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झारखंड प्रदेश कांग्रेस संगठन में नहीं है सब ठीक

Kaushal Anand Ranchi : लोकसभा चुनाव के पहले झारखंड प्रदेश कांग्रेस में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. प्रदेश कांग्रेस के मास नेता, पदाधिकारी, मंत्री, सांसद और विधायक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर की कार्यशैली से काफी दिनों से नाराज चल रहे हैं. झारखंड में नए प्रभारी गुलाम अहमद मीर के आने और उनके अलग-अगल बैठकों के बाद यह मामला पूरी तरह से सतह पर आ गया. यहां तक कि प्रदेश पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में नेताओं के बीच आपस में नए प्रभारी की मौजदूगी में तू-तू, मैं-मैं तक हुई, जिसमें गीता कोड़ा का भाजपा में जाने की संभावना मामला प्रमुख रहा है. खबर यह जरूर आयी कि गीता कोड़ा को प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने पिछले दिनों नए प्रभारी के आने के बाद बैठक में फोन करके बुलाया. मगर इसके पीछे की कहानी कुछ और ही है. दरअसल गीता कोड़ा की नाराजगी ही प्रदेश अध्यक्ष से चल रही थी. तमाम बैठकों के बाद नए प्रभारी जो रिपोर्ट बनाकर दिल्ली ले गए हैं, वह वर्तमान प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ बताया जा रहा है. अगर लोकसभा चुनाव के पहले फरवरी तक राजेश ठाकुर बदले जाते हैं, तो कोई अचरज वाली बात नहीं होगी.

बैठक के दौरान ही पूर्व अध्यक्ष और एक मंत्री के बीच हुई काफी कहा-सुनी

नए प्रभारी गुलाम अहमद मीर की उपस्थिति में प्रथम सप्ताह में प्रदेश पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक की हुई थी. इस बैठक में एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने वर्तमान के एक मंत्री पर सवाल उठाया. कई बातें मीटिंग के दौरान मंत्री को कह दी. फिर क्या था मंत्री ने भी पूर्व अध्यक्ष को जी भर के सुना दिया. कह दिया कि आप गत विधानसभा चुनाव में क्यों कांग्रेस से भाग गए. तब पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि टिकट नहीं मिला इसलिए. फिर क्या था मंत्री ने कहा दिया कि क्या टिकट पाने के लिए ही पार्टी में थे. मंत्री के इस जवाब से नाराज हो होकर मंत्री को यहां तक कह दिया कि आप तो साइकिल चलाते थे, मैं ही आपको कांग्रेस में लाया. अंत में प्रभारी ने बीच बचाओ किया, तब जाकर दोनों शांत हुए. यह मंत्री भी एक खास वर्ग से तालुक्क रखने के कारण प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं. मगर एक पूर्व अध्यक्ष इनके खिलाफ फिल्डिंग करते रहते हैं.

गीता कोड़ा ने नए प्रभारी को बतायी अपने मन की बात

पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के बैठक के पूर्व नए प्रभारी गुलाम अहमद मीर के साथ गीता कोड़ा ने आधे घंटे तक अकेले में बात की और अपने मन की बात बतायी. कहा कि उनके भाजपा में जाने की अफवाह वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष ही उड़वाते रहे हैं. जब भी मेरा नाम प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आता है, प्रदेश अध्यक्ष ही ऐसी अफवाह उड़वा देते हैं, ताकि मेरा पत्ता ही कट जाए. प्रदेश अध्यक्ष की इस कार्यशैली से गीता कोड़ा ने प्रभारी के समक्ष नाराजगी जाहिर की. मालूम हो कि बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए गीता कोड़ा ने साफ कर दिया कि वे जन्मजात कांग्रेसी हैं, वे भाजपा में नहीं जा रही हैं, उनके विरोधी इस तरह की अफवाहें उड़वा रहे हैं.

बोर्ड-निगम में जगह नहीं पाने वाले नेताओं ने नए प्रभारी के समक्ष रखी खुलकर अपनी बात

बोर्ड-निगम में जगह नहीं पाने वाले कांग्रेस नेताओं ने भी नए प्रभारी के समक्ष अपनी बातें खुलकर रखीं. इन्होंने कहा कि वे गणेश परिक्रमा करने वाले नेताओं और पदाधिकारियों को बोर्ड-निगम में जगह दिलवा देते हैं, जब इसकी शिकायत वे प्रदेश से करते हैं तो वह कहते हैं कि यह मामला केंद्रीय आलाकमान का है. जबकि चाहे चुनाव लड़ने का मामला हो, गठबंधन या अकेले चुनाव में जाने का मामला या फिर किसी पदाधिकारी को बोर्ड-निगम में जगह देने का. यह पूरी तरह प्रदेश स्तर पर तय होता है, इसकी रिपोर्ट और अनुशंसा के बाद ही केंद्रीय नेतृत्व उस पर अपनी मुहर लगाता है. ऐसे नेताओं ने उदारहण देते हुए बताया कि 2014 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन प्रभारी बीके हरिप्रसाद और पार्टी हाई कमान गठबंधन में चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने प्रदेश कार्यकारिणी से प्रस्ताव पारित कर हाईकमान को भेज दिया कि झारखंड में पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी और प्रदेश के फैसले को हाईकमान ने अंगीकार किया. [wpse_comments_template]  

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