Ranchi: चतरा जिले के सिमरिया (कसियातु गांव) के पास दुर्घटना के शिकार हुए एयर एंबुलेंस में Flight data recorder (FDR) और Cockpit Voice Recorder (CVR) नहीं था. 23 फरवरी 2026 को हुई इस दुर्घटना में कुल सात लोगों की मौत हो गयी थी. प्रारंभिक जांच के दौरान दुर्घटना के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है. इसका पता लगाने के लिए प्रारंभिक जांच के दौरान मिले तथ्यों की जानकारी विदेशी जांच एजेंसियों के साथ साझा किया गया है. दुर्घटना के सिलसिले में Aircraft Accident Investigation Bureau(AAiB) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.
उल्लेखनीय है कि दुर्घटना की जांच के लिए FDR/CVR एक महत्वपूर्ण उपकरण है. इन उपकरणों में रिकॉर्ड होने वाले डाटा से दुर्घटना कारणों और दुर्घटना के समय पायलटों द्वारा किये गये फैसलों से संबंधित जानकारियां मिलती है. चतरा में दुर्घटना का शिकार हुआ एयर एंबुलेंस M/S Redbird था. इस एयर एंबुलेंस का निर्माण 1987 में हुआ था.

एयर एंबुलेंस के विंग्स
प्रारंभिक जांच के दौरान इसके उड़ान से संबंधित सभी दस्तावेज सही पाये गये हैं. Beechcraft King Air C90A, Type के इस एयर एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन नंबर VT-AJN था. दुर्घटना के बाद इस एयर एंबुलेंस का टुकड़ा एक किलोमीटर के दायरे में फैल गया था.
दुर्घटना से संबंधित प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया कि यह यह एयर एंबुलेंस दुर्घटना के समय रांची से दिल्ली की उड़ान पर था. एयर एंबुलेंस दिल्ली से उसी दिन रांची आया था. दिल्ली-रांची और रांची-दिल्ली के उड़ान के समय पायलटों का दल एक ही था. दिल्ली से रांची पहुंचने के बाद चालक दल ने Tech log book में लिखा था कि जहाज में कोई तकनीकी खराबी नहीं है.
रांची पहुंचने के बाद एयर एंबुलेंस में 830 लीटर ATF (फ्यूल) भरा गया. रांची से दिल्ली से उड़ान भरते वक्त इसमें सात लोग सवार थे. इसमें दो पायलट, दो डॉक्टर, एक मरीज, दो अटेनडेंट शामिल है. यात्रियों को लेने के बाद एंबुलेंस ने शाम 7.07 बजे रांची हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी और 7.24 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुआ था.

दुर्घटनाग्रस्त एयर एंबुलेंस का इंजन
ATC के निर्देश पर इस एयर एंबुलेंस को 31 नंबर Runway आवंटित किया गया था. उड़ान भरने के लिए उसे निर्धारित मार्ग W109 आवंटित किया गया था. साथ ही 297 डिग्री की दिशा में उड़ने का निर्देश दिया गया था.
लेकिन जब विमान रनवे पर उड़ान भरने के लिए तैयार हो रहा था, उस वक्त पायलट ने मौसम की खराबी की वजह से उड़ान की दिशा बदलने का अनुरोध किया. पायलट ने आवंटित मार्ग पर 297 डिग्री के बदले 313 डिग्री की दिशा में उड़ा भरने की अनुमति देने का अनुरोध किया. रांची ATC ने पायलट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए 313 डिग्री पर उड़ान भरने की अनुमति दी. उसके बाद एयर एंबुलेंस ने शाम 7.07 बजे उड़ान भरी. रांची ATC ने इस एयर एंबुलेंस को 16000 फुट तक की ऊंचाई तक जाने की अनुमति दी थी.
रांची हवाई अड्डे से उड़ान भरने के दो मिनट बाद यानी शाम 7.09 बजे एयर एंबुलेंस ने कोलकाता ATC से संपर्क किया. कोलकाता ATC को भेजे गये संदेश में जानकारी दी गयी कि एयर एंबुलेंस 5000 फुट की ऊंचाई पार कर रहा है. एयर एंबुलेंस एयरपोर्ट से सात मील दूर है. इसके बाद चालक दल ने रांची ATC को बताया कि ATC से कोलकाता से उसका संपर्क हो चुका है. इसके पांच मिनट बाद यानी शाम 7.15 बजे चालक दल ने कोलकाता ATC से दिशा बदलने की अनुमति मांगी.
चालक दल ने कोलकाता ATC से दाईं तरफ 330 डिग्री की दिशा में जाने की अनुमति मांगी. यानी एयर एंबुलेंस अपने रास्ते से थोड़ा दाईं ओर मुड़ना चाहता था. कोलकाता ATC ने इसकी अनुमति दी.
रास्ता बदलने के तीसरे मिनट एयर एंबुलेंस के चालक दल ने कोलकाता ATC को संदेश भेजा. शाम 7.18 मिनट पर चालक दल द्वारा कोलकाता ATC को भेजे गये संदेश में यह कहा गया कि वे 14000 फुट की ऊंचाई पर स्थित होना चाहते हैं. शाम 7.19 बजे कोलकाता ATC ने इसकी स्वीकृति दी. इसके बाद कोलकाता ATC ने एयर एंबुलेंस को यह निर्देश दिया कि बनारस ATC से संपर्क होने पर इसकी सूचना दें.
एयर एंबुलेंस ने कोलकाता ATC द्वारा दिये गये इस निर्देश की पुष्टि की. इसके बाद एयर एंबुलेंस का किसी ATC से संपर्क नहीं हुआ. तत्काल कोलकाता ATC ने Rescue Coordination Center (RCC) को सक्रिय किया. इस बीच चतरा जिला प्रशासन को शाम 7.58 मिनट पर एयर एंबुलेंस के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली.
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