- कुड़मी समाज को एसटी का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन तेज हुआ
- रेलवे ट्रैक जाम रहने से कई ट्रेनें रद्द सड़क मार्ग भी जाम
लोगों की सहूलियत के लिए बदला रूट
alt="" width="1280" height="690" />बस स्टैंड में बस का परिचालन करने वाले सोनू दुबे ने बताया कि जमशेदपुर से कोलकाता के लिए एक बस चलती है. बस रात 9.30 बजे खुलती है. खेमाशुली में आंदोलन की वजह से बस के रूट को डायवर्ट कर दिया गया है. बस बहरागोड़ा, बारीपादा होते हुए कोलकाता जा रही है. हालांकि इससे यात्रियों को थोड़ी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है.उन्होंने बताया कि जमशेदपुर से आसनसोल के लिए भी दोपहर 12 बजे एक बस जाती है. इस बस के भी रूट में परिवर्तन किया गया है. बिहार जाने वाली बसों में भी भीड़ बढ़ी है. दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन का टाटानगर स्टेशन महत्वपूर्ण स्टेशन है. टाटानगर स्टेशन से कई महत्वपूर्ण ट्रेनें खुलती हैं तो कई यहां से होकर गुजरती है. लेकिन कुड़मी समाज के आंदोलन के कारण तीन दिनों से अधिकांश महत्वपूर्ण ट्रेने नहीं आ रही हैं. इसके कारण टाटानगर स्टेशन पर सन्नाटा पसरा हुआ है. स्टेशन प्रबंधक रघुवंश कुमार ने बताया कि मुख्यालय की ओर से 6 अप्रैल को 88, सात अप्रैल को 59, आठ अप्रैल को चार ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं. उन्होंने कहा कि आंदोलन के कारण यात्रियों को हो रही परेशानियों के लिए हेल्प डेस्क बनाया गया है.
धनबाद में कुर्मी आंदोलन से रेल सेवा बाधित, चल रहीं यात्री बसें
आदिवासी का दर्जा देने की मांग को लेकर आद्रा और खड़गपुर रेल मंडल में कुर्मी आंदोलन का असर धनबाद जिले में भी पड़ रहा है. हालांकि यहां सिर्फ रेल सेवा बाधित हो रही है. टाटा के लिए बसों का परिचालन नियमित रूप से हो रहा है. स्वर्णरेखा एक्सप्रेस, झारग्राम पैसेंजर, गोमो चक्रधरपुर पैसेंजर, गोमो खड़कपुर पैसेंजर सहित इस रूट से गुजरने वाली करीब आधा दर्जन ट्रेनें पिछले चार दिनों से बंद हैं. हर दिन धनबाद, गोमो से हजारों यात्री इस रूट पर सफर करते हैं. उनके कामकाज प्रभावित हो रहे हैं. कई यात्री हर दिन स्टेशन जाकर लौट रहे हैं. धनबाद से टाटा जाने वाली बसों पर आंदोलन का असर नहीं है. पहले भी 10 से 12 बसें रोज खुलती थी, अभी भी जा रही है. लेकिन बस मालिकों ने किराये में बढ़ोतरी कर दी है. परेशान रेल यात्री राज्य सरकार पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. लोगों का मानना है कि सरकार को इस मुद्दे पर आंदोलनकारियों से बात कर जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए.alt="" width="150" height="150" />
बहन का इलाज चल रहा है, चार दिन से स्टेशन आकर लौट रहा हूं : कृष्णा
टाटा में मेरी बहन का इलाज चल रहा है. मुझे उसे देखने जाना था लेकिन पिछले 4 दिनों से रोज स्टेशन पर आता हूं और घर लौट जाता हूं. राज्य की निकम्मी सरकार अभी तक चुप्पी साधे हुए है. जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान होना चाहिए.alt="" width="150" height="150" />
दिल्ली से आई गोमो, अब यहां ट्रेन ही नहीं चल रही,परेशान हूं : शांति देवी
