदी हो गया है. उसके साथ कई बच्चे भी यह नशा करते हैं. नशे की गिरफ्त में गरीब परिवार के बच्चे अधिक आ रहे हैं. इन बच्चों को पंक्चर बनाने का सोल्यूशन, थिनर, वाइटनर, डीजल व पट्रोल आसानी से मिल जाते हैं, जिसका वे नशे के रूप में उपयोग करते हैं. इसे भी पढ़ें–नेशनल">https://lagatar.in/national-peoples-party-reconstituted-jharkhand-pradesh-committee/">नेशनल

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डॉक्टरों ने क्या कहा ?

मेदेनीनगर पीएमसीएच मेडिकल कॉलेज के सुपरहिट डीके सिंह और प्रोफेसर डॉक्टर आरके रंजन ने कहा सोल्यूशन, व्हाइटनर, फेवीबौंड जैसे नशीले पदार्थों का लगातार सेवन करने से किडनी, लीवर और कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है. उन्होंने कहा की इसे लगातार प्रयोग करने से शरीर के हिस्से भी काम करना बंद कर देता है. उन्होंने यह भी कहा कि अब बच्चे धीरे-धीरे नशे के आगोश में समाते जा रहे हैं. युवा और बच्चों को जागरूक करने के साथ-साथ इस पर रोक लगाने की जरूरत है. इसे भी पढ़ें–रांची">https://lagatar.in/section-144-will-be-imposed-in-these-areas-of-ranchi-tomorrow-the-district-administration-has-issued-an-order/">रांची

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