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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर JAP-IT टेंडर में भाग लेने का आरोप, सेंटर फॉर आरटीआई की विभागीय सचिव से जांच की मांग

JAP-IT द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों के इंपैनलमेंट की चल रही टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ खड़े हुए हैं. सेंटर फॉर आरटीआई के अध्यक्ष पंकज यादव ने विभागीय सचिव को पत्र लिखकर टेंडर में शामिल कंपनियों के दस्तावेजों की गहन जांच कराने की मांग की है.
 

Ranchi : JAP-IT द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों के इंपैनलमेंट की चल रही टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ खड़े हुए हैं. सेंटर फॉर आरटीआई के अध्यक्ष पंकज यादव ने विभागीय सचिव को पत्र लिखकर टेंडर में शामिल कंपनियों के दस्तावेजों की गहन जांच कराने की मांग की है.

 

पंकज यादव ने अपने शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियों ने फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र, गलत मानव संसाधन (मैनपावर) का विवरण तथा कथित रूप से संदिग्ध बैंक गारंटी के आधार पर टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया है. उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक इंपैनलमेंट की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए.

 

शिकायत में यह भी कहा गया है कि JAP-IT में पहले से इंपैनल रही कुछ कंपनियों पर आउटसोर्सिंग कर्मियों को समय पर भुगतान नहीं करने तथा नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूलने जैसे आरोप पहले भी लग चुके हैं. हालांकि इन आरोपों की अब तक न तो जांच हुई है और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई है. ऐसे में उन्हीं कंपनियों के दोबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने पर सवाल उठाए गए हैं.

 

पंकज यादव ने पत्र में विशेष रूप से बेंगलुरु स्थित एप्टैड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड का उल्लेख करते हुए उसके दस्तावेजों की जांच करानेऔर आरोप सही पाए जाने पर कंपनी तथा उसके निदेशकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है. इसके अलावा बालाजी, एवरग्रीन, कमांडो सिक्योरिटी सर्विस, शिवा सहित अन्य कंपनियों के दस्तावेजों की भी निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया गया है.

 

पंकज यादव ने कहा कि सेंटर फॉर आरटीआई भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्य करने वाली संस्था है और संस्था की विभिन्न शिकायतों एवं जनहित याचिकाओं पर सीबीआई, एसीबी, ईडी तथा आयकर विभाग जैसी एजेंसियां जांच कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकारी टेंडरों में यदि कोई कंपनी शपथपत्र के माध्यम से फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करती है तो यह गंभीर कानूनी अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

 

उन्होंने यह भी मांग की है कि योग्य एवं विश्वसनीय एजेंसियों को ही इंपैनल किया जाए तथा झारखंड की स्थानीय एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि राज्य के युवाओं के हित सुरक्षित रह सकें.

 

शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि सरकारी कार्यों के लिए मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसियां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चयनित होती हैं, तो इससे भविष्य में बड़े वित्तीय घोटालों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. शिकायतकर्ता ने पूर्व में सामने आए शराब घोटाले का उल्लेख करते हुए विभाग से इस बार पूरी सतर्कता के साथ सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराने की मांग की है.

 

  

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