केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अग्निपथ (अग्निवीर) योजना में नियुक्त जवानों को चार साल के अलावा दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प दिया है. वह अब कुल छह साल तक सेना में रहेंगे. पहले 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट के आधार पर नियमित सैनिक बनाने का प्रावधान था. अब सभी के लिए नियमित होने का रास्ता खुल गया है. इसी तरह उनके वेतन में भी बढ़ोतरी की गई है. इसे अब रिफॉर्म बताया जा रहा है.
केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना को 14 जून 2022 को लागू किया था. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ इसकी घोषणा की थी. सितंबर 2022 में पहली भर्ती शुरू हुई थी. यानी जो युवा अग्निवीर के तौर पर सेना में शामिल हुए थे, उनके चार साल पूरे होने वाले हैं.
जब अग्निवीर योजना को लागू किया गया था तब इसकी जमकर आलोचना हुई थी. युवाओं, विपक्षी दलों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इसका विरोध किया था. देशभर में प्रदर्शन हुए थे. विरोध की वजह नौकरी की अनिश्चितता के अलावा पेंशन, ग्रेच्युटी, कैंटीन लाभ व मेडिकल सुविधा अग्निवीरों के लिए उपलब्ध नहीं होना था.
इसके साथ ही भारतीय सेना की क्षमता को लेकर भी सवाल उठे थे. चार साल के छोटे कार्यकाल की वजह से युद्ध क्षमता में कमी की आशंका जतायी गयी थी. विपक्ष ने इस योजना को देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया था. पूर्व सैन्य अधिकारियों ने यह कहकर आलोचना की थी कि बिना पायलट प्रोजेक्ट किए इसे लागू किया गया.
विपक्ष की तरफ से यह भी आरोप लगा था कि सरकार ने सेना के ऊपर इसे थोप दिया है. सेना को विश्वास में नहीं लिया गया. सेना के अधिकारियों ने जो प्रस्ताव दिया था, उसके विपरित योजना को लागू किया गया. बड़े पैमाने पर और व्यापक स्तर आलोचनाओं के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे युवा, फिट व तकनीकि रुप से सक्षम सेना बताया था.
साथ ही कहा था कि इससे सेना युवा बना रहेगा. सरकार ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, इज़रायल, चीन जैसे देशों का उदाहरण भी दिया था, जहां छोटी अवधि के लिए युवाओं को सेना में नियुक्त किया जाता है. सरकार ने इस योजना को टेस्टेड प्रैक्टिस भी बताया था और इसे सेना की जरुरत के अनुसार सुधार बताया था.
अब चार नवंबर को सेना ने अग्निवीरों के कार्यकाल में दो साल बढ़ोतरी करने और 25 प्रतिशत के अलावा बाकी 75 प्रतिशत के लिए भी नियमित होने का रास्ता खोलने की घोषणा की है. सत्तारुढ़ दल इसे “रिफॉर्म” बता रहा है. पर असल में यह केंद्र सरकार की “भूल सुधार” है.
सरकार ने चार साल पहले जो गलत फैसला लिया था, उसे अब सुधार लिया है. कह सकते हैं कि सरकार ने यह सुधार भी तब किया है जब मोदी सरकार की लोकप्रियता कम हो रही है और आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव है.