मैं पश्चिम बंगाल के विष्णुपुर की रहने वाली हूं. दिल्ली से गोमो तक का टिकट था. यहां से गोमो-चक्रधरपुर ट्रेन से जाना था. लेकिन यहां आने पर पता चला, ट्रेन नहीं चल रही है. अब बस से जाने के लिए यहां बैठी हूं. काफी परेशान हूं.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/SUNIL-KUMAR_836-150x150.jpg"
alt="" width="150" height="150" />खड़गपुर में काम करता हूं, अब लौटना मुश्किल : सुनील कुमार
मैं खड़गपुर में प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं. कुछ काम से घर आया था. लेकिन अब लौट नहीं पा रहा हूं. सरकार को जल्द से जल्द आंदोलन खत्म कराने की पहल करने की जरूरत है. इस आंदोलन से काफी लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं. alt="" width="150" height="150" />
परेशानी के लिए केंद्र और राज्य सरकार जिम्मेवार: गणपत महतो
कुड़मी समाज के नेता सह झारखंड मुक्ति मोर्चा उलगुलान पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष गणपत महतो कहते हैं कि हमें अपना हक मिलना ही चाहिए. आंदोलन से लोग परेशान हैं.इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकार जिम्मेवार है.alt="" width="1024" height="683" />
सीकेपी स्टेशन पर पसरा सन्नाटा कई ट्रेनें रद्द, यात्री हो रहे परेशान
alt="" width="2560" height="1444" /> कुड़मी समाज को एसटी का दर्जा देने की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन का सीधा असर आम जन जीवन पर प्रत्यक्ष हो रहा है. चक्रधरपुर रेल मंडल के चक्रधरपुर समेत विभिन्न स्टेशनों से होकर गुजरने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है. वहीं कई ट्रेनों को शार्टटर्मिनेट के साथ-साथ ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किए गए हैं. इससे यात्रियों को परेशानी हो रही है. सबसे ज्यादा परेशानी रोज कमाने खाने वालों को हुई है. बहुत से लोग बेरोजगार हो गए हैं. इन क्षेत्रों में सामान की कीमतें भी बढ़ गई हैं.
सन्नाटा, होटल संचालकों को हो रहा है नुकसान
चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसरा हुआ है. ट्रेनों के नहीं चलने के कारण चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन के बाहर भोजनालय, होटल संचालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसी तरह तीनों में वेंडर का काम करने वाले, ट्रेनों के जरिए सब्जियां या अन्य सामान लाकर बेचने वाले लोगों की भी परेशानी बढ़ गई है. वहीं जानकारी के अभाव में दूरदराज गांव से ट्रेन पकड़ने के लिए आने वाले लोग भी वापस अपने गांव जाने को मजबूर हो रहे हैं.स्टाफ पेमेंट करना हुआ मुश्किल : राजेंद्र सोनकर
चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन के बाहर भोजनालय चलाने वाले राजेंद्र सोनकर ने कहा कि ट्रेनों के नहीं चलने के कारण रोजाना तीन से चार हजार रुपए नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि हालत ऐसी हो गई है कि स्टाफ पेमेंट करना भी मुश्किल हो रहा है. उन्होंने कहा कि यही हाल रहा तो स्टाफ को छुट्टी देना पड़ सकता है. कुड़मी विकास युवा मोर्चा के केंद्रीय महासचिव बसंत महतो ने कहा कि हमारी मांग को कोई नई नहीं है. 70 साल से कुड़मी समाज आंदोलनरत है. हमारा उद्देश्य केंद्र की रीढ़ को तोड़ना है.पिछले आंदोलन के दौरान मिला था आश्वासन, पर मांगें पूरी नहीं हुई
