Ranchi : हजारीबाग- बरही सड़क (एनएच 33) के चौड़ीकरण के दौरान पेड़ कटाई से संबंधित कोर्ट के स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में एनएचएआई की ओर से कोर्ट को मौखिक बताया गया कि मॉनिटरिंग एजेंसी की बहाली कर ली गई है, जो वहां लगाए गए पेड़ों के संदर्भ में स्थल निरीक्षण कर जांच करेगी.
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मॉनिटरिंग एजेंसी वहां लगे पेड़ों के संरक्षण और देखभाल का भी निरीक्षण करेगी. कोर्ट ने एनएचएआई को शपथ पत्र के माध्यम से इस संदर्भ जवाब दायर करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ में मामले की सुनवाई हुई. अब अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी. एनएचएआई ने हजारीबाग एनएच के किनारे 20 हजार पौधे लगाए जाने का दावा किया था.
यहां बता दें कि पूर्व की सुनवाई में एनएचएआई ने कोर्ट को बताया था कि हजारीबाग- बरही सड़क के किनारे 20 हजार पौधे लगाए गए हैं जिन पर करीब 8 करोड रुपए खर्च आया है. मामले में एमिकस क्यूरी की ओर से बताया गया था कि एनएचएआई वैसे पौधों को भी जोड़ रहा है जो जंगली पौधे हैं जो खुद ही से उग जाते हैं. हकीकत में इतने पौधे नहीं लगाए गए हैं.
एनएचएआई द्वारा पौधे तो लगा दिए जाते हैं लेकिन उसका रखरखाव नहीं किया जाता है जिससे पौधे सूख जाते हैं. एनएचएआई की पॉलिसी के तहत इसके रखरखाव में एनजीओ एवं स्थानीय लोगों को भी शामिल करना है लेकिन इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है. पीपल, महुआ जैसे पौधों को लगाने से स्थानीय निवासी भी इस पेड़ की रक्षा करेंगे और काटेंगे नहीं. पेड़ -पौधों को बचाने की जिम्मेवारी स्थानीय लोगों को दी जा सकती है.
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