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दईया रे दईया...सब इ पाठिए बाबा के चाहीं, तो दूसर लोग का करिहें

Sanjay Singh  चुनावी चकल्लस ई पलामू है. चुनावी मौसम आया, तो कांग्रेस के ढेरे नेताजी लोग टरटराये लगे. सबके डाल्टनगंज से ही टिकट चाही. दर्जन भर दावेदारी का ताल ठोंक रहे हैं. लेकिन एगो पाठी बाबा फिर से टिकट ला लकलकाइल हैं. पाठी बाबा के सेटिंग ऊपरे से है. हाले में चतरा से लोकसभा चुनाव में पंजा हथिया के लेते आये. सोचे, जीत तो पक्की है. लेकिन चतरा के लोगों ने बाहरी पाठी जी को पाठा बनाकर भेज दिया. लोकल फॉर वोकल काली को हार पहना दिया. पाठी बाबा हबकुनिए गिरे. अब देखिए न.. बाबा चतरा गये, स्थानीय नेताजी लोग, खासकर लालटन धारी नेताजी लोग उन्हें पचा नहीं पा रहे थे. रांची के प्रभात तारा मैदान में इंडी गंठबंधन की रैली थी. दिग्गज नेताजी लोग आये हुए थे. लेकिन पंडाल में पाठी बाबा के पाठा लोग लगे रंगबाजी फरियाये. लालटन वाले नेताजी लोग से भिड़ गये. फिर क्या था, लत्तम-जूत्तम खूब हुआ. नॉनभेज  गालियों का आइटम तो ऐसा-ऐसा था कि पूछिए मत. कुर्सी फेंका-फेंकी तक हुआ था. पाठी बाबा के अनुज का सिर थुरा गया. लहु के रंग दिख गये. अनुज बाबू तिलमिलाये, कहे लगे ई लाल रंग तुझे न छोड़ेगा. लालटन पर कुर्सी फेंकी, अफरा-तफरी मची थी. पाठी बाबा के पाठा लोग की करनी की नीचे से ऊपर तक के नेताजी लोग तक चर्चा हुई... अनुशासन तार-तार हुआ. पर कार्रवाई कुछ न हुआ. अब विधानसभा चुनाव नजदीक आया है, तो पाठी बाबा एक्टिव हो गये हैं. ऊपरे से सेटिंग करे में माहिर पाठी बाबा छह बार पंजा छाप टिकट हथियावे में कामयाब रहे. एक बार जीते, मंत्री भी बने. खूबे रौब गांठे. चलती थी तो किसी को पूछबे नहीं करते थे. चुनाव हारे, हबकुनिए गिरे. फिर लड़े-फिर हारे, चतरा लोकसभा ने भी चलता कर दिया. अब फिर से पाठी बाबा को डाल्टनगंज सीट का टिकट चाहिए. बाकी नेताजी लोग को तो पाठी बाबा कीड़ा-मकोड़ा ही समझते हैं. ऊपरे सेटिंग है, तो पाठी बाबा टिकटवा हथियाइये लेंगे. लेकिन अबकी उनकी पार्टी के लोग ही ताल ठोकले हैं. शुकुल से लेकर पाठक बाबा भी कमर कस के तैयार हो गये हैं. लेकिन पाठी बाबा राजनीति के शतरंज के माहिर खिलाड़ी हो गये हैं. डमी कैंडिडेट से भी दावेदारी करवा रहे हैं. एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार-चार गो डमी कैंडिडेट को आगे कर रहे हैं, ताकि समय आने पर अपनी दावेदारी मजबूत कर टिकट हथिया लें. हालांकि कांग्रेसियों के एक खेमा पाठी बाबा को पटकनिया देने लगी तैयार बइठल है. इ खेमा पाठी बाबा के पीठियायेगा.

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