नेताओं का कहना है कि रेलवे केंद्र की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. जब तक अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा, तब तक केंद्र में बैठी सरकार इस ओर ध्यान नहीं देगी. आंदोलन में कुछ लोगों को जरुर नुकसान हो रहा है, लेकिन मांगे पूरी होने पर बड़ी संख्या में लोगों को इसका लाभ भी मिलेगा. पिछली बार आंदोलन के दौरान हमें आश्वासन मिला था कि मांगों पर निर्णय लिया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.जिसके कारण हमें फिर से आंदोलन करना पड़ रहा है.alt="" width="150" height="150" />
सोयी सरकार को जगाने के लिए आंदोलन ही रास्ता : शैलेंद्र महतो
कुड़मी सेना के अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने कुड़मी समाज के रेल रोको आंदोलन का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि 72 वर्षों से समाज मांग कर रहा है, लेकिन उनकी मांगों को तवज्जो नहीं दी जा रही है. किसी भी राज्य की सोयी हुई सरकार को जगाने के लिए आंदोलन ही एकमात्र रास्ता है. केंद्र एवं राज्य सरकार को इसके लिए कई बार कहा गया है.alt="" width="150" height="150" />
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा : हरमोहन महतो
आदिवासी कुड़मी समाज के केंद्रीय प्रवक्ता सह कुड़मी नेता हरमोहन महतो ने कहा कि कुड़मी समाज की मांगें जायज हैं. आदिवासी एवं कुड़मी समाज के रीति-रिवाज, हासा-भाषा, पर्व त्योहार मिलते-जुलते हैं. दोनों समाज के लोग प्रकृति पूजक हैं. ऐसे में कुड़मी को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं देना घोर अन्याय है.alt="" width="150" height="150" />
आंदोलन से हमारा होटल कारोबार ठप हो गया है : दीपक सिंह
टाटानगर स्टेशन के बाहर स्थित मोहित हिंदू होटल के संचालक दीपक सिंह ने बताया कि कुड़मी समाज के रेल रोको आंदोलन के कारण टाटानगर स्टेशन पर यात्रियों का आवागमन बंद हो गया है. इसके कारण खाने-पीने से जुड़े होटल का कारोबार ठप हो गया है. उन्होंने कहा कि चार दिनों से खाने-पीने की चीजें पर्याप्त बन रही हैं.alt="" width="150" height="150" />
काम से कोलकाता जाना है, ट्रेन बंद होने से परेशानी : मनोज कुमार
मानगो निवासी मनोज कुमार ने कहा कि उन्हें ऑफिस के काम से कोलकाता जाना है. स्टेशन गया तो वहां पता चला कि कोलकाता की सभी ट्रेनें बंद हैं. पांच अप्रैल को ही कोलकाता के लिए रवाना होना था. सोचा था कि दो दिन में आंदोलन खत्म हो जाएगा, पर ऐसा नहीं हुआ.alt="" width="150" height="150" />
हमें छपरा जाना है, लेकिन ट्रेन ही बंद है: सतीश कुमार
छपरा निवासी सतीश कुमार कहते हैं कि राउरकेला में मजदूरी करते हैं. अब वापस छपरा जाना है. ज्यादा रुपये नहीं थे इसलिए ट्रेन से सफर कर जमशेदपुर पहुंचे थे. अब यहां ट्रेन का परिचालन नहीं हो रहा है, जिससे काफी परेशानी हो रही है. किसी तरह घर पहुंचना है.alt="" width="150" height="150" />
इलाज के लिए नहीं जा पाएंगे वेल्लोर : सतीश कुमार
