Ranchi : मूलवासी सदान मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने आरोप लगाया है कि राज्य में बहाल किये गये 107 सहायक लोक अभियोजकों (एपीपी) में 47 बाहरी हैं. कहा कि एक बार फिर झारखंडी छले गये हैं. राज्य के युवाओं का शैक्षणिक भविष्य खतरे में है. राज्य के पढ़े-लिखे झारखंडी अभ्यर्थियों की उपेक्षा की जा रही है. राज्य में जिस तरह से बाहरी लोगों की सरकारी सेवा में नियुक्ति हो रही है, इससे लगता है कि यहां झारखंडी वातावरण कभी बन नहीं पाएगा. उन्होंने कहा महाराष्ट्र में मराठी भाषा में सरकार परीक्षा लेती है और गुजरात में गुजराती में. और उन लोगों की ही नियुक्ति होती है, जो राज्य की भाषा जानते हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार में सरकार अपने राज्यों के अभ्यर्थियों को ही प्राथमिकता दे रही है. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि हेमंत सरकार ने 1932 के खतियान आधारित नियोजन नीति के नाम पर वोट लिया था. लेकिन सरकार जिस तरह से झारखंडियों को धोखा दे रही है, आने वाले चुनाव में निश्चित रूप से परिणाम सरकार और उसके गठबंधन के लिए घातक होगा. इसे भी पढ़ें – पहली">https://lagatar.in/first-time-laparoscopic-ventral-hernia-surgery-at-sadar-hospital/">पहली
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आरोप- बहाल हुए 107 एपीपी में 47 बाहरी, छले गये झारखंडी : राजेंद्र प्रसाद

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