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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- "तानाशाह अफसर" राज्य को "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" बना देंगे

Ranchi : इलाहाबाद हाईकोर्ट अपने एक फैसले में नोएडा डीएम मेधा रुपम पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि "तानाशाह अफसर" राज्य को "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" बना देंगे. कोर्ट की यह टिप्पणी नोएडा डीएम द्वारा एक लॉ स्टूडेंट और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को बिना किसी ठोस सबूत के एनएसए (NSA) के तहत हिरासत में लेने के आदेश को लेकर आया है. ऑर्वेलियन डिस्टोपिया का मतलब एक ऐसा समाज, जिसमें शासन दमनकारी होता है और वह समाज डरावना बन जाता है.
 
  • - कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि अगर ऐसे अफसरों को नहीं रोका गया तो जल्द ही ऐसा समय आ सकता है, जब प्रशासन में मौजूद गलत काम करने वाले लोग उत्तर प्रदेश को "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" में बदल देंगे. एक ऐसी दमनकारी राज्य जहां लोगों की आजादी छीन ली जाती है.

Lagatar Desk : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में नोएडा डीएम मेधा रुपम पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि "तानाशाह अफसर" राज्य को "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" बना देंगे. कोर्ट की यह टिप्पणी नोएडा डीएम द्वारा एक लॉ स्टूडेंट और एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को बिना किसी ठोस सबूत के एनएसए (NSA) के तहत हिरासत में लेने के आदेश को लेकर आया है. ऑर्वेलियन डिस्टोपिया का मतलब एक ऐसा समाज, जिसमें शासन दमनकारी होता है और वह समाज डरावना बन जाता है.

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश उन तमाम अफसरों (IAS-IPS) के लिए एक सबक है, जो दायरे से बाहर जाकर सत्ता को खुश करने के लिए काम करते हैं. कायदे-कानून को तोड़ते हैं. पिछले हफ्ते कोर्ट ने इसी मामले में नोएडा के डीएम को 5 लाख रुपये जुर्माना देने का आदेश दिया था. जुर्माने की राशि की वसूली एनएसए के तहत हिरासत में लेने का आदेश जारी करने वाले नोएडा डीएम व अन्य जिम्मेदार अफसरों के वेतन से होगी.

 

उल्लेखनीय है कि आकृति चौधरी इसी साल अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन में शामिल थे. पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था. 13 मई को आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ नोएडा के डीएम मेघा रुपम ने एनएसए के तहत कार्रवाई करने का आदेश जारी किया था.

 

  • कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अफसरशाही और पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण है. अफसरों को अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वह नागरिकों के संवैधानिक और कानून अधिकारों, गरिमा, सम्मान व कल्याण की रक्षा करे. इसलिए नहीं कि वह मनमानी करें और राज्य व समाज को ऑर्वेलियन डिस्टोपिया में बदल दे. 

 

कोर्ट ने अफसरों को चेताते हुए कहा है कि उन्हें यह ध्यान में रखना चाहिए कि उनकी वफादारी संविधान के प्रति है, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति. अफसर जनता की सेवा करने वाले सेवक होते हैं और लोकतंत्र में जनता की मालिक होती है. अगर ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अफसर इसे नजरअंदाज करते हैं, नियम विरूद्ध काम करते हैं, तो इसे ब्रिटिश शासन की दमनकारी निशानी के रूप में देखा जा सकता है. इससे नागरिकों में अशांति का माहौल बन सकता है. 

 

कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा है कि अगर इन्हें नहीं रोका गया तो जल्द ही ऐसा समय आ सकता है, जब प्रशासन में मौजूद गलत काम करने वाले लोग उत्तर प्रदेश को "ऑर्वेलियन डिस्टोपिया" में बदल देंगे. एक ऐसी दमनकारी राज्य जहां लोगों की आजादी छीन ली जाती है. 

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