Ranchi : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने अपना 90वां स्थापना दिवस मनाया. इस दौरान संगठन के नेताओं ने शिक्षा के निजीकरण, नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 और झारखंड में लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया. नेताओं ने कहा कि छात्रों के हितों और समान शिक्षा के अधिकार के लिए संगठन सड़क से लेकर संस्थानों तक संघर्ष जारी रखेगा.
AISF के राज्य सचिव अफसर दुरानी ने संगठन के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि AISF की स्थापना 1936 में लखनऊ के गंगा प्रसाद मेमोरियल में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुई थी. उन्होंने कहा कि संगठन से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता भी जुड़े रहे हैं. आजादी से पहले संगठन ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन किया और वर्तमान समय में भ्रष्टाचार, कालाबाजारी और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष कर रहा है.
उन्होंने राममनोहर लोहिया के कथन का उल्लेख करते हुए कहा, जब सड़क सुनसान हो जाती है तो संसद आवारा हो जाता है.उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करनी होगी.AISF ने समान शिक्षा की मांग को दोहराते हुए कहा कि संगठन का नारा है, राष्ट्रपति हो या चपरासी की संतान, सबको शिक्षा एक समान. नेताओं ने आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीति 2020 के जरिए निजी कॉलेजों और कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है. झारखंड में क्लस्टर सिस्टम को लेकर भी संगठन ने सवाल उठाए और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की.

क्लस्टर सिस्टम के खिलाफ आंदोलन तेज
AISF ने 18 कॉलेजों में बंद की गई एमए की पढ़ाई फिर से शुरू करने तथा बीएससी की पढ़ाई चालू करने की मांग की. संगठन ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो अगले 10 से 15 दिनों में राज्यभर में भूख हड़ताल और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा.
AISF के सह सचिव एवं जिलाध्यक्ष एतेशाम प्रवीण ने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों की बहाली करने के बजाय तकनीकी किटों पर अधिक जोर दे रही है. उनके अनुसार सरकारी स्कूल लगातार बंद हो रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने नई शिक्षा नीति को छलावा बताते हुए कहा कि कई सरकारी नीतियां कागजों तक सीमित रह गई हैं.
AISF की स्टेट प्रेसिडेंट हिमांशी सिंह ने छात्रों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की अपील की. उन्होंने जाति और धर्म के आधार पर बंटने से बचने का आह्वान करते हुए कहा, छात्र की कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता है... छात्र एकता में ही बल है.स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान AISF नेताओं ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के बाजारीकरण और निजीकरण के खिलाफ संगठन आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक करेगा.