जमशेदपुर निवासी संतोष कुमार ठाकुर को 10 अप्रैल को खड़गपुर से ट्रेन पकड़कर दोस्त को इलाज के लिए वेल्लोर ले जाना है. अब आनिश्चितकालिन आंदोलन से समस्या काफी बढ़ गई है. समय पर इलाज जरुरी है. 10 अप्रैल तक यही हाल रहा तो खड़गपुर से ट्रेन पकड़ना मुश्किल हो जाएगा.आंदोलन दूसरों के अधिकारों का हनन : मिहिर
जुगसलाई निवासी सह कुड़मी समाज के प्रबुद्ध नेता मिहिर महतो ने कहा कि कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग बेतुकी है. बचपन से हमारी परवरिश हिंदू संस्कारों के तहत हुई है. प्रकृति प्रेम के साथ-साथ पूजा-पाठ का संस्कार रहा है. कुड़मी समाज के लोग सक्षम वर्ग में आते हैं. ऐसे में अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग दूसरे के अधिकारों का हनन है. उन्होंने कहा कि हिंसक आंदोलन किसी समस्या का समाधान नहीं है.ओडिशा रूट में दिक्कत नहीं है : प्रभात दुबे
भुवनेशवर-पुरी रूट पर बसों का परिचालन करने वाले बाबा शंकर एजेंसी के प्रभात दुबे ने बताया कि ओडिशा के रूट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि खड़गपुर की ओर यात्रा करने वाले लोग अब ओडिशा के रूट से होकर यात्रा कर रहे हैं. ओडिशा जाकर वहां से ट्रेन या फिर बस के माध्यम से खड़गपुर, कोलकाता की ओर जा रहे हैं. जो यात्री ज्यादा परेशान हैं उनको गंतव्य तक पहुंचने में भी सहायता की जा रही है. उन्होंने बताया कि 10 बसें ओडिशा के लिए चलतीं हैं.धनबाद होकर जाएंगे बिहार
बिहार शरीफ निवासी संजय यादव ने कहा कि उन्हें बिहार शरीफ जाना है. ट्रेन बंद होने के कारण राउरकेला से ट्रेन से जमशेदपुर आए हैं. यहां पहुंचने पर जानकारी हुई कि ट्रेनें बंद हैं. अब किसी तरह बस से आसनसोल या धनबाद जाएंगे. वहां से किसी तरह पटना की ट्रेन मिल जाए तो उससे घर चले जाएंगे.रेलवे और हाईवे जाम, आंदोलनकारी डटे,नाच-गाकर बिता रहे हैं समय
alt="" width="1280" height="576" /> पश्चिम बंगाल के खेमाशुली में कुड़मी जनजाति को एसटी में शामिल करने और कुड़मी भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने की मांग को लेकर शुक्रवार को तीसरे दिन रेल चक्का और चौथे दिन नेशनल हाईवे (एनएच) 49 जाम है. रेलवे ट्रैक और एनएच पर हजारों हजारों पुरुष और महिला आंदोलनकारी डटे हुए हैं और नाच-गाना कर रहे हैं. जाम की स्थिति और भयावह होती जा रही है. रेलवे ने तो इस मार्ग पर रेल परिचालन बंद कर दिया है. रेल परिचालन बंद होने से हजारों गरीब तबके के लोगों की रोजी-रोटी पर आफत आ गई है. वहीं हाईवे पर खेमाशुली से झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला स्थित बंगाल सीमा से सटे बहरागोड़ा प्रखंड के बरसोल थाना तक वाहनों की लंबी लाइन लग गई है. इससे चालक और खलासी परेशान हैं. हाईवे पर यात्री वाहनों का परिचालन नहीं हो रहा है. इससे यात्री भी हलकान हैं. जाम स्थल पर कुड़मी समाज के बड़े नेता आकर जनसभा को संबोधित कर आंदोलनकारियों के हौसले बढ़ा रहे हैं. आंदोलनकारी जिस तैयारी के साथ आए हैं, इससे संभावना है कि यह आंदोलन अभी लंबा चलेगा. स्टेशन पर भारी संख्या में स्थानीय पुलिस बल और रेल पुलिस बल की तैनाती की गई है. इस आंदोलन के मसले पर अभी तक पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कोई पहल नहीं की गई है.
