Ranchi : राज्य में मनरेगाकर्मी सरकार से हुए समझौतों को अमल में लाने के लिए आंदोलन का रुख अख्तियार कर सकते हैं. मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मनरेगा कर्मियों की होती है. राज्य में करीब 5000 से अधिक मनरेगा कर्मी कार्यकरत हैं. 18 माह पूर्व मनरेगा कर्मी हड़ताल पर थे. सरकार से हुई वार्ता के बाद मनरेगा कर्मियों की हड़ताल समाप्त हुई थी. वार्ता के तहत सहमति के बिंदु सरकार ने 18 माह बाद भी लागू नहीं किया है. इसको लेकर झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की ओर से ग्रामीण विकास मंत्री को पत्र लिख सहमति बनी मांगों को पूरा करने का आग्रह किया गया है.
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ग्रामीण विकास मंत्री अलमगीर आलम के अध्यक्षता में हुई थी वार्ता
झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश सोरेन ने कहा है कि सरकार द्वरा पहले कोरोना का बहाना, फिर खजाना खाली का बहाना और तारीखों के खेल से संघ ऊब चुका है. विभागीय अधिकारियों और वार्ता में मौजूद व्यक्तियों के आचरण पर संघ की ओर से सवाल खड़े किये जा रहे हैं. सरकार अगर एक सप्ताह के अंदर हमारी मांगें जिसमें बंगाल सरकार की तर्ज पर तत्काल मानदेय वृद्धि, बिहार सरकार की तरह सेवा पुस्त संधारण का आदेश, झारखंड में घोषित नवीनतम महंगाई भत्ता 196% के आधार पर, मानदेय का पुर्ननिर्धारण, मणिपुर, हिमाचल या राजस्थान की तर्ज पर स्थायीकरण तथा 10 /09/20 को वार्ता के दौरान सहमति बने बिंदुओं पर संकल्प पत्र जारी नहीं करती है तो आंदोलन तेज किया जायेगा. इसे भी पढ़ें - झारखंड">https://lagatar.in/preparations-for-panchayat-elections-intensified-in-jharkhand-training-of-office-bearers-of-eight-districts/">झारखंडमें पंचायत चुनाव की तैयारी हुई तेज, आठ जिलों के पदाधिकारियों का हुआ प्रशिक्षण wpse_comments_template
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