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एजी की रिपोर्ट : एमपी में पशुपालन की तरह बड़ा घोटाला, बाइक से ढोया करोड़ों का पोषण आहार

Bhopal : बिहार के पशुपालन घोटाले की तरह मध्य प्रदेश में भी बड़ा घोटाला सामने आया है. एकाउंटेंट जनरल की 36 पन्नों की एक गोपनीय रिपोर्ट ने महिला बाल विकास विभाग में बड़ा घोटाला उजागर किया है. इस रिपोर्ट में सामने आया है कि करोड़ों का कई किलो वजनी पोषण आहार कागजों में ट्रक पर आया, लेकिन जांच में वो मोटरसाइकिल, ऑटो पर दिखाया गया है. बड़ी बात ये है कि इस विभाग के मंत्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं. 2020 में उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी नेता इमरती देवी ने महिला बाल विकास मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से ये विभाग मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास है, उनके दफ्तर से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

ट्रकों के जो नंबर दिये गये हैं, वे मोटरसाइकिल के निकले

रिपोर्ट के मुताबिक लाखों ऐसे बच्चे जो स्कूल नहीं जाते, उनके नाम पर भी करोड़ों का राशन बांट दिया गया है. साथ ही इस विभाग में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, लाभार्थियों की पहचान में अनियमितता, स्कूली बच्चों के लिए महत्वाकांक्षी मुफ्त भोजन योजना के वितरण और गुणवत्ता नियंत्रण में गड़बड़ी पायी गयी है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छह कारखानों से 6.94 करोड़ रुपयों की लागत के 1,125.64 मीट्रिक टन राशन का परिवहन किया गया था, लेकिन परिवहन विभाग से सत्यापन करने पर पता लगा कि ट्रकों के जो नंबर दिये गये हैं उन पर मोटरसाइकिल, कार, ऑटो और टैंकर पंजीकृत हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 2021 के लिए टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के लगभग 24 प्रतिशत लाभार्थियों की जांच पर आधारित थे. इस योजना के तहत 49.58 लाख पंजीकृत बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार दिया जाना था. इनमें 6 महीने से 3 साल की उम्र के 34.69 लाख बच्चे, 14.25 लाख गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली मां और 11-14 साल की लगभग 64 हजार बच्चियां शामिल थीं जिन्होंने किसी कारणवश स्कूल छोड़ दिया है.

110.83 करोड़ के राशन का फर्जीवाड़ा आया सामने

रिपोर्ट की जांच के दौरान, यह पाया गया कि आठ जिलों के 49 आंगनबाडी केन्द्रों में केवल तीन स्कूल न जाने वाली लड़कियों का पंजीकरण किया गया था. हालांकि, उन्हीं 49 आंगनवाड़ी केंद्रों के तहत, डब्ल्यूसीडी विभाग ने 63,748 लड़कियों को सूचीबद्ध किया और 2018-21 के दौरान उनमें से 29,104 की मदद करने का दावा भी किया था. साफ तौर पर यहां आकड़ों में हेर फेर करके 110.83 करोड़ रुपये के मूल्य के राशन का फर्जीवाड़ा हुआ.

58 करोड़ रुपये की हेराफेरी उजागर

इसके अलावा, राशन निर्माण संयंत्रों ने भी उनकी निर्धारित और अनुमानित क्षमता से अधिक उत्पादन की जानकारी दी, जब कच्चे माल और बिजली की खपत की तुलना वास्तविक राशन उत्पादन से की गई, तो यह पाया गया कि इसमें से 58 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई थी.
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