जाम का नेतृत्व राजेश और अजीत कर रहे हैं
जानकारी हो कि पश्चिम बंगाल कुड़मी समाज द्वारा विगत चार अप्रैल से हाईवे को जाम रखा गया है. हाईवे जाम आंदोलन का नेतृत्व पश्चिम बंगाल कुड़मी समाज के अध्यक्ष राजेश महतो कर रहे हैं. वहीं आदिवासी कुड़मी समाज द्वारा पांच अप्रैल से रेलवे ट्रैक को जाम रखा गया है. रेलवे चक्का जाम आंदोलन की बागडोर आदिवासी कुड़मी समाज के प्रमुख अजीत प्रसाद महतो कर रहे हैं. खेमाशुली में इस आंदोलन का नेतृत्व कमलेश महतो कर रहे हैं.जाम में फंसे चालकों का हाल हुआ बेहाल
alt="" width="1160" height="868" /> एनएच 49 जाम के कारण फंसे हजारों वाहनों के चालकों की स्थिति बेहाल है. जाम की स्थिति यह है कि बहरागोड़ा प्रखंड के बड़शोल थाना तक एनएच 49 पर वाहनों की लाइन पहुंच गई है. यानी की लगभग 45 किलोमीटर तक लंबी वाहनों की लाइन लगी है. जाम में फंसे वाहन चालकों और खलासियों को अब भोजन के भी लाले पड़ने लगे हैं.
राशन-पानी लेकर डटे हैं आंदोलनकारी
जानकारी के मुताबिक आंदोलनकारी आंदोलन स्थल पर राशन पानी लेकर डटे हुए हैं. पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे झारखंड और ओडिशा के विभिन्न गांवों से भी कुड़मी समाज के अनेक लोग खेमाशुली पहुंचे हैं और लोगों का जाना जारी है. आंदोलनकारियों के लिए भारी मात्रा में राशन-पानी पहुंचाया जा रहा है. ओडिशा और झारखंड के गांवों से आंदोलन स्थल पर चावल, चूड़ा, मूढ़ी, गुड़ समेत अन्य खाद्य सामग्रियां पहुंचाई जा रही हैं. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह आंदोलन लंबा चलेगा.कई माह से चल रही थी आंदोलन की तैयारी
भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक आंदोलन की तैयारी विगत कई माह पूर्व से की जा रही थी. इस आंदोलन के लिए व्यापक रणनीति बनाई गई थी. उसी रणनीति के तहत पूरी तैयारियों के साथ हजारों लोग जुटे हैं. कुड़मी समाज के हजारों पुरुष और महिलाएं आंदोलन स्थल पर डेरा डाले हुए हैं और नाच गान कर रहे हैं.alt="" width="150" height="150" />
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन : अजीत प्रसाद महतो
आदिवासी कुड़मी समाज के प्रमुख अजीत प्रसाद महतो ने कल शाम खेमाशुली में कहा कि हमारा यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक हमारी मांगें मान ली नहीं जाएंगी. उन्होंने कहा कि हमारा मकसद सरकार और आम जनता को परेशान करना नहीं है. विगत 2022 के सितंबर माह में जब यहां पर 5 दिनों तक रेल चक्का और हाईवे जाम किया गया था तब राज्य सरकार से वार्ता हुई थी. वार्ता के बाद जाम हटा लिया गया था. परंतु राज्य सरकार ने आवश्यक कार्रवाई नहीं की. राज्य सरकार ने हमें सिर्फ आश्वासन ही दिया. राज्य सरकार अपना रिपोर्ट भेजें हम जाम हटा लेंगे.पिछली बार पांच दिनों तक चला था आंदोलन
alt="" width="1080" height="531" /> विदित हो कि वर्ष 2022 में 20 सितंबर से 25 सितंबर तक खेमाशुली स्टेशन पर रेल चक्का और स्टेशन से सटे हाईवे 49 को कुड़मी/ कुरमी टोटेनिक के बैनर तले जाम किया गया था. उस आंदोलन का नेतृत्व अजीत प्रसाद महतो ने किया था. उस आंदोलन के दौरान भी रेल परिचालन बंद हुआ था और हाईवे 49 पर वाहनों की लाइन बहरागोड़ा तक पहुंच गई थी. जिस तर्ज पर 2022 में यहां पर आंदोलन हुआ था. उसी तर्ज पर इस बार भी आंदोलन हो रहा है.
