New Delhi : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अवैध खनन मामले में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव को समन भेजकर आज गुरुवार को गवाही के लिए बुलाया था. लेकिन अखिलेश याद आज सीबीआई के सामने पेश नहीं होंगे. इसकी जानकारी समाजवार्दी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने दी है. राजेंद्र चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव कहीं नहीं जा रहे हैं. वह लखनऊ के पार्टी कार्यालय में पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग) की बैठक में भाग लेंगे. उन्होंने कहा कि सीबीआई द्वारा जारी नोटिस के संबंध में उन्हें विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन यह तय है कि वह आज दिल्ली नहीं जा रहे हैं.
जब अखिलेश यूपी थे, तो लोकसेवकों ने अवैध खनन की अनुमति दी
अखिलेश यादव पर यादव पर आरोप है कि जब वह मुख्यमंत्री थे तो उनके कार्यकाल में अधिकारियों ने 2012-16 के दौरान अवैध खनन की अनुमति दी थी. राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने खनन पर प्रतिबंध लगाया था. इसके बावजूद अवैध रूप से लाइसेंस का नवीनीकरण किया गया. यह भी आरोप है कि अधिकारियों ने खनिजों की चोरी होने दी, पट्टाधारकों और चालकों से पैसे वसूले. खनिजों के अवैध खनन के मामले की जांच के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने 2016 में सात प्रारंभिक मामले दर्ज किये थे. यादव के कार्यालय ने एक ही दिन में 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी
सीबीआई ने प्रारंभिक दर्ज मामले में आरोप लगाया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यालय ने एक ही दिन में 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी. उस वक्त उनके पास खनन विभाग भी था. उन्होंने आरोप लगाया था कि यादव ने ई-निविदा प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए 14 पट्टों को मंजूरी दी थी, जिनमें से 13 को 17 फरवरी 2013 को मंजूरी दी गयी थी. सीएम ऑफिस से अनुमोदन लेकर हमीरपुर की जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने पट्टे दिये
सीबीआई ने दावा किया कि 17 फरवरी 2013 को 2012 की ई-निविदा नीति का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद हमीरपुर की जिलाधिकारी बी. चंद्रकला द्वारा पट्टे दिये गये थे. एजेंसी ने 2012-16 के दौरान हमीरपुर जिले में खनिजों के कथित अवैध खनन की जांच के सिलसिले में आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला, समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) रमेश कुमार मिश्रा और संजय दीक्षित (जिन्होंने बसपा के टिकट पर 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा था) सहित 11 लोगों के खिलाफ अपनी प्राथमिकी के संबंध में जनवरी 2019 में 14 स्थानों पर तलाशी ली थी. यादव 2012 और 2017 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री थे
प्राथमिकी के अनुसार, यादव 2012 और 2017 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री थे और 2012-13 के दौरान खनन विभाग उनके पास था, जिससे जाहिर तौर पर उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गयी. साल 2013 में उनकी जगह गायत्री प्रजापति ने खनन मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था, जिन्हें चित्रकूट निवासी एक महिला द्वारा बलात्कार का आरोप लगाये जाने के बाद 2017 में गिरफ्तार कर लिया गया था. [wpse_comments_template]
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