3 दिनों से ट्रेनों का परिचालन ठप, व्यवसाय पर पड़ा असर
alt="" width="1280" height="591" /> कुड़मी को एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर पश्चिम बंगाल के खेमाशुली रेलवे स्टेशन पर रेल ट्रैक को जाम कर दिया गया है. इससे हावड़ा-टाटानगर रूट से ट्रेनों का परिचालन बंद है. इसका असर घाटशिला रेलवे स्टेशन पर भी पड़ा है. तीन दिनों से घाटशिला स्टेशन पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है. हावड़ा-मुंबई रेलखंड से जमशेदपुर की ओर जाने वाली पैसेंजर, एक्सप्रेस एवं मेमो सभी ट्रेनें रद्द किए जाने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ट्रेन परिचालन नहीं होने से कॉलेज में छात्रों की संख्या काफी कम हो गई है. घाटशिला कॉलेज में राखामाइन्स, जादूगोड़ा, गालूडीह, धालभूमगढ़, चाकुलिया, झाड़ग्राम आदि क्षेत्र से करीबन हजारों विद्यार्थी कॉलेज में पढ़ने आते हैं.
सब्जियों की किल्लत, भिंडी-पटल 100 रु किलो बिक रहा
ट्रेनों का परिचालन बंद होने से घाटशिला के सब्जी मार्केट में सब्जी की किल्लत होने लगी है. अधिकांश सब्जी पश्चिम बंगाल से ही आती हैं. ट्रेन और सड़क मार्ग दोनों जाम होने से बाजार में सब्जी काफी कम देखने को मिली. सब्जी कम आने के कारण सब्जी महंगी हो गई है. बरबटी, भिंडी, पटल 100 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. स्टेशन के बाहर होटल, ठेला, खोमचा लगाने वालों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है. कमोबेश ऑटो चालक भी तीन दिनों से बैठकर दिन काट रहे हैं. ट्रेनों का परिचालन बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी डेली पैसेंजर को हो रही है.मजदूर नहीं जा पा रहे मजदूरी करने, कई भुखमरी के कगार पर
चाकुलिया से लेकर राखामाइन्स स्टेशन तक से लगभग हजारों की संख्या में मजदूर मजदूरी करने जमशेदपुर जाते हैं. ट्रेन बंद होने से इन लोगों के समक्ष भुखमरी की स्थिति बन गई है. रेल प्रशासन जमशेदपुर से चाकुलिया के बीच लोकल ट्रेनों का परिचालन शुरू कर देता तो छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होती और मजदूरों की परेशानी दूर हो जाती. इतना ही नहीं घाटशिला बाजार में अधिकांश सामान कोलकाता से हॉकर द्वारा लाए जाते हैं, लेकिन ट्रेनें बंद होने से उन लोगों की भी स्थिति खराब हो गई है. ज्ञात हो कि कुड़मी जाति को एसटी में शामिल करने और कुड़मी भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने की मांग को लेकर अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आदिवासी कुड़मी समाज द्वारा पश्चिम बंगाल के खेमाशुली स्टेशन पर पिछले 5 अप्रैल से रेलवे ट्रैक जाम कर दिया है. चार अप्रैल से एनएच-49 जाम है.alt="" width="150" height="150" />
alt="" width="150" height="150" />
alt="" width="150" height="150" />

Leave a